बसपा सुप्रीमो मायावती ने कैमूर में की जनसभा, कहा- रोजगार देने के नाम पर ठगती रही एनडीए की सरकार

लाइव सिटीज, ब्रजेश दुबे: बिहार विधानसभा के पहली चुनावी सभा में भभुआ पहुंची बसपा सुप्रीमो मायावती ने चुनावी सभा की. अपने भाषण के दौरान उन्होंने जमकर अल्पसंख्यक के साथ पिछड़ा और अति पिछड़ा कार्ड खेला और उन्होंने मुसलमानों समेत अन्य अल्पसंख्यको की आर्थिक स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर हमला किया. उन्होंने कहा कि सच्चर कमिटी की रिपोर्ट जो केंद्र सरकार की रिपोर्ट है, वह मुसलमानों की आर्थिक स्थिति का खुलासा करती है, मुझे उनकी बेहतर स्थिति कहीं से दिखाई नही पड़ती.

देश में मुसलमानों की स्थिति काफी दयनीय हुई है और काफी आर्थिक रूप से कमजोर हुए हैं. बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि मुसलमानों के साथ-साथ अन्य अल्पसंख्यक समुदाय की भी स्थिति काफी आर्थिक रूप से कमजोर हुई है. बिहार में साथ ही अपर कास्ट में भी जो लोग गरीब हैं, उनकी भी स्थिति काफी दयनीय हुई है.

उतर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि मेरी सरकार चार बार रह चुकी है. उत्तर प्रदेश में किसानों का पूरा ख्याल रखा गया था. किसान भाई को उचित पैसा दिया गया. इसके अलावा व्यापारियों का भी पूरा ख्याल रखा गया था. उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बढ़िया बनाई गई, अपराधी प्रवृत्ति के जो लोग थे उनकी जगह जेल के बाहर ना होकर जेल के अंदर हुआ करती थी. मायावती ने कहा कि बिहार के तरह नहीं बिहार में अपराधियों की जगह जेल के बाहर हुआ करती है, मेरी सरकार में बड़े-बड़े माफियाओं को भी जेल के अंदर में डाला गया.

मायावती ने कहा कि मैंने अपने शासनकाल में सभी वर्गों का ख्याल रखा. जिसमें दबे-कुचले और माइनॉरिटी से लेकर अपर कास्ट सभी जाति सभी समुदाय सब का ख्याल रखा गया. मैंने सबके लिए काम किया, उतर प्रदेश आप के बगल का प्रदेश है, जिससे आप सभी जानते होंगे अच्छी तरह से मेरी सरकार कैसी थी. उन्होंने कहा कि हमने शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया. कई महत्वपूर्ण फैसला लिया, जो बच्चियां पढ़ नहीं पाती थी उनकी शिक्षा के लिए मैंने मुफ्त शिक्षा दिया, उनको स्कूल-कॉलेज जाने के लिए मुफ्त में साईकिल दिया, उत्तर प्रदेश में भूमिहीनों को सरकारी जमीन 3 से 4 डिसमिल दिया गया. उन्होंने कहा कि मैंने किसी किसान की जमीन को नहीं छीना बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की खाली पड़ी जमीन मैंने भूमिहीनों को दिया.



कैमूर में मायावती ने भरी जनसभा को संबोधित करते हुए अल्पसंख्यक कार्ड खेलने से भी बाज नहीं आई. उन्होंने कहा कि बिहार प्रदेश समेत पूरे देश स्तर पर मुसलमानों की स्थिति काफी खराब हुई है. उनकी बेहतर स्थिति मुझे नहीं दिखाई देती. उन्होंने कहा कि उनकी हालत चिंताजनक है. जिसका जिम्मेदार इन सब का मुख्य कारण केंद्र और राज्य सरकारों की गलत नीति गलत सोच गलत कार्य प्रणाली है. उन्होंने कहा कि जिसके चलते गरीबी, बेरोजगारी अल्पसंख्यक समुदाय के अंदर देखने को मिल रही है. मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार वाली सच्चर कमेटी इसका खुलासा करती है, उन्होंने कहा गलत नीति के कारण प्रदेश एवं देश स्तर पर भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोजगारी, अपराध बढ़ा है. बिहार भी इससे अछूता नहीं है. बिहार काफी बड़ा प्रदेश है और लोग बरसों से उम्मीद में है कि जो सरकार बनेगी, वह रोजी-रोटी देगी. उन्होंने कहा कि बिहार से जो लोग बड़े-बड़े महानगरों में जाकर बसे हुए हैं, वह कोरोना जैसी महामारी के कारण वापस आ गए. उनका वापस आना तो बड़ी बात नहीं. लेकिन कोरोना में जो लोग वापस आए उनको नीतीश रोजी-रोटी देने में विफल रहे हैं.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने लालू और नीतीश सरकार पर जमकर निशाना साधा. निशाना साधते हुए कहा कि दोनों सरकारों को लंबा-लंबा समय आप लोगों ने दिया है. पंद्रह बनाम पंद्रह साल का शासन दोनों लालू और नीतीश ने किया है. आप लोगो ने दोनों सरकारों को देख लिया क्या काम किया आप लोगों ने देखा है. उन्होंने कहा कि इन लोगों ने स्थानीय लोगों को रोजी-रोटी का साधन मुहैया नहीं कराया. साथ ही नौकरी की कोई व्यवस्था नहीं की. आज जब चुनाव आ गया तो लोग दस लाख नौकरी देने का वादा कर रहे हैं. मायावती ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि इन सब बातों को ध्यान में रखिए और 15- 15 साल वाली सरकार को आप लोग अजमा चुके हैं. अब इन लोगों को आगे आजमाने की जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा कि पूरे बिहार में यदि हम बहुमत में आते हैं तो हमारे बिहार के नए गठबंधन नेता उपेंद्र कुशवाहा मुख्यमंत्री बनेंगे. अगर 15 बनाम 15 साल वाली सरकार बिहार में काम करती तो हम यह गठबंधन नहीं बनाते नहीं मुझे बनाने की आवश्यकता पड़ती. क्योंकि यहां के दलित, शोषित और वंचितो को ठगा गया है. उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने किसी को नहीं छोड़ा है. छूट गया जोड़ दीजिएगा मेरी सरकार और लोगों की तरह जुमलेबाजी नहीं करती है. उत्तर प्रदेश में 4 बार बसपा की सरकार हुई लेकिन कभी घोषणा पत्र जानने के लिए क्योंकि मैं घोषणा पत्र में विश्वास नहीं करती हूं, काम करने विश्वास करती हूं और काम करके हमने दिखाया है. इसी बदौलत चार बार से उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार बनी.