चिराग के खिलाफ नीतीश ने खेला खेल, आरजेडी- कांग्रेस ने कही ये बात

बिहार के जमुई से सांसद चिराग पासवान को लोक जनशक्ति पार्टी के संसदीय दल के नेता की कुर्सी से हटा दिया गया है. इसपर अब उनके चाचा और सांसद पशुपति कुमार पारस बैठेंगे. दरअसल, लोक जनशक्ति पार्टी में बगावत के बाद सभी पांचों सांसद ने चिराग पासवान का साथ छोड़ दिया है और अब सभी ने उनके चाचा पशुपति कुमार पारस को अपना नेता मान लिया है. यह फैसला पार्टी के 5 सांसदों ने मीटिंग के दौरान लिया. सांसदों ने मीटिंग के बाद कहा कि हमारी तरफ से पशुपति कुमार पारस को ही पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है.

लोजपा में टूट के बीच आरजेडी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा है कि जनता दल यूनाइटेड धन बल की ताकत पर ऐसा खेल पहले से खेलता आया है. नीतीश कुमार इस खेल के पुराने माहिर खिलाड़ी हैं और अब लोक जनशक्ति पार्टी के साथ खेल खेला जा रहा है. आरजेडी प्रवक्ता ने कहा है कि उन्हें इस बात की उम्मीद कम है कि लोक जनशक्ति पार्टी टूट जाएगी. बावजूद इसके अगर ऐसा होता है तो इसके लिए नीतीश कुमार जिम्मेदार होंगे. नीतीश कुमार दूसरे दलों को तोड़ने वाली राजनीति में विश्वास करते हैं और बिहार पिछले 15 सालों में इसका गवाह रहा है. आरजेडी की मानें तो चिराग पासवान बुरी तरह से नीतीश के जाल में फंस चुके हैं.

इधर, लोजपा में टूट के बीच कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि लोजपा को कौन तोड़ रहा है लोजपा है कहां. लोजपा एनडीए में है और एनडीए उसको तोड़ रहा है. जिसके हनुमान चिराग थे वो राम आज रावण के भूमिका में आ गए हैं या बिभीषन के भूमिका में यह पता नहीं चल रहा है . लेकिन बड़ी बात यह है कि नीतीश कुमार आख़िर दलित नेताओं का अस्तित्व को क्यों समाप्त करना चाहते हैं. रामविलास पासवान 2005 में 29 विधायक जीत के आए थे. उस समय भी सत्ता की चाभी उनके हाथ में थी. उस समय भी नीतीश कुमार ने उनके 29 एमएलए को तोड़ कर उनके अस्तित्व को खत्म करने की कोशिश की थी. लेकिन रामविलास का अस्तित्व समाप्त नहीं हुआ बल्कि यूपीए कार्यकाल में एनडीए के मंत्रिमंडल के सदस्य बने और आज एनडीए में भी मंत्रिमंडल के सदस्य बने. आखिर नीतीश कुमार को दलित नेताओं से क्यो डर लगता है.