नीतीश का इस्तीफा : इस कहानी में न रहस्य है न रोमांच, सबकुछ पहले से तय था

लाइव सिटीज डेस्क (रुद्र प्रताप सिंह) : सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफे में रहस्य और रोमांच जैसा कुछ भी नहीं है. सबकुछ पटकथा के अनुरूप है, जिसका रिहर्सल पिछले कई महीने से चल रहा था. पटाक्षेप इस सीन के साथ होगा…मैं नीतीश कुमार शपथ लेता हूं कि…. जाहिर है, यह सीन भाजपा की मौजूदगी में पूरा होगा. बस्, दिन का इंतजार कीजिए. अधिक नहीं. दो-चार दिन की बात है.

इस्तीफा के लिए मशहूर नीतीश कुमार के साथ यह रिकार्ड भी जुड़ा हुआ है कि बिना वापसी की गारंटी के वे इतना बड़ा कदम नहीं उठाते हैं. सिर्फ 2000 को छोड़कर जब उन्हें बहुमत न मिलने के कारण इस्तीफा देना पड़ा था. उस समय इस्तीफा न देते तब भी पद छोड़ना ही पड़ता.

पहले भी दे चुके हैं इस्तीफा

इससे पहले गैसल रेल दुर्घटना के समय उनका इस्तीफा हुआ था. तब के पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने इस्तीफा मंजूर नहीं किया. सप्ताह भर के भीतर वे फिर पद पर आ गए थे. एक इस्तीफा 2000 में सीएम बनने के दौरान दिया था. बहुमत नहीं मिला. उन्होंने ऐलान किया कि अब दिल्ली नहीं जाएंगे. बिहार में खूंटा गाड़ कर रहेंगे. नहीं रह पाए. उस बार भी सप्ताह भर के भीतर केंद्र में मंत्री बनने के लिए चले गए. हां, लोकसभा के 2014 के चुनाव के जदयू की करारी हार के बाद उन्होंने दुखी मन से इस्तीफा दे दिया था. यह दुख भी अधिक दिनों तक नहीं टिका. साल भर के भीतर मांझी हटाए गए. ख्रुद उन्होंने सीएम की गद्दी संभाल ली.

असहज महसूस कर रहे थे

मजबूरी में राजद से गठबंधन के बाद से ही नीतीश असहज महसूस करने लगे थे. कैबिनेट के बंटवारे के समय ही विवाद हो गया था. नीतीश विधानसभा अध्यक्ष के अलावा पथ निर्माण और स्वास्थ्य विभाग जदयू कोटे में चाह रहे थे. राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद अध्यक्ष पद के लिए तो राजी हो गए. मगर पथ और स्वास्थ्य विभाग के लिए वे अड़ गए. इसके अलावा अफसरों के तबादले-पोस्टिंग में भी दोनों के बीच तनातनी चलती रहती थी.

नोटबंदी ने खोला रास्ता

पीएम नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले का जब पूरा विपक्ष विरोध कर रहा था, नीतीश इसके पक्ष में खड़े हो गए. लगे हाथ उन्होंने बेनामी संपत्ति पर कार्रवाई की मांग कर बता दिया कि वे भाजपा के साथ भूल-चूक लेनी देनी चाह रहे हैं. साथ ही बेनामी संपत्ति पर कार्रवाई की मांग कर लालू प्रसाद के खिलाफ कार्रवाई की चाहत रखते हैं. संयोग से लालू प्रसाद और उनके परिजनों के खिलाफ आय से अधिक और बेनामी संपत्ति के मामले में कार्रवाई कर केंद्र ने नीतीश की चाहत का सम्मान किया.

आगे क्या होगा

भाजपा की मदद से नीतीश राज्य में सरकार चलाएंगे. लोकसभा चुनाव में भाजपा और एनडीए के दूसरे घटक दल अधिकाधिक सीटों पर लड़ेंगे. केंद्र सरकार बिहार विकास के पैकेज के धन को तेजी से रीलिज करेगी. इसी आधार पर लोकसभा और विधानसभा का चुनाव होगा. नीतीश जनता के बीच कहेंगे कि हमने राज्य के हित में भाजपा के साथ समझौता किया था.

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