संत जेवियर कॉलेज में वेबीनार, नई शिक्षा नीति पर हुई चर्चा

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: संत जेवियर्स कॉलेज ऑफ एडुकेशन (स्वायत्त), पटना के एम॰ एड॰ (सत्र 2018-2020) के छात्र-छात्राओं द्वारा वेबीनार का आयोजन किया गया. जिसका विषय था “नवीन शिक्षा नीति: अपेक्षाएं एवं चुनौतियां” प्रो. (फा.) इग्नासियस टोपनो, एस. जे. के संरक्षण और सभी शिक्षकों के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का समन्वयन संज्ञा और वरुण कुमार के द्वारा किया गया.

बंदना प्रकाश ने कार्यक्रम का संचालन किया था. वहीं श्वेता झा द्वारा आधार व्याख्यान (की नोट एड्रैस) दिया गया. वेबीनार को चार सत्रों में शिर्षकानुसार विभाजित किया गया. प्रत्येक सत्र में पांच वक्ता थे. सभी ने नई शिक्षा नीति के सभी महत्वपूर्ण पक्षों पर अपना शोध प्रपत्र प्रस्तुत किया.



प्रथम सत्र की शुरुआत शीला आनंद के शोध प्रपत्र के साथ हुई. जिन्होंने प्रारंम्भिक शिक्षा के प्रमुख बिन्दुओं पर चर्चा की. अगली प्रस्तुति चन्दन की थी. जिन्होंने ड्रॉप आउट बच्चों को शिक्षा से पुनः जोड़ने और गुणात्मक शिक्षा देने पर बल दिया.

इसके बाद वंदना ने स्कूल के शैक्षिक वातावरण और गुनवाकत्तापूर्ण शिक्षा के प्रमुख बिन्दुओं पर चर्चा की. बन्दना प्रकाश ने अनुसूचित जाती और अन्य पिछड़े वर्ग की शैक्षिक चुनौतियों को इंगित किया. वहीं कुमकुम ने स्कूल परिसर के प्रभावी प्रबंधन और संसाधन की उपलब्धता पर चर्चा की.

इसके बाद दूसरे सत्र का आरंभ श्वेता झा के शोध प्रपत्र से हुआ. जिन्होंने निजी विद्यालयों के दोषपूर्ण नियमों और मान्यताओं पर चर्चा की. वरुण ने विद्यालय के क्रियाकलापों के मूल्यांकन पर प्रकाश डाला. कुमारी स्मिता सिन्हा का शोध प्रपत्र गुणवाकत्तापूर्ण उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की भूमिका पर था. इसके अलावा कामिनी कुमारी ने लिब्रल शिक्षा पर चर्चा की और विनीता ने बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न शिक्षकों के निर्माण पर विस्तार से जानकारी दी.

तीसरी तकनीकी सत्र में दीपिका और विवेक ने चार वार्षिय समेकित बी. एड. पाठ्यक्रम की चुनौतियों पर चर्चा की. अर्चना ने अनुकूल शिक्षा तकनीकी और शिक्षकों में उसके प्रति जागरूकता का अध्ययन प्रस्तुत किया. वहीं निशा कुमारी सिंह ने एन. पी. ई. 2020 की पृष्ठभूमि में व्यावसायिक शिक्षा आधारित पाठ्यक्रम पर चर्चा की. इसके अलावा नेहा ने व्यावसायिक शिक्षा- एक समग्र दृष्टिकोण की प्रस्तुति की. संज्ञा ने उच्चतर शिक्षा के परिवर्तित परिवेश पर चर्चा की.

चौथे सत्र में प्रथम प्रस्तुति किरण की थी. जिन्होंने शिक्षा अधिनियम के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं को बताया. विरेन्द्र ने छात्रों को मिलने वाले सहयोग पर चर्चा की. सुरैया ने दूरस्थ शिक्षा के पाठ्यक्रम पर आधारित शोध शिक्षा प्रपत्र प्रस्तुत किया. पियूष पॉल ने शिक्षकों की भूमिका पर प्रकाश डाला.

अर्चना कुमारी ने समापन भाषण दिया और नेहा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया. वेबिनार का सम्पादन डॉ. विक्रमजित सिंह के निरीक्षण में हुआ. इस कार्यक्रम में महाविध्यालय के सभी संकायों, बी. एड., एम. एड. और पी. एच. डी. के छात्र – छात्राओं ने भाग लिया और प्रश्नों के माध्यम से अपनी सभागिता प्रस्तुत की.