नोटबंदी मामले में बिहार में पहली चार्जशीट दाखिल, दिल्ली तक के व्यापारी हैं अभियुक्त

लाइव सिटीज, पटना डेस्क : नोटबंदी का मामला दो साल के बाद बिहार और देश के लिए अहम मुद्दा बना हुआ है. इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी तो चल ही रही है, प्रशासनिक गतिविधियां जारी हैं. इसे लेकर अब गया से बड़ी खबर आ रही है. पुराने नोट जमा किये जाने के मामलेे में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चार्जशीट दायर की है. नोटबंदी के मामले में यह अब तक की पहली चार्जशीट है. यह चार्जशीट 10 लोगों के खिलाफ दायर की गई है.

जानकारी के अनुसार नोटबंदी के दौरान गया के बैंक ऑफ इंडिया की जीबी रोड शाखा के पांच खातों में पुराने नोट जमा किये गये थे. इसे लेकर मामला दर्ज किया गया था. मामले में बनाये गये 10 अभियुक्तों में तत्कालीन चीफ मैनेजर एससी झा सहित तीन अफसर और हेड कैशियर भी शामिल हैं. वहीं नोट जमा करानेवाले 6 व्यवसायियों को भी अभियुक्त बनाया गया है. पटना स्थित विशेष न्यायालय में इन अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गयी. नोटबंदी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बिहार में यह पहली चार्जशीट है.

जानकारी के अनुसार 2000 पेजों की इस चार्जशीट में गया स्थित बैंक ऑफ इंडिया जीबी रोड शाखा के तत्कालीन चीफ मैनेजर एससी झा, मैनेजर हेमंत कुमार वर्मा, अरविंद कुमार, हेड कैशियर ओम प्रकाश नंद के अलावा गया के ही मोती लाल, धीरज जैन, पवन जैन और विमल जैन अभियुक्त हैं. इसके अलावा दो अन्य अभियुक्तों में मुजफ्फरपुर की मां तारा एजेंसी के प्रोपराइटर राजेश कुमार अग्रवाल और दिल्ली स्थित हरि कृपा के प्रोपराइटर राजेश कुमार गुप्ता भी अभियुक्त हैं.

बताया जाता है कि नोटबंदी में 10.93 करोड़ के पुराने नोट इन्होंने जमा किये थे. खास बात कि जिनके खातों में अभियुक्तों ने रकम जमा करायी थी, उनके धारक को इसकी जानकारी ही नहीं थी. बाद में यह रकम देश के दूसरे बैंकों में ट्रांसफर कर उसे निकाल लिया गया. मामला उजागर होने के बाद ईडी को इसकी जांच सौंपी गयी. ईडी पटना की टीम ने जांच में पाया कि गया के मोती लाल पटवा ने ये पैसे बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से जमा कराये थे.

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