CBI विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, रातों-रात वर्मा को कैसे वंचित कर दिया अधिकारों से

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लाइव सिटीज डेस्क : सीबीआई में डायरेक्टर आलोक वर्मा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी गुरुवार को सुनवाई की. इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई की बेंच कर रही है. यह सुनवाई आलोक वर्मा की उस याचिका पर हो रही है, जिसमें उन्होंने सरकार के फैसले को चुनौती दी है. केंद्र सरकार ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा से अधिकार वापस लेकर उन्हें छुट्टी पर भेज दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई ने सुनवाई के दौरान केंद्र की आरे से आए म​हाधिवक्ता तुषार मेहता से पूछा कि सीबीआई के दो सीनियर अधिकारियों के बीच एक ही रात में तो यह लड़ाई शुरू नहीं हुई होगी. ऐसे में केंद्र सरकार ने चयन समिति से सलाह लिये बिना डायरेक्टर आलोक वर्मा को उनकी शक्तियों से कैसे वंचित कर दिया?

चीफ जस्टिस ने यह भी पूछा कि आलोक वर्मा को उनकी शक्तियों से वंचित करने से पहले सरकार को चयन समिति से परामर्श लेने में कोई प्रॉब्लम थी. सरकार ने 23 अक्तूबर को जो यह निर्णय लिया, इसके लिए किसने प्रेरित किया? मीडिया में आ रही खबर के अनुसार कोर्ट ने कहा कि जब वर्मा कुछ महीनों बाद ही रिटायर होनेवाले हैं तो केंद्र ने कुछ महीने और इंतजार क्यों नहीं किया.

हालांकि केंद्र की ओर से आए महाधिवक्ता तुषार मेहता ने सफाई दी और कहा कि इस मामले में असाधारण स्थिति पैदा हो गई थी और ऐसी स्थिति में रोग को समाप्त करने के लिए कभी-कभी असाधारण इलाज की जरूरत होती है. उन्होंने कहा कि दोनों अधिकररी लड़ रहे थे और गंभीर मसलों की जांच करने के बजाए एक-दूसरे के खिलाफ मामले की जांच कर रहे थे.

गौर​तलब है कि सीबीआई के आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है. दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने अचानक 23 अक्टूबर को आलोक वर्मा को रातों-रात छुट्टी पर भेज दिया था, साथ ही उन्हें उनकी शक्तियों से भी वंचित कर दिया था. इसके बाद वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. इसी पर सुनवाई चल रही है.

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