छपरा के क्वारंटाइन सेंटर से डराने वाली तस्वीर आई सामने, मजदूरों को ओढ़ने को दिया गया कफ़न

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: आपदा विभाग प्रवासी मजदूरों के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के चाहे जो भी दावे करे परन्तु हकीकत तो यह है कि क्वारंटाइन सेंटर में बिछवान के नाम पर कफ़न दिया गया है. जी हां, छपरा में प्रवासी मजदूरों को बिछाने के लिए बिछवान के रूप में कफ़न उपलब्ध कराया गया है.

यह हकीकत है इसुआपुर प्रखंड के महुली चकहन उच्च विद्यालय स्थित क्वारंटाइन सेंटर, जहां माजदूर परेशान हो रहे है. कोरोना काल में प्रवासियों को तेज धूप में पैदल चलना, पैरों में छाले पड़ना, भूख प्यास से बिलखते जिंदगी को आपने जरूर देखा होगा. लेकिन कभी आपने जीते जी इंसान को कफ़न ओढ़ कर सोने की बात सुनी है या देखी है, नहीं ना.

आश्चर्यजनक बात तो है, लेकिन सच्चाई भी कुछ ऐसी ही है, हम बात कर रहे है छपरा जिले के इसुआपुर के शामकौड़िया उच्च विद्यालय के क्वारंटाइन सेंटर की.  जहां रह रहे सैकड़ों प्रवासियों में से दर्जनो प्रवासियों को चादर के बदले कफ़न ओढ़ने को दिया गया था. फिर क्या था प्रवासियों ने  कफ़न की बनी चादरो को बिस्तर से उतारकर विद्यालय के गेट पर फेंक दिया, और घर के बिछवान मंगा कर सोने को मजबूर हैं. इस पूरी घटना से सरकार पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

बीते शुक्रवार को सुबह तकरीबन ढाई या तीन बजे क्वारंटाइन सेंटर में जैसे ही सबों को कफ़न वाली चादरें ओढे सोये अवस्था में देखा कि उसके होश उड़ गये. उसे समझ नहीं आ रहा था, कि आखिर कफ़न ओढ़े ये क्वारंटाइन के लिये आये है या मामला कुछ और है. जैसे तैसे खुद को संभाला तो उसे मालूम हुआ कि यहां सभी प्रवासियों को ओढ़ने के लिये यही दिया गया है. सभी को आभास हुआ कि ये जीते जी ओढ़ने वाली चादर नहीं है, तो सभी ने चादर फेंक दिया.