बोधगया में मिले बम को किया गया डिफ्यूज, पर सवाल वही- आठ माह में ब्लास्ट हो जाता तो?

बोधगया में बम डिफ्यूज करते बम निरोधक दस्ता के जवान.

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बोधगया के कालचक्र मैदान के निकट मिले प्लांटेड बम आठ माह के बाद बरामद किया गया. बम बरामदगी की सूचना के बाद तो स्थानीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया. यहां तक कि एनआईए के अधिकारी भी स्तब्ध थे. उस आईईडी बम को शनिवार की देर शाम तमाम जांच एजेंसियों व स्थानीय अफसरों की मौजूदगी में डिफ्यूज किया गया. बोधगया की निरंजना नदी के किनारे बम निरोधक दस्ता ने इसे बखूबी अंजाम दिया. इसके बाद तमाम अफसरों की जान में जान आई.

लेकिन असली सवाल वही है कि सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई. आठ माह से शौचालय में पड़ा बम यदि ब्लास्ट कर जाता तो क्या होता? इसकी जिम्मेवारी कौन लेता? बता दें कि शनिवार की दोपहर में बोधगया के कालचक्र मैदान के निकट शौचालय में प्लांट किये गये टिफिन बम को एनआईए की टीम ने बरामद किया. इसके बाद उस बम को डिफ्यूज किया गया. डिफ्यूज किये जाने के समय स्थानीय पुलिस के अलावा एसएसबी के जवान भी मौजूद रहे. इन लोगों की मदद से बम निरोधक दस्ता ने उसे डिफ्यूज किया.

दरअसल इसी साल 19 जनवरी को बोधगया मंदिर के निकट कई जगहों पर बम ब्लास्ट की घटना हुई थी. उस समय कालचक्र मैदान में बड़े धार्मिक कार्यक्रम होनेवाले थे. बम ब्लास्ट के बाद हंगामा मच गया. जांच के लिए एनआईए की टीम पहुंच गई. इसी क्रम में उमर नामक आतंकी को गिरफ्तार किया गया.

बोधगया में 8 माह पहले प्लांट किये गये थे कई बम, अभी भी एक था पड़ा हुआ

आज शनिवार को एनआईए के अधिकारी शनिवार को उसी गिरफ्तार आतंकी उमर के साथ स्थल का सत्यापन करने पहुंचे. अधिकारी जानना चाहते थे कि 19 जनवरी को क्या-कुछ हुआ था और आतंकी कहां-कहां गये थे. उमर के बताये रास्ते पर एनआईए के अधिकारी छानबीन कर रहे थे. जहां-जहां बम प्लांट किये गये थे, वहां-वहां अधिकारी पहुंच रहे थे.

बोधगया में बम डिफ्यूज करते बम निरोधक दस्ता के जवान.

जब एनआईए टीम आतंकी उमर के कहने पर कालचक्र मैदान और कब्रिस्तान के बीच अवस्थित पुरुष शौचालय का निरीक्षण किया तो अधिकारियों के होश उड़ गये. शौचालय के अंदर टिफिन बम रखा हुआ था, जो जिंदा था. यह वही बम था, जिसे जनवरी माह में रखा गया था. बहरहाल बम निरोधक दस्ते ने बम को डिफ्यूज कर दिया है. लेकिन लोगों के मन में सवाल अभी भी कौंध रहा है कि सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई. आठ माह तक प्लांट किये गये बम पर अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ी? यदि कोई अनहोनी हो जाती तो उसकी जिम्मेवारी कौन लेता?

(फोटो : देवांशु प्रभात)

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