आज से महापर्व छठ पूजा का चार दिवसीय अनुष्ठान प्रारंभ, तैयारियों को लेकर प्रशासन मुस्तैद

कैमूर/भभुआ(ब्रजेश दुबे): बिहार में सबसे अधिक आस्था के साथ मनाए जाने वाला छठ का पर्व बुधवार से शुरू हो गया है. यह पर्व बिहार से प्रारंभ होकर पूरे भारत के कई राज्य मे आस्था के साथ मनाया जाता है. जिसमें सुहागिन महिलाएं 4 दिनों तक उपवास रखकर व्रत को करती है. छठ पूजा व्रत की तैयारी दीपावली बीतने के बाद ही प्रारंभ हो जाती है छठ मैया के गीत अपने आप में एक अलग ही गीत है. जो छठ पूजा के नजदीक आते ही घरों से लेकर बाजारों तक सुनाई देने लगती है.

कोरोना को देखते हुए छठ पूजा के नजदीकी आते ही जहां महिलाएं एवं पुरुष छठ पूजा की तैयारियों में लग गए हैं वहीं प्रशासन भी अपनी तैयारी को लेकर के मुस्तैद दिखाई दे रही है. जिला में कई मजिस्ट्रेट छठ पूजा के निगरानी के लिए तैनात किए गए हैं. ताकि कहीं पर व्रत धारियों को किसी भी प्रकार की असुविधा ना हो सके.



इस व्रत में 4 दिन तक महिलाएं छठ मैया की पूजा करती हैं जिसमें प्रथम दिन दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को लौकी की सब्जी एवं नया चावल का भात खाती है तो वहीं दूसरे दिन पूरे दिन उपवास रखने के बाद शाम के समय नए गुड़ एवं नये चावल की खीर बनाकर खाई जाती है. इस तरह से चलने वाला व्रत अपने आप में एक अनोखा व्रत है. इतना कठिन व्रत होने के बाद ही छठ मैया की कृपा से महिलाएं बड़े ही आस्था से इस व्रत को करती हैं.

छठ मैया के प्रति लोगों की दिनोंदिन आस्था बढ़ रही है जहां तक मानना है की छठ मैया अपने भक्तों की मुरादों को पूरा करती हैं. तभी तो कितना भी कठिन होते हुए भी इस व्रत को महिलाएं एवं पुरुष गाते बजाते हुए बड़े ही आसानी से कर लेती हैं. इस व्रत में गांव देहात से लेकर बाजार तक एक चहल-पहल देखी जाती है बाजारों में भी फल की दुकान सजने लगती हैं जिससे बाजार में भी चहल-पहल बढ़ जाती है.

इस पर्व में शाम को महिलाएं गंगाजल से सूर्यदेव को अर्घ्य देती हैं तो वही सुबह गाय के दूध से भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया जाता है. शाम को सूर्यास्त के समय भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं सुबह सूर्योदय के समय भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर उनसे अपने परिवार बच्चों के सुख एवं शांति की कामना करती है. इसी के साथ घाट पर हवन करके अपने अनुष्ठान को पूरा करती हैं. महिलाओं के कठिन व्रत में उनके साथ साथ पूरे परिवार के लोग सहयोग करते हैं 4 दिनों तक चलने वाला यह व्रत लोगों में नई उर्जा एवं खुशहाल लेकर आता है. पर्व के समाप्ति के बाद लोग गांव में एवं रिश्तेदारी में प्रसाद वितरण करते हैं. छठ मैया के कृपा से व्रत करने वालों को सुख संपत्ति एवं शांति मिलती है.