‘पटना के घाट पर हमहूं देबई अरगिया हे छठी मईया…’ ने बना दिया भक्तिमय माहौल

छठ गीत प्रस्तुत करतीं लोकगायिका नीतू कुमारी नवगीत.

लाइव सिटीज, सेंट्रल पटना : पटना के बजरंगपुरी स्थित करण सम्राट कम्युनिटी हॉल में दीप पर्व एवं छठ के पावन अवसर पर संगीतमय संध्या का आयोजन किया गया. इसमें बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने कई पारंपरिक छठ गीतों की प्रस्तुति करके माहौल को भक्तिमय बनाया. कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने गणेश वंदना मंगल के दाता रहुआ बिगड़ी बनाई जी गीत गाया. उद्घाटन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता मधु मंजरी ने कहा कि दिवाली अंधकार पर प्रकाश के विजय का त्यौहार है तो छठ बिहार की मिट्टी से जुड़ा एक ऐसा पारंपरिक पर्व है, जो सब को एक सूत्र में बांधता है.

महा लोकपर्व छठ के दौरान उगते सूरज की पूजा से पहले डूबते सूरज को अर्घ दिया जाता है, जिसका विशिष्ट महत्व है. ऐसी महान परिपाटी किसी भी दूसरी सभ्यता में देखने को नहीं मिलती. लोक गायिका नीतू कुमारी नवगीत ने पटना के घाट पर हमहूं देबई अरगिया हे छठी मईया, केलवा के पात पर उगेलन सुरुज देवा झांके-झुके, हे करेलू छठ बरतिया से उनके लागी, मारबो रे सुगवा धनुष से सुगा गिरे मुरझाए, उगीहे सुरुज देव, होइल पूजन के बेर जैसे पारंपरिक गीतों के माध्यम से लोगों को छठ पर्व से जोड़ा.

उन्होंने करिया बदरी हो करिया बदरी काहे रोकले बानी बोलीं दिवाकर के डगरी, कहां लगबलु देरी आजु के दिनवा हो, दीनानाथ आजु के दिनमा हो, कुम्हरा के घर से माटी के कलशा दिलाई देहू हो, पिया जी पियर पियर चुनरी दिलाई देहु हो, कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए जैसे छठ गीत भी गाए.

सांस्कृतिक कार्यक्रम में राजन कुमार ने कैसियो पर राकेश कुमार ने हारमोनियम पर भोला कुमार ने नाल पर, राजन तृतीय ने खंजरी पर और रविन्द्र कुमार मिश्रा कुमार ने तबला पर संगत किया. मंच संचालन अनीता सिन्हा और सौमिल श्री ने किया. कार्यक्रम के दौरान विधान पार्षद डॉ सूरज नंदन कुशवाहा, नरेश कुमार, अमन कुमार कुशवाहा, अजीत कुमार आदि उपस्थित रहे.

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