BPSC मस्त, कैंडिडेट पस्त, PT का फॉर्म भरने में छूट रहे पसीने

BPSC-GATE

लाइव सिटीज डेस्क : BPSC 63वीं PT परीक्षा के लिए फॉर्म भरना छात्रों के लिए सिर का दर्द बना हुआ है. डेट बढ़ाये जाने के बावजूद भी फॉर्म भरने की तकनीकी समस्या खत्म नहीं हुई है. एकमात्र हेल्पलाइन नंबर होने की वजह से किसी को भी कुछ भी सही सलाह नहीं मिल पा रही है. घंटों फोन बिजी जाने के बाद रिंग होने पर भी कोई फोन रिसीव करने वाला तक नहीं है. अधिकारी से बात किये जाने पर वे पल्ला झाड़ कर निकलने की कोशिश कर रहे हैं. उनका कहना है कि हमलोग कोई मदद नहीं कर सकते.

दरअसल, BPSC के लिए रजिस्ट्रेशन कर चुके कैंडिडेट को पेमेंट करने के लिए फिर से डेट को आगे बढ़ाया गया है. लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है. एक कैंडिडेट ने पूरे इंस्ट्रक्शन को फॉलो करते हुए ऑनलाइन पेमेंट किया. फिर वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार ही पेमेंट के तुरंत बाद पेमेंट डिटेल्स को फील किया. बता दें कि पेमेंट डिटेल्स डालने के 24 घँटे बाद ही फॉर्म उपलब्ध होने की बात लिखी गई है. नियम को मानते हुए कैंडिडेट ने 24 घंटे इंतजार किया.



जब अगले दिन वह फॉर्म भरने के लिए लॉग इन किया तो वहां कोई फॉर्म उपलब्ध नहीं था. लिहाजा उसने वेबसाइट पर दिए गए हेल्पलाइन नंबर पर सम्पर्क करने की कोशिश की. घंटों डायल करने के बाद जब फोन उठाया गया तो यह जानकारी दी गई कि आपने पेमेंट डिटेल नहीं भरा है. जबकि कैंडिडेट ने दावा किया है कि उसने पेमेंट डिटेल सही से भरा था. जिसके बाद पॉप अप विंडो में अंग्रेजी में यह भी लिखा आया था कि आपने सफलतापूर्वक पेमेंट डिटेल भर दिया है. खैर, हेल्पलाइन वाले की बात मानकर दोबारा भी कैंडिडेट ने पेमेंट डिटेल भरा. फिर से सेम मेसेज मिला.

अभी तक नहीं आया लिंक

उसके बाद से अभी तक हेल्पलाइन नंबर वालों ने एक बार भी कॉल रिसीव नहीं किया. जबकि घंटो डायल करने के बाद कभी-कभी ही फोन लग पाता है. फिर से 24 घँटे बीत जाने के बावजूद अभी भी कोई लिंक फॉर्म भरने के लिए नहीं आया है. आज शनिवार दिन में जब हेल्पलाइन नंबर पर बिल्कुल भी बातें नहीं हो पाई तो BPSC के चेयरमैन, सेक्रेटरी, जॉइंट सेक्रेटरी-सह-परीक्षा नियंत्रक सबके नंबर पर बात करने की कोशिश की गई. घंटो नंबर लगाया गया लेकिन परीक्षा नियंत्रक को छोड़ कर किसी ने भी फोन तक नहीं उठाया.

जब BPSC के जॉइंट सेक्रेटरी-सह-एग्जाम कंट्रोलर अमरेंद्र कुमार के आधिकारिक नंबर पर कॉल किया गया तो उनके ऑफिस में किसी दूसरे व्यक्ति ने फोन उठाया. उनका कहना था कि सबकुछ फोन पर नहीं हो जाता है. इसके लिए कैंडिडेट को BPSC के आफिस पर ही आना होगा. वहीं मदद होगी. जब कहा गया कि क्या पूरे बिहार के कैंडिडेट को BPSC आफिस पर ही आना होगा, फिर ऑनलाइन सुविधा का क्या मतलब है? तो जवाब था कि आप अपने भर का मतलब रखें.

‘यहां से कुछ नहीं होगा’

बता दें कि सारी बातों की रिकॉर्डिंग लाइव सिटीज के पास उपलब्ध है. जब उन्हें कहा गया कि आपकी यह बात ही मीडिया में छापी जाएगी कि आपको अन्य कैंडिडेट की समस्या से कोई मतलब नहीं है. तो उन्होंने किसी और व्यक्ति को फोन पकड़ा दिया. फिर उनका जवाब यही था कि हमलोग कोई मदद नहीं कर सकते हैं. हेल्पलाइन नंबर पर ही बात होती है, वहीं होगी. यहां से कुछ नहीं होगा.

फिर जब उनसे कहा गया कि अगर आप सहयोग नहीं करेंगे तो कैंडिडेट की समस्या का हल कैसे निकलेगा. इस पर उन्होंने रिसीवर नीचे रख दिया. जिसके बाद कोई आवाज नहीं आई. यह पूरी बात रिकॉर्ड पर है. छात्रों की समस्या बरकरार है. BPSC के आला अफसर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं.

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