3000 स्टूडेंट्स लगा रहे हैं BSEB का चक्कर, कोई सुनने वाला नहीं है

पटना : बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) द्वारा सत्र 2016-17 की परीक्षाओं में कई नए बदलाव किये गए. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और फार्म भरने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन ही रखी गई थी. हालांकि अब इस प्रक्रिया के कारण छात्रों को हुई परेशानी सामने आने लगी है. खासकर ग्रामीण छात्रों को रजिस्ट्रेशन और फॉर्म भरने में साइबर कैफ़े वालो की गलती का शिकार होना पड़ा और अब वो पटना के बोर्ड कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं. ऐसे छात्रों की संख्या 2500 से 3000 के बीच है.

बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने छात्रों की इस परेशानी के निपटारे के लिए सूबे के शिक्षा मंत्री और बोर्ड अध्यक्ष को पत्र लिखा है. संघ के अध्यक्ष केदार नाथ के अनुसार मैट्रिक एवं इंटर के रजिस्ट्रेशन और प्रवेश पत्र में विषय की भिन्नता के कारण ढाई से तीन हजार छात्रों के रिजल्ट लंबित हो गये हैं. ऐसे छात्र नित्य प्रतिदिन परीक्षा समिति का चक्कर लगाने और भविष्य के प्रति आशंकित सड़कों पर घूम रहे हैं. लेकिन बोर्ड से उन्हें सार्थक परिणाम नहीं प्राप्त हो रहा है.

उन्होंने कहा है कि चूंकि पहली बार बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने बिना किसी तैयारी के गत वर्ष ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और फार्म भरने की प्रक्रिया शुरू की थी और विद्यालय प्रधानों को साइबर कैफे की मर्जी के सामने विवश होना पड़ा था. साईबर कैफे वालों ने न सिर्फ बच्चों और विद्यालयों का शोषण किया बल्कि विद्यालय के अथक प्रयास के बाद भी रजिस्ट्रेशन और प्रवेश पत्रों में त्रुटियां हुईं. चूंकि साईबर कैफे वालों ने इसे व्यापारिक दृष्टि से लिया और कई-कई स्कूलों का रजिस्ट्रेशन और फार्म का काम लेकर एक साथ लेकर अंधाधुंध काम किया.

पांडेय ने बताया कि सुदूर देहाती क्षेत्रों में जहां साईबर कैफे की सुविधा नहीं थी वहां 10-20 किमी की दूरी तय करके बोर्ड के निदेशानुसार शिक्षकों ने जी जान से बेहतर करने की कोशिश की. लेकिन कैफे के चक्कर में इस प्रकार की गलतियां हुई. उन्होंने कहा कि अब ऐसे छात्रों की गलतियों के लिए बच्चों अथवा विद्यालय प्रधानों को सिर्फ दोषी करार देने से अथवा इसे बहुत कानूनी दांव पेंच में उलझाने से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो सकता है. चूंकि यह पहला प्रयोग था जिसके लिए विद्यालय भी पूरी तरह तैयार नहीं था.

संघ ने अपने पत्र में कहा है कि बोर्ड को छात्रहित में ऐसे छात्रों के परिणामों को सुधारने की कारवाई करनी चाहिए, न कि एक दूसरे के ऊपर दोषारोपण करने की. साथ ही उन्होंने आग्रह किया है कि छात्रों के भविष्य को देखते हुए विशेष अभियान चलाकर ऐसे छात्रों के परिणामों को सुधारने का काम अविलंब शुरू किया जाय.

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