सीतामढ़ी मामला : देशभर के 8 पूर्व DGP का संयुक्त बयान, घटना को बताया निंदनीय

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार के सीतामढ़ी जिले में इसी महीने सामने आई पुलिस टार्चर की भयावह घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर कैदियों व हिरासत में लिए गए आरोपियों के मानवाधिकार को लेकर बहस छेड़ दी है. इस मामले में देश के 8 रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों ने एक संयुक्त बयान जारी किया है. यह सभी अधिकारी कई राज्यों के पुलिस प्रमुख रहे हैं. इन सभी पुलिस अधिकारियों ने एक स्वर में सीतामढ़ी की घटना की निंदा करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना जाहिर की है. इस रिपोर्ट को कामनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (CHRI) की पुलिस रिफॉर्म्स टीम द्वारा जारी किया गया है.

CHRI पिछले कई दशकों से पुलिसिंग में सुधार लाने के लिए काम कर रही है. साथ ही पुलिस टॉर्चर के खिलाफ एक राष्ट्रीय कानून बनाए जाने की मांग भी कर रही है. इस संयुक्त बयान को जारी करने वाले पुलिस अधिकारी हैं – जूलियो रिबेरो, पूर्व डीजीपी (पंजाब); प्रकाश सिंह, पूर्व डीजीपी (उत्तर प्रदेश, असम, बीएसएफ); पी के एच थारकन, पूर्व डीजीपी (केरल); कमल कुमार, पूर्व डीजीपी (नेशनल पुलिस एकेडमी, हैदराबाद); जैकब पुन्नूसे, पूर्व डीजीपी (केरल); संजीव दयाल, पूर्व डीजीपी (महाराष्ट्र); जयंतो एन चौधरी, पूर्व डीजीपी (असम) और एन रामचंद्रन, पूर्व डीजीपी (मेघालय).

सीतामढ़ी मामला : RJD ने सीएम पर बोला हमला, कहा – अल्पसंख्यकों को किया जा रहा टारगेट

सीतामढ़ी एसपी डी अमरकेश का तबादला, आईजी नैयर हसनैन की रिपोर्ट के बाद गिरी गाज

इन अधिकारियों ने जो संयुक्त बयान जारी किया है, उसमें कहा गया है –

आरोपियों को इस तरह से टॉर्चर करने के तरीकों का पुलिसिंग में कोई स्थान नहीं है. थर्ड डिग्री टॉर्चर स्पष्ट रूप से स्वीकार्य नहीं है और यह खराब पेशेवर रवैये को भी दिखाता है. इन घटनाओं के प्रति सख्ती बरती जानी चाहिए. इस मामले में राज्य सरकार ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ जिस तरीके से कार्रवाई की है, इसका हम स्वागत करते हैं.

मामले में दोषी सभी पुलिसवालों को जल्द से जल्द पकड़ा जाना चाहिए और पीड़ित परिवारों को सुरक्षा दी जानी चाहिए. जब तक पुलिस अपने अंदर के लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं करेगी, तब तक जनता का कानून के शासन में विश्वास नहीं बन सकेगा.

देश के कई राज्यों के पूर्व पुलिस प्रमुखों की हैसियत से हम राज्य सरकारों से पुलिस विभाग के लिए पर्याप्त बजट और फोरेंसिक सुविधाएं आवंटित करने का आग्रह करते हैं. साथ ही पुलिस नेतृत्व को सलाह देते हैं कि वह अपने अधीन आने वाले कर्मियों का नियमित प्रशिक्षण सुनिश्चित करें ताकि वे दिन-प्रतिदिन हो रहे बदलावों के हिसाब से खुद को ढाल सकें. इस काम के लिए एक्सपर्ट्स की जरूरी सलाह भी ली जानी चाहिए.

कील ठोकने के मिले थे निशान

बता दें कि सीतामढ़ी पुलिस ने 6 मार्च को हत्या के आरोप में गुफरान आलम(30) और तस्लीम अंसारी(32) को अरेस्ट किया था. बाद में पुलिस कस्टडी के दौरान दोनों की संदिग्ध मौत हो गई थी. दोनों को दफनाने के वक्त उनके शरीर पर बुरी तरह से टॉर्चर करने के निशान मिले थे, जिसमें कील ठोकने के निशान तक भी शामिल हैं. इस मामले में सीतामढ़ी के डुमरा पुलिस स्टेशन के SHO समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई है.