सुब्रह्मण्यम स्वामी ने बताया – 1994 से चलकर फिर वहीं पहुंचे नीतीश, जानिए कैसे..?

लाइव सिटीज डेस्क: सीएम नीतीश कुमार के बारे में हालांकि कोई कंफ्यूजन नहीं है, लेकिन अगर कोई कंफ्यूज हो तो उनके लिए भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने शुक्रवार को हाथ से बना हुआ कार्टून ट्वीट किया है. इस कार्टून में 1994 से लेकर अब तक के सीएम नीतीश कुमार के राजनीतिक फैसलों को मजाकिया लहजे में दिखाया गया है. स्वामी ने नीतीश के इन फैसलों को ‘नीतीश की कसरतें’ का नाम दिया है. यह इसलिए क्योंकि सात चित्रों वाला यह कोलाज नीतीश को सात अलग—अलग कसरतों के पोज में दिखाता है. हर चित्र में उनके एक राजनीतिक कदम को दिखाया गया है, जो उन्होंने उठाया है.

नीतीश कुमार बिहार के दूसरे सबसे कद्दावर नेता लालू प्रसाद यादव के पुराने मित्र हैं. दोनों की मुलाकात विश्वविद्यालय में हुई थी. 1970 के आसपास लालू प्रसाद नीतीश कुमार के मार्गदर्शक और नेता हुआ करते थे. ये उस दौर की बात है जब दोनों पटना विश्वविद्यालय में पढ़ते थे. इसके बाद 1989 में बने जनता दल में भी दोनों साथ हुआ करते थे. सन् 1994 ही वह मोड़ है जहां से स्वामी की कार्टून कथा शुरू होती है. इसी साल, नीतीश कुुमार जनता दल से और अपने बड़े भाई लालू प्रसाद से भी अलग हुए थे. नीतीश कुमार बाद में उस दौर के सबसे तेजतर्रार फायरब्रांड मजदूर नेता जॉर्ज फ़र्नान्डिस की समता पार्टी में शामिल हो गए थे. बाद में 1997 में लालू प्रसाद ने भी जनता दल को छोड़ दिया और राष्ट्रीय जनता दल का गठन कर लिया.

 

नीतीश का दूसरा बड़ा कदम एक गठबंधन से जुड़ा हुआ है. दौर था सन् 1996 का. सन् 1996 मेें ही समता पार्टी ने भाजपा के साथ लोकसभा चुनावों के लिए गठबंधन किया था. 2003 में फ़र्नान्डिस ने समता पार्टी को जनता दल युनाइटेड (जदयू) में विलय कर दिया. नीतीश कुमार का अगला बड़ा गठबंधन काफी लम्बा चलने वाला था. नीतीश कुमार ने भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से साझेदारी की. यह साझेदारी 2005 से शुरू होकर 2013 तक चली. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने चित्र के इस हिस्से को नाम दिया है ‘नीतीश और भाजपा ने साथ में बिहार पर राज किया.’

2013 आते—आते जदयू ने एनडीए को छोड़ने का चौंकाने वाला फैसला लिया. नीतीश कुमार एक साल बाद होने वाले लोकसभा चुनावों में नरेन्द्र मोदी को एनडीए से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने से नाराज थे. स्वामी ने इस चित्र को ‘नीतीश ने मोदी के लिए बीजेपी को डंप किया’ नाम दिया गया है.

एक साल बाद, 2014 में, नरेन्द्र मोदी की भाजपा ने नीतीश की जदयू को हरा दिया और नीतीश कुमार ने सीएम पद छोड़ दिया. ये चित्र उस दौर की बात बताता है जब 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी और भाजपा प्रचंड बहुुमत से सत्ता में आई थी. जदयू सियासत से किनारे हो चुकी थी. नीतीश कुमार ने हार की जिम्मेदारी ली और इस्तीफा दे दिया.

अब 2015 में स्वामी के चित्र के मुताबिक नीतीश में फिर से बदलाव आ गया. लालू प्रसाद से मिले नीतीश, राजद की ज्यादा सीटों के बावजूद सीएम बनकर लौटे.’ इस चित्र में बिहार विधानसभा चुनाव का वह दौर दिखाया गया है, जब जदयू और लालू प्रसाद की राजद ने साथ मिलकर महागठबंधन बनाया था. 243 सदस्यीय​ बिहार विधानसभा में लालू प्रसाद की राजद ने 80 सीटें जीती थीं ​जबकि जदयू ने 71 सीटें ही जीती थीं. और अब, 2017 में वक्त का पहिया घूम चुका है. चीजें वहीं आकर खड़ी हो गई हैं जो 1994 में थीं. ‘नीतीश ने लालू प्रसाद का साथ छोड़ा, मोदी को धन्यवाद और दोबारा एनडीए से जुड़ गए.’