COVID-19: कोरोना मरीजों से अधिक पैसा वसूलने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ दर्ज होगा केस, सीएम नीतीश का फैसला

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: बिहार में कोरोना का प्रभाव बढ़ता जा रहा है. सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज जारी है. लेकिन इसी बीच लगातार यह शिकायत सामने आ रही थी कि निजी अस्पताल की ओर से कोरोना मरीजों के इलाज के लिए मनमाना रुपये की वसूली की जा रही है. ऐसे में निजी अस्पताल संचालकों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है.

सरकार ने सूबे सभी निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज का रेट फिक्स कर दिया है. सरकार ने मरीजों की स्थिति को तीन केटेगरी में बांटते हुए रेट निर्धारित किए हैं. साथ ही इसका पालन हो सके, इस बाबत टीम गठित की गई है. ये टीम निजी अस्पतालों में निर्धारित राशि से अधिक की मांग और दवा की उपलब्धता और निर्धारित दर से अधिक से संबंधित शिकायतों की जांच करेगी. अनियमितता पाए जाने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 और द ऐपीडेमिक डिजिसेस एक्ट-1897 के तहत कठोर कार्रवाई करेगी.

आपको बता दे कि कोरोना काल मे राज्य सरकार ने एंबुलेंस चालकों की मनमानी पर लगाम लगा दिया है।सरकार द्वारा तय किए गए रेट एंबुलेंस में प्रयोग की जाने वाली सामान्य छोटी कार के लिए 50 किमी तक फिक्स्ड रेट 1500 रुपये हैं, वहीं इससे अधिक चलने पर 18 रुपये प्रतिकिमी के हिसाब से ले सकेंगे. वहीं वातानुकूलित छोटी कार का किराया 1700 रुपये, बोलेरो, सूमो और मार्शल के लिए फिक्स किराया 1800 रुपये और उससे अधिक चलने पर 18 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से ही देना होगा. वहीं यदि इन बड़ी कारों में एसी है, तो 50 किमी के लिए इनका किराया 2100 रुपये रहेगा. इससे अधिक चलने पर 18 रुपये प्रति किमी का चार्ज देना होगा.