तो क्या ‘मौसम विज्ञानी’ पासवान की पूर्व सूचना सही होगी !

PASWAN-RAMVILAS
रामविलास पासवान (फाइल फोटो)

लाइव सिटीज डेस्क (रुद्र प्रताप सिंह) : लोजपा नेता रामविलास पासवान को यूं ही मौसम विज्ञानी नहीं कहा जाता है. याद कीजिए. उन्होंने महागठबंधन सरकार के जन्म के दिन ही इसकी उम्र को लेकर पूर्व सूचना दे दी थी- कार्यकाल पूरा नहीं करेगी सरकार. राष्ट्रपति चुनाव के नाम पर महागठबंधन के दलों में तकरार को देखकर अधिसंख्य लोग उनकी पूर्व सूचना पर भरोसा करने लगे हैं. फर्क सिर्फ यह है कि सरकार नहीं, महागठबंधन के दीर्घजीवन पर सवाल उठाए जा रहे हैं. सरकार तो चलेगी, महागठबंधन कायम नहीं रह पाएगा. सीएम नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो की दोस्ती को पहले दिन से ही बेमेल बताया जा रहा है.

तकरार पर पड़ी थी बुनियाद

ऊपर से सबकुछ सामान्य लग रहा था. सच यह है कि तकरार की बुनियाद जदयू, राजद और कांग्रेस के गठबंधन के समय ही पड़ गई थी. यह पहला गठबंधन था, जिसमें सीटिंग और सेकेंड के आदर्श फार्मूला का पालन नहीं हो पाया था. नीतीश की डेढ़ दर्जन से अधिक जीती हुई सीटें राजद-कांग्रेस के खाते में चली गई थीं. वे मन मसोस कर रह गए थे. यह कुर्बानी उन्हें सीएम के रूप में घोषित करने के एवज में देनी पड़ी. सरकार गठन से ठीक पहले विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए तकरार हुआ. अगला दौर कैबिनेट पोर्टफोलियो का था. सड़क और सेहत जैसे महकमे में जदयू अपना मंत्री चाहता था.

PASWAN-RAMVILAS

पहले बैक अप का इंतजाम किया

नीतीश ने धीरे-धीरे भाजपा के साथ अपनी तल्खी कम की. सर्जिकल स्ट्राइक को सराहा. नोटबंदी के पक्ष में खड़े हुए. सोनिया गांधी के बदले पीएम नरेंद्र मोदी के भोज में शामिल हुए. और राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्मीदवार के पक्ष में खड़ा होकर राजद-कांग्रेस को सिग्नल दे दिया-जो करना हो कीजिए. राज्य में सरकार चलाने के अलावा आपके साथ मेरा कोई दूसरा करार नहीं है. दोनों सहयोगी दलों ने सिग्नल को समझ लिया है. रामविलास पासवान तो नीतीश कुमार को लगभग ललकारने के अंदाज में एनडीए में शामिल होने का न्यौता दे रहे हैं. भाजपा नेताओं ने भी नीतीश को कोसना लगभग बंद कर दिया है. एनडीए ही नीतीश सरकार का बैकअप है.

lalu-iftar

और सख्त होंगे नीतीश

नीतीश की कार्यशैली के जानकार दावा कर रहे हैं कि लालू प्रसाद और उनकी संपत्ति से जुड़े विवाद के मामले में वे सख्ती दिखाएंगे. आयकर और इडी की ओर से तेजस्वी या तेज प्रताप कानूनी कार्रवाई के दायरे में आते हैं तो नीतीश इन दोनों को इस्तीफा के लिए कह सकते हैं. लालू के मामले में केंद्रीय एजेंसिया जितनी फुर्ती दिखा रही हैं, उसमें एफआइआर और चार्जशीट में अधिक वक्त लगेगा, ऐसा नहीं सोचा जा सकता है. यही वह दिन होगा जब पहले इस्तीफा के लिए कहा जाएगा. आनाकानी करने पर बर्खास्तगी की सिफारिश हो जाएगी. इस नाम पर अगर राजद समर्थन वापस लेता है तो नीतीश अपनी छवि के हिसाब से खुद महागठबंधन से अलग होने की घोषणा कर देंगे.

तैयारी राजद भी कर रहा है

यह नहीं है कि राजद तैयारी नहीं कर रहा है. गनीमत है कि लालू प्रसाद खुद सीबीआई अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का चक्कर लगा रहे हैं. बच्चे अलग परेशान हैं. सो, लालू कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं. लेकिन, राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में खड़ा होकर उन्होंने खुद को एकबार फिर सोनिया गांधी का करीबी बना लिया है. राजद और कांग्रेस के विधायकों की संख्या 107 है. यह साधारण बहुमत से 15 कम है. राजद को उम्मीद है कि भाजपा से परहेज करने वाले निर्दलीय और कुछ दूसरे विधायक भी उसके पक्ष में खड़े हो जाएंगे. खैर, यह समीकरण काल्पनिक भी हो सकता है. लेकिन यह तो वास्तविक है कि लालू और नीतीश दोनों एक दूसरे से अलग होने की जुगत में हैं.

यह भी पढ़ें –
किस विचारधारा से लालू प्रसाद ने बनाई है 1000 करोड़ की बेनामी संपत्ति: सुमो
लालू के इफ्तार में पहुंचे नीतीश, टोपी पहनाकर हुआ स्वागत
बोले रामविलास, NDA में अगर आयें नीतीश तो बिहार में अपराध में आएगी कमी