बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी ने कर्नाटक विधानसभा संकट पर अध्यक्ष को दी सलाह

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विजय चौधरी (फाइल फोटो)

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने कर्नाटक में जारी राजनीतिक संकट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि कर्नाटक में कांग्रेस एवं जनता दल (एस) के विधायकों के इस्तीफा का मामला अनावश्यक तूल पकड़ता जा रहा है. कर्नाटक के विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष से जब स्वयं मिलकर अपना इस्तीफा दिया तो फिर उनके पास कोई विकल्प नहीं बचता है.

चौधरी ने कहा कि कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष द्वारा फैसला लेने में विलंब करना आश्चर्यजनक है. ऐसा लगता है कि अध्यक्ष उन विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार नहीं करके उनके द्वारा विधानसभा की कार्रवाई में पार्टी व्हिप के उल्लंघन को आधार बनाकर सदस्यता से निरहित करना चाह रहे हैं. लेकिन इस्तीफा पहले आया है, इसलिए उस पर फैसला पहले होना चाहिए.

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उन्होंने कहा कि इन विधायकों द्वारा पार्टी व्हिप के संभावित उल्लंघन के इंतजार में इस फैसले को आगे बढ़ाना किसी भी सूरत में न्यायसंगत नहीं है. इससे कोई फर्क भी पड़ता नहीं दिखता है. 10वीं अनुसूची के तहत कार्रवाई में भी तो सदस्यता ही समाप्त होती है. इन विधायकों द्वारा सार्वजनिक रूप से दिए गए इस्तीफे को स्वीकार नहीं करके इनकी सदस्यता समाप्त करने की बात सोचना, औचित्य से परे दिखता है.

चौधरी ने आगे कहा कि इस बीच यह मामला उच्चतम न्यायालय पहुँच गया है. अब न्यायालय द्वारा विधानसभा अध्यक्ष की कार्यशैली एवं उसके निर्णय की न्यायिक समीक्षा करने की स्थिति उत्पन्न हो रही है. निर्विवाद रूप से अध्यक्ष निर्णय लेने में स्वतंत्र हैं एवं उन्हें यह देखना है कि संबंधित सदस्यों द्वारा इस्तीफा बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से दिया गया है. लेकिन इन सब की पड़ताल तो उसी समय कर लेनी चाहिए थी जब सदस्यगण व्यक्तिगत रूप से अध्यक्ष से मिले थे. अब अध्यक्ष द्वारा निर्णय लेने में विलंब करने से अनावश्यक रूप से न्यायिक हस्तक्षेप की स्थिति बन रही है.

उन्होंने कहा कि ऐसे स्थिति में ही विधायिका की मर्यादा का हनन होता है एवं इसके साख में बट्टा लगता है. अध्यक्ष को इस विषय में अपने विकल्पहीनता परिप्रेक्ष्य में बिना विलंब किए सदस्यों का इस्तीफा स्वीकार कर लेना चाहिए. इसी से उनका भी सम्मान बढ़ेगा एवं विधायिका की गरिमा सुरक्षित रहेगी.

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