आजाद है ‘सृजन घोटाले’ का फेमस आर्टिस्‍ट विपिन शर्मा, दूध में शिलाजीत मिला पी रहा है

पटना/भागलपुर : कोई 1300 करोड़ रुपये के बिहार के भागलपुर के चर्चित ‘सृजन घोटाले’ का सबसे पॉपुलर किरदार भाजपा नेता विपिन शर्मा रहा है. घोटाले का भांडा फटने के पहले दिन से वह मीडिया में स्‍कैम का सबसे अधिक स्‍पेस बटोरता रहा. मुख्‍य मंत्री नीतीश कुमार ने संज्ञान में आते ही जैसे स्‍टेट प्‍लेन से बिहार पुलिस की इओयू टीम को भागलपुर में लैंड कराया था, विपिन शर्मा चोर बिल में जा घुसा था. पीछे में केवल विपिन शर्मा के किस्‍से और नेताओं के संग तस्‍वीरें सामने आ रही थी.

पर, भागलपुर के लोग कह रहे हैं कि अब तो विपिन शर्मा छुट्टा घूम रहा है. पिछले दिनों वह भागलपुर में पुरानी धमक के साथ टहलता रहा. मिलने वालों से सीबीआई को थैंक्‍स कहता रहा. शर्मा की डूबी चमक को फिर लौटते देख भागलपुर के कइयों ने कहा कि दूध में शिलाजीत मिला पीने की छूट दोबारा मिल गई है. भाजपा कनेक्‍शंस काम आ रहा है. दूसरी बात है कि सृजन घोटाले में जैसे ही विपिन शर्मा का नाम आना प्रारंभ हुआ था, भाजपा ने पार्टी से सस्‍पेंड कर दिया था.



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विपिन शर्मा (फाइल फोटो)

अब तक कोई राजफाश नहीं कर पाई सीबीआई

सृजन घोटाले की जांच जब बिहार पुलिस से लेकर सीबीआई को दी गई थी, तो ऐसा लगा था कि कई बड़े खुलासे होंगे. पर, जांच को जिस तरीके से सीबीआई आगे बढ़ा रही है, लगता है –’जांच गाड़ी’ पहले से पंक्‍चर है. अब तो सृजन घोटाले के सभी चर्चित किरदार भागलपुर में ठाठ से दिखने लगे हैं.

सीबीआई ने अब तक ऐसा कुछ भी नहीं किया है, जिससे भागलपुर-बिहार को इस बात का संकेत मिले कि वह बिहार पुलिस द्वारा पहले चिह्नित की गई छोटी मछलियों से आगे बढ़कर किसी घडि़याल को पकड़ना चाहती है. विपिन शर्मा ने तो आजादी से अपना फेसबुक एकांउट भी आपरेट करना शुरु कर दिया था.

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सृजन संस्था का कार्यालय (फाइल फोटो)

घोटाले के रुपयों की जब्‍ती की उम्‍मीद नहीं

सीबीआई की जांच टीम सृजन घोटाले को जिस चाल-ढ़ाल से नाप-माप रही है, उसमें इस बात की उम्‍मीद खत्‍म होती जा रही है कि कोई बड़ी जब्‍ती वापस आकर सरकारी कोष में जमा हो पाएगी. अरबों रुपये डकार गये घोटालेबाजों को इतना वक्‍त मिल गया है कि वह सभी पैसों को ठिकाना लगा दें.

बताया जाता है कि सृजन घोटाले के मगरमच्‍छों ने सरकारी पैसे से देश-विदेश में कई डेस्टिनेशन पर जमीन-जायदाद खरीदे हैं. घोटाले से लाभान्वित अकेले विपिन शर्मा नहीं, और कई बड़े राजनीतिज्ञ हुए हैं. भागलपुर के लोगों की मानें तो विपिन शर्मा को दूध में शिलाजीत मिलाकर पीने की आजादी इसलिए मिली हुई है, क्‍योंकि जब वह फंसेगा, तब कई बड़े नाम खुलेंगे, सबों को पता है.

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मनोरमा देवी थी घोटाले की सूत्रधार

सृजन की संस्‍थापिका मनोरमा देवी थीं. उनके निधन के पहले घोटाला बिलकुल ठीक तरीके से चल रहा था. सिंडिकेट बिलकुल तय नियम से काम कर रहा था. विपिन शर्मा मनोरमा देवी के लिए मुंहबोला बेटा जैसा था.

स्वर्गीय मनोरमा देवी (फाइल फोटो)

सरकार का पैसा सीधे सृजन के खाते में ट्रांसफर हो जाता था. फिर यह पैसा ब्‍याज पर लगने को मार्केट में चला आता था. जब सरकार को पैसों की निकासी की जरुरत होती थी, संदेशा समय से पहले सृजन तक पहुंच जाता था. पैसे की व्‍यवस्‍था कर बैंकों में राशि जमा हो जाती थी, इसलिए किसी को घोटाले की बू नहीं लगती थी.

चेक बाउंस होने लगे तो फटा सृजन घोटाला

मनोरमा देवी की मौत के बाद सृजन के बहाने सरकारी पैसों से मालामाल होने वाले लोगों के मन में बेईमानी घुस गया. वे पैसे नहीं लौटाने लगे. परिणाम रहा कि सरकार का चेक बाउंस होने लगा. चेक जब बाउंस हुए तो जांच शुरु हुई और घोटाला फट गया. यह घोटाला कई जिलों में फैला पाया गया. कई नौकरशाह भी इस घोटाले में फंसे दिख रहे थे, पर सीबीआई की चाल अभी इतनी धीमी है कि सभी आजाद महसूस कर रहे हैं.

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