जहानाबाद : भूमिहार दिल से माफ करें, तो बदलेगा सीन, यादव – मुसलमान में बोहनी नहीं

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लाइव सिटीज, जहानाबाद : जहानाबाद विधान सभा के उपचुनाव का प्रचार परवान की ओर बढ़ चला है. जदयू-भाजपा को बहुत पसीना बहाना पड़ रहा है. कारण, न नीतीश कुमार हैं और न ही नरेन्‍द्र मोदी. भूमिहार नमो – नीकु से गुस्से में हों, ऐसी बात नहीं है. पर, जदयू प्रत्‍याशी अभिराम शर्मा से खफा जरुर हैं. नाम सुनते ही बमक जाते हैं. कहते हैं – इन्‍होंने कभी भूमिहारों का अहसान माना नहीं. आगे से अभिराम शर्मा अहसान मानेंगे, जहानाबाद के सवर्ण वोटरों को समझाने को एनडीए के सभी नेता खून-पसीना बहा रहे हैं.

मुख्‍य मंत्री नीतीश कुमार की सभा अभिराम शर्मा के लिए हो चुकी है. तेजस्‍वी यादव भी जहानाबाद में गरज चुके हैं. राजद ने बहुत होशियारी से शराबबंदी कानून के इंपैक्‍ट की बात गरीब-गुरबा में छेड़ दी है. धीरे से पूछ लिया जाता है कि शराब मिल रही है कि नहीं. जिसने हां कह दिया, उससे कीमत पूछ दे रहे हैं. फिर पीने के जुर्म में जेल जाने वालों के बारे में बात कर ली जाती है. निश्चित तौर पर, जहानाबाद के उपचुनाव का नतीजा कम सैंपल स्‍टडी में भी शराबबंदी कानून के वोट इफेक्‍ट को रिफ्लेक्‍ट करेगा.



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जहानाबाद में चुनाव प्रचार करते CM नीतीश कुमार

जदयू की प्रतिष्‍ठा की लड़ाई को पार कराने को किंग महेन्‍द्र के भाई भोला शर्मा सब कुछ करने को मुंबई छोड़ जहानाबाद में बैठे हैं. भोला बाबू से जाकर मिल लीजिए, जरुरत वाले हर किसी से कहा-सुना जा रहा है. असल में, यह चुनाव भी किंग महेन्‍द्र का ही है. कारण कि किंग महेन्‍द्र को छोड़ जहानाबाद के दूसरे सभी बड़े भूमिहार क्षत्रप अभिराम शर्मा से खफा ही रहे हैं. अभिराम शर्मा को सिर्फ और सिर्फ किंग महेन्‍द्र का ही आदमी माना जाता है.

खबर लिखे जाने तक जहानाबाद का समीकरण ऐसा ही है कि देहा-देही वाले संबंधों को छोड़ दें तो यादव और मुसलमान वोटरों में से जदयू को बड़ी बोहनी की उम्‍मीद नहीं है. जीतन राम मांझी के साथ होने के बाद राजद के सुदय यादव का वजन थोड़ा और बढ़ा है. जहानाबाद बाजार को भी एनडीए को समझाना पड़ रहा है.

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चुनाव प्रचार में लगे राजद प्रत्याशी सुदय यादव

चुनाव के दिन सब कुछ जहानाबाद का रिजल्‍ट इस पर ही निर्भर करेगा कि सवर्ण वोटरों ने कितना प्रतिशत अभिराम शर्मा को माफ किया. बाल-बुतरु लेकर सवर्ण बूथ तक पहुंच गए, तो माफी कबूल समझी जाएगी. नहीं गए, तो परेशानी है. हां, इस बात से जहानाबाद में सभी सहमत हैं कि नीतीश कुमार के कार्यकाल में रोड और बिजली गांव-गांव तक पहुंची है. पर, वोट का फैसला तो जहानाबाद के लोग अपने मिजाज से लेते हैं. वे दूसरों की ऐंठन बर्दाश्‍त नहीं करते हैं, यहां तो दुख अपने से है और वह भी ऐसे कि जिसे पहले कभी जीत दिलाई, उसी ने बाद में कहा कि हम आपके वोट से नहीं, ‘किची’ के वोट से जीते थे.