नीतीश कुमार का ग्रीन सिग्नल, IAS वीरेन्द्र यादव के खिलाफ FIR की तैयारी

लाइव सिटीज, पटना : आरा में चर्च की अरबों की जमीन के गड़बड़झाले सौदे में भोजपुर के तत्कालीन डीएम वीरेद्र कुमार यादव अब बिलकुल फंस गए दिख रहे हैं. भरोसे के सूत्र बता रहे हैं कि CID जांच में IAS वीरेन्द्र कुमार यादव की ओर सूई मुड़ी हुई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस सनसनीखेज जमीन मामले की जांच आरा से मिली शिकायतों पर शुरू कराई थी. अब जांच में मिले तथ्यों के आधार पर मुख्यमंत्री ने IAS वीरेन्द्र कुमार यादव के खिलाफ FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया को ग्रीन सिग्नल दे दिया है.

आरा में जब वीरेन्द्र कुमार यादव डीएम थे, तब जमीन के पचड़े में कई लाशें भी गिरी. जुलाई महीने में आरा में दिनदहाड़े कृष्ण कुमार सिंह की हत्या कर दी गई थी. इस हत्या के बाद आरा में बड़ा जनाक्रोश उभरा था. आरा की पूर्व सांसद मीना सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिल कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी. तब केंद्र में मंत्री नहीं बने आरा के सांसद राजकुमार सिंह ने भी जिलाधिकारी वीरेन्द्र कुमार यादव पर सवाल उठाये थे. इस हत्याकांड में कई पार्टियों के नेता जेल में है, जिनमें जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ के प्रवक्ता दानिश रिजवान भी शामिल हैं.



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आरा के तत्कालीन डीएम वीरेन्द्र कुमार यादव (फाइल फोटो)

कौड़ियों के भाव आरा में बेची गई थी चर्च की जमीन

जमीन के सौदे में गड़बड़झाले का जो मामला आरा का है, वह रमना मैदान के पास MMP ग्राउंड स्थित चर्च की दो एकड़ जमीन है. इस जमीन की सरकारी कीमत 13 करोड़ 66 लाख 99 हजार रूपये है. बाजार मूल्य अरबों में है. जानकारी के मुताबिक़ इस जमीन को प्रशासन की मिलीभगत से जालसाजी कर सुमित्रा देवी व मंजू सिंह के माध्यम बेचा गया. इस मामले में चर्च से जुड़े एक व्यक्ति अल्फ्रेड एंड्रूज को पिछले दिनों बक्सर से गिरफ्तार किया गया था. आरा के नवादा थाना में इस मामले में सबसे पहले 22 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी, जिसमें तत्कालीन रजिस्ट्रार, होटल व्यापारी व कई ठेकेदार शामिल थे.

कमिश्नर-आईजी ने जांच से खोली पोल

जब चर्च की जमीन की बिक्री पर हंगामा बढ़ा, तो मामला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संज्ञान में आया. इसके बाद जांच को पटना के कमिश्नर आनंद किशोर और पटना जोन के आईजी नैयर हसनैन पहुंचे थे. प्रारंभिक छानबीन में ही स्पष्ट हो गया था कि बहुत झोल है. सौदे की नाजायज कमाई बहुतों तक पहुंची है. फिर इसके बाद जांच CID को सौंप दी गई थी.

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लालू के करीब माने जाते हैं वीरेन्द्र कुमार यादव

बिहार में महागठबंधन की सरकार ख़त्म होते ही नीतीश कुमार ने भोजपुर के डीएम वीरेन्द्र कुमार यादव को हटा दिया था. वे अभी पटना मुख्यालय में पदस्थापित हैं. शंटिंग प्लेटफ़ॉर्म वाली पोस्टिंग है. कहा जाता है कि यादव राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के करीबी थे. उन्हें पटना का डीएम बनाए जाने के लिए भी पैरवी होती थी. लेकिन अब नीतीश कुमार FIR कराने की तैयारी में लग गए हैं.