ठाकुरगंज में बोले नीतीश कुमार- लोगों को किसानी में है रुचि, इसलिए करवाया कृषि महाविद्यालय का निर्माण

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: सीएम नीतीश कुमार तीसरे चरण के चुनाव के लिए प्रचार पर निकले हुए हैं. सीएम का आज 4 जिलों के 6 विधानसभा क्षेत्र में जनसभा का कार्यक्रम है. सीएम ने अपनी पहली जनसभा किशनगंज के ठाकुरगंज विधानसभा क्षेत्र में की. जहां उन्होंने जेडीयू प्रत्याशी नौशाद आलम के लिए वोट मांगा. साथ ही एनडीए को जिताने की अपील की. उन्होंने कहा कि दो चरणों का चुनाव हो गया है. अब अंतिम चरण का मतदान बाकी है. आप पिछले बार की तरह इस बार भी हमें फिर से काम करने का मौका दीजिएगा.

सीएम ने कहा कि कोरोना काल में चुनाव हो रहा है. इसलिए समय कम मिल रहा है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने तीन फेज में मतदान कराने का निश्चय लिया है, इसलिए हर जगह जाना संभव नहीं हो पा रहा है. उन्होेंने कहा कि पहले तो हम हर क्षेत्र में जाया करते थे. लेकिन अब मुश्किल हो जाता है. लेकिन जब भी आपके पास आते हैं तो मुझे काफी खुशी मिलती है.



उन्होंने कहा कि यहां ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया है. सड़क की कुल लंबाई 258 किलोमीटर है. इसके अलावा ठाकुरगंज में अन्य विकास का काम हुआ है. कई सड़कें अभी भी बन रही है. उन्होंने कहा कि महानंदा नदी पर पुल का काम करवाया. उन्होंने कहा कि हमने कोई काम नहीं छोड़ा है. जब हम यात्रा में घूमते रहते हैं तो हम सब देखते हैं. उन्होंने कहा कि हमने देखा कि किशनगंज में लोगों को कृषि में रुचि है. इसके लिए हमने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम से किशनगंज में कृषि महाविद्यालय का निर्माण कर दिया. हमने जल जीवन हरियाली के तहत काम किया.

सीएम ने कहा कि पहले क्या स्थिति थी? लोग शाम को घर से बाहर तक नहीं निकलते थे. कब किसका अपहरण हो जाए, किसी को पता तक नहीं होता था. उन्होंने कहा कि हमने पहले ही कहा था कि हम अपराध को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे. हमें जबसे काम करने का मौका मिला हमने पहले राज्य में कानून राज कायम किया. उन्होंने कहा कि हमने शिक्षा के क्षेत्र में काम किया है. पहले पढ़ाई को लेकर बिहार की क्या स्थिति थी. लेकिन हमने सबमें सुधार किया. लड़कियां पहले पढ़ने नहीं जाया करती थी. लेकिन हमने पोशाक योजना की शुरुआत की. उसके बाद धीरे-धीरे हमने प्राथमिक विद्यालयों में लड़कियों के लिए साईकिल योजना शुरू की. सीएम ने बताया कि हमने इसके बाद स्कूलों में सर्वे कराया तब मालूम चला कि लड़कों के अपेक्षा लड़कियां स्कूलों में ज्यादा हैं.