छठ पूजा का दूसरा दिन, जानिए क्या है खरना का महत्त्व और पूजन विधि

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: बिहार सहित देश के कई हिस्से में पूर्ण आस्था से मनाई जाने वाली छठ पर्व की शुरुआत हो चुकी है. गुरुवार 31 अक्टूबर को नहाय खाय के साथ इस चार दिवसीय पर्व की शुरुआत हुई. आज पूजा का दूसरा दिन है, जिन्हें खरना कहा जाता है. छठ पूजा में खरना पूजन का ख़ास महत्त्व है. खरना में व्रत रखने वाली महिलाएं शुद्ध व्रती शुद्ध अंतःकरण से कुलदेवता, सूर्य देव और छठ मैय्या का पूजन कर गुड़ का नैवेद्य अर्पित करते हैं.

छठ पूजा के दूसरे दिन खरना पूजा होती है. जिस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखते हैं और फिर शाम के समय प्रसाद ग्रहण करते हैं. इस पूजा में विशेष तरह का प्रसाद तैयार किया जाता है. इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद ही 36 घंटों तक चलने वाला निर्जला छठ व्रत शुरू होता है. खरना के दिन रोटी और गुड़ की खीर बनती है.जानिए छठ के दूसरे दिन मनाए जाने वाले खरना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि-

 खरना पूजन का शुभ मुहूर्त

जानकारी के अनुसार, इस वर्ष छठ के दिन पष्ठी तिथि की शुरुआत शनिवार 2 नवंबर को रात 12 बजकर 51 मिनट से हो रही है. पष्ठी तिथि का समापन 3 नवंबर को 1 बजकर 31 मिनट पर होगा. छठ पूजा के दिन सूर्योदय का समय 6 बजकर 33 मिनट और सूर्यास्त का समय 5 बजकर 36 मिनट है.

खरना पूजन की विधि 

छठ के दूसरे दिन खरना पूजा का विधान कहा गया है. दूसरे दिन व्रती महिलाएं पूरे दिन व्रत करती हैं. शाम में सूर्यास्त के बाद खीर-पूरी, केले, मिठाई और पान-सुपारी का भोग लगाया जाता है. जिसके बाद प्रसाद को केले के पत्ते पर लगाया जाता है और फिर घर-परिवार और आस-पड़ोस में बांट दिया जाता है. प्रसाद को तैयार करने के लिए मिट्टी के चूल्हे का प्रयोग किया जाता है.

प्रसाद बनाने के लिए नए चूल्हे का ही इस्तेमाल करना चाहिए. और अगर किसी कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है तो खास ध्यान रखा जाता है कि चूल्हे पर नमक की चीजें और मांसाहारी व्यंजन न बना हो.खरना के दिन प्रसाद के लिए बनने वाली खीर व्रती महिला अपने हाथों से पकाते हैं. शाम को खरना का प्रसाद ग्रहण के बाद निर्जला 36 घंटे के व्रत की शुरुआत होती हो.