जमुई : भूख से बुजुर्ग की मौत, कई दिनों से भोजन नहीं हुआ था नसीब

लाइव सिटीज, जमुई/अभिषेक : वक्त की आंखों ने वो फलक भी देखा है, लम्हों ने खता की थी वर्षों ने सजा पाई. जमुई जिले का बुकार गांव आज ऐसे ही बुरे दौर से गुजर रहा है. बीते दिनों साम्प्रदायिकता की आग ने इस गांव में ऐसा रंग दिखाया जिसकी लाली आज भी कफन के रूप में दिख रही है. गांव में कारवाई के नाम पर पुलिस की ऐसी लाठी चली की पूरा का पूरा गांव पलायन कर गया. जो लाचार वृद्ध गांव में रह गए वो अब भूखे मरने को विवश हैं.

एक ऐसा ही मामला शनिवार को सामने आया जब बुकार गांव के एक बुजुर्ग ने भोजन के आभाव में कई दिनों तक भूखे रहने के बाद दम तोड़ दिया. सवाल ये कि बच्चू रावत की मौत का जिम्मेवार कौन. जिला प्रशासन या फिर सांप्रदायिकता की आग फैलाने वाले लोग. पूरा गांव विरान पड़ा है और ग्रामीण गांव से बाहर. गांव के जिस वृद्ध व्यक्ति की भूख से मौत हुई है उसका नाम है बच्चू रावत और भूख से दम तोड़ने के बाद इनको कंधा देने वाले भी नजर नहीं आ रहे थे वजह थी पुलिसिया डंडा. घर वाले गांव छोड़ पलायन कर चुके हैं. गांव में कुछ लोगों को छोड़ कोई नजर नहीं आ रहा. जैसा ग्रामीण बताते हैं कि करीब 55 साल के वृद्ध बच्चू रावत को कई दिनों से भोजन नसीब नहीं हुआ था और भूख के कारण शनिवार की दोपहर उनकी मौत हो गई. घर वाले नहीं थे इस कारण उनको कंधा देने वाला भी नसीब नहीं हो रहा था.




24 घंटे के बाद इनके शव का अंतिम संस्कार किया गरसंडा पंचायत के मुखिया रुपेश पासवान और वार्ड सदस्य साकेन्द्र रावत के प्रयास से किया गया. किसी तरह बच्चू रावत के सगे-संबंधियों को फोनकर गांव बुलाया गया जिसके बाद उनका दाह संस्कार हुआ. मुखिया रुपेश पासवान ने कबीर पंथी योजान के तहत दाह संस्कार के लिए 3000 रुपये दिए. मुखिया रुपेश पासवान, वार्ड सदस्य साकेन्द्र रावत ने बताया कि स्व. बच्चू रावत के घर में किसी सदस्य के नहीं रहने के कारण उनकी मौत भूख से हो गई. इन दोनों ने बताया कि गांव के लोग वापस आना चाहते हैं लेकिन इस केस के अनुसंधानकर्ता ए.के आजाद के तुगलकी फरमान और धमकी के कारण ग्रामीण गांव आने से डर रहे हैं.


इस संबंध में जमुई के एसपी प्रमोद कुमार मंडल ने कहा कि अगर व्यक्ति की मौत भूख से हुई है तो घटना दु:खद है इस मामले की जांच की जाएगी. साथ ही उन्होंने कहा कि जो निर्दोष हैं उन्हें डरने की कोई जरुरत नहीं है. जिनका नाम इस केस में हैं और पुलिस की जांच में वो नाम सत्य पाया गया है उन्हें हर हाल में कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा. उन्होंने कहा कि गांव से पलायन कर चुके निर्दोष लोग गांव आकर रहें और उन्हें किसी भी प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है तो वो उन्हें इसकी सूचना दें.


विदित हो कि राम जन्मभूमि पूजन के बाद निकाली गई शोभा यात्रा को लेकर बुकार गांव में दो पक्षों के बीच तनाव हो गया था. दोनों पक्षों के बीच जमकर रोड़ेबाजी भी हुई थी. घटना से बुकार से सटे आसपास के कई गांव में भी तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी. घटना के बाद तनाव शांत कराने जमुई के तमाम आलाधिकारियों ने गांव का दौरा किया था मामले की गंभीरता को देखते हुए गांव को छावनी मे तब्दील कर दिया गया था.