Honeymoon खत्‍म होते ही मोदी के Tweet से अधिक ReTweet होने लगे हैं राहुल गांधी

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नई दिल्‍लीः हेडिंग से कंफ्यूज मत होइए . राहुल गांधी की मैरिज ही नहीं हुई है,तो फिर हनीमून कहां मना लेंगे . बातें हो रही हैं केन्‍द्र में नरेन्‍द्र मोदी सरकार की . पांच साल के कार्यकाल में साढ़े तीन साल हो चुके हैं . मतलब सरकार का हनीमून पीरियड खत्‍म .

अब जब हनीमून पीरियड खत्‍म हो चुका है,तो मोदी सरकार से देश ने जवाब मांगना शुरु कर दिया है . भारत की डेमोक्रेसी में पहली बार नहीं हो रहा है . पूर्व की सभी सरकारों से मांगा जाता रहा है . स्‍वयं नरेन्‍द्र मोदी की भाजपा ने भी हिसाब मांगना नहीं छोड़ा है . दिल्‍ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार से तो भाजपा ने सौ दिन बाद ही हिसाब मांगना स्‍टार्ट कर दिया था .

बड़े पोलिटिकल एनालिस्‍ट देश के द्वारा मांगे जा रहे हिसाब को साफ तौर पर देख रहे हैं . पंजाब के गुरदासपुर लोक सभा और केरल के विधान सभा के उप चुनाव में भाजपा को मिली करारी हार से अधिक बड़ी बात नोट की जा रही है . सबों को पता है कि मोदी के विजन को सबसे पहले देश के यूथ ने हाथों-हाथ कैच किया था . फिर इसी यूथ ने देश की फिजां बदली, बात गांव-गली में पहुंच गई . फिर 2014 में नरेन्‍द्र मोदी विशालकाय बहुमत के साथ देश के प्रधान मंत्री बने .

पोलिटिकल एनालिस्‍ट कहते हैं कि लोक सभा और विधान सभा चुनाव से अधिक मार्के वाली बात देश के विभिन्‍न यूनिवर्सिटीज में स्‍टूडेंट्स यूनियन के चुनाव में भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को मिल रही हार है . जेएनयू को अलग भी कर दें,तो दिल्‍ली, पंजाब,राजस्‍थान,असम,इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के चुनाव में विद्यार्थी परिषद को मिली हार इस बात के संकेत दे रहे हैं कि केन्‍द्र सरकार के प्रति छात्रों की हताशा बढ़ी है . इसका सबसे बड़ा कारण देश में नौकरी/रोजगार के अवसर का बहुत अधिक घट जाना माना जा रहा है . यूनिवर्सिटी कैंपस में स्‍टूडेंट्स अपने सीनियर्स की ओर देखते हैं और जब वे कैंपस सेलेक्‍शन के बाद भी बुलावे के इंतजार में लंबे अर्से से निठल्‍ले बैठे दिखते हैं,तो उन्‍हें अपना भविष्‍य भी बेहद खतरे वाले डेंजर जोन में दिखने लगता है .

अब यह तो सबों को पता है कि सोशल मीडिया के असली किंग भारत का युवा वर्ग ही है . कोई पार्टी कितना भी बड़ा आईटी सेल बना ले,देश के सेंटिमेंट्स को बहुत अधिक समय तक हाइजैक कर नहीं रख सकता है . अब सोशल मीडिया के ट्रेंड में आ रहे बड़े बदलाव से संबंधित रिपोर्ट को गौर करें . बेशक अब भी ट्विटर पर नरेन्‍द्र मोदी का ही राज है . दूसरे नंबर पर अरविंद केजरीवाल की तूती बोलती रही है . लेकिन हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की एनालिसिस ने बदलते ट्रेंड की ओर बड़ा इशारा किया है . साल 2015 से एनालिटिकल रिपोर्ट पेश की गई है .

दिव्‍या स्‍पंदना
दिव्‍या स्‍पंदना

कुछ महीने पहले तक की बात थी कि राहुल गांधी सोशल मीडिया में हंसी-ठिठोली के पात्र थे . उन्‍होंने कुछ कहा नहीं कि उपहास उड़ाना शुरु कर दिया जाता था . ढ़ेर सारे मीन-मेख निकल जाते थे . स्‍वयं राहुल भी सोशल मीडिया के वार में कूदने को बहुत सीरियस नहीं रहते थे . पर जब से दिव्‍या स्‍पंदना ने राहुल गांधी की आईटी सेल की जिम्‍मेवारी संभाली है,सोशल मीडिया का युद्ध कई तरीके के परिवर्तनों को देख रहा है . स्‍पंदना राजनीति में आने के पहले फिल्‍म एक्‍ट्रेस रही है .

अब राहुल गांधी मोदी को कड़े जवाब देते हैं . बड़े सवाल पूछते हैं . पंच वाले ट्वीट करते हैं . हिन्‍दी में भी ट्वीट करने लगे हैं . बस तीन दिनों पहले की बात है . 16 अक्‍तूबर को नरेन्‍द्र मोदी गुजरात गये थे . शायद विधान सभा चुनाव की घोषणा के पहले गुजरात को रिझाने को बड़े एलान करने थे . पर कांग्रेस की आईटी टीम ने पंच लाइन ‘आज होगी जुमलों की बरसात,छाता लेकर निकलिएगा’ को हैशटैग के रुप में ऐसा ट्रेंड कराया कि घोषणाओं की फुलझड़ी छोड़ने की रणनीति ही बदलनी पड़ी . ठीक ऐसे ही जब अमेरिका के राष्‍ट्रपति ट्रंप ने अभी पाकिस्‍तान से मधुरता दिखाने को ट्वीट किया,तो राहुल गांधी ने नरेन्‍द्र मोदी से बहुत कड़े सवाल का ट्वीट दाग दिया .

सोशल मीडिया में राहुल गांधी के अग्रेसिव होने का रिजल्‍ट यह निकला है कि जुलाई और सितंबर महीने के बीच उन्‍हें ट्विटर पर एक मिलियन नये लोग फॉलो करने आ गये हैं . यह ग्रोथ इस दरम्‍यान नरेन्‍द्र मोदी को मिले नये फॉलोवर से अधिक है . वैसे दूसरी बात है कि आज भी कुल संख्‍या में नरेन्‍द्र मोदी आगे नहीं बहुत आगे हैं .

आगे ट्वीट के रीट्वीट का हिसाब देखें . यह पॉपुलारिटी का पारामीटर होता है . हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की एनालिसिस रिपोर्ट का कहना है कि अक्‍तूबर के माह में राहुल गांधी का ट्वीट औसत तौर पर 3812 दफे री-ट्वीट होता रहा है . नरेन्‍द्र मोदी को इतने री-ट्वीट औसत तौर पर साल 2015 के दो महीनों में मिले थे . हां,पिछले साल जब 500-1000 के नोट बंद किये गये थे,तब भी मोदी के टवीट का रीट्वीट का आंकड़ा 4074 और अभी कुछ माह पहले जब बिहार में महागठबंधन की सरकार खत्‍म होने के बाद नीतीश कुमार ने जब नरेन्‍द्र मोदी के साथ दोस्‍ती की थी,तब 4055 दफे ट्वीट को रीट्वीट किया गया था .