चुनावी सेवा शर्त टीईटी शिक्षकों के लिए छलावा, विधानसभा चुनाव में भुगतना होगा सरकार को खामियाजा : टीईटी शिक्षक संघ

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: टीईटी शिक्षक संघ के प्रदेश संयोजक अमित विक्रम ने बिहार कैबिनेट द्वारा पारित चायनीज चुनावी सेवा शर्त पर घोर आपत्ति दर्ज करते हुए आक्रोश व्यक्त किया है. उन्होंने बताया की आनन- फानन में बिहार सरकार ने शिक्षकों को चायनीज चुनावी सेवा शर्त दिया है. जिसका राज्य के तमाम जिलों में टीईटी शिक्षकों के द्वारा विरोध किया जा रहा है. चायनीज सेवा शर्त में शिक्षकों के वेतन वृद्धि सिवाय धोखा और छलावा के कुछ भी नहीं है. सरकार इससे केवल चुनावी लाभ लेकर दोबारा सत्ता में आसीन होना चाहती है. लेकिन ऐसा इस बार संभव नहीं है. इसका खामियाज़ा चुनावी वर्ष में वोट से वर्तमान सरकार को चुकाना पड़ेगा. बिहार के ढाई लाख टीईटी एवं उनके परिजन एकमत होकर सरकार के खिलाफ वोट करेंगे.

उन्होंने बताया कि शिक्षकों के ऐच्छिक स्थानांतरण के बदले पुरूष शिक्षकों के लिए म्यूचुअल ट्रांसफर का प्रावधान किया गया है जो कि टीईटी शिक्षकों के लिए असहनीय एवं वेदनापूर्ण है. एक जिले से दूसरे जिले में पारस्परिक स्थानांतरण के लिए शिक्षकों का ढूंढना अत्यंत कठिन होगा. सेवा शर्त में टीईटी शिक्षकों के ऐच्छिक स्थानांतरण को साजिशन पेचीदा बनाया गया है. इस स्थानांतरण व्यवस्था से टीईटी शिक्षकों को कोई लाभ नही होगा. शिक्षकों का अर्जित अवकाश 300 दिनों से घटाकर 120 दिन कर दिया गया है. साथ ही समान पद पर अन्यत्र नियोजित होने पर सेवा निरंतरता लाभ से शिक्षकों को वंचित कर दिया गया है. साथ ही टीईटी शिक्षकों एसीपी के लाभ से वंचित कर दिया गया है.



प्रदेश महासचिव उदय शंकर सिंह व प्रदेश संगठन महामंत्री ज्ञानेश्वर शांडिल्य ने संयुक्त रूप से बताया कि शिक्षको के अर्जित अवकाश 300 दिनो से घटाकर 120 दिन करना सरकार के घृणित एवं विकृत मानसिकता का परिचायक है. एक अप्रैल 2021 से मिलने वाली 15% वेतनवृद्धि और ईपीएफ स्कीम के तहत 12% ईपीएफ फण्ड में शिक्षको का अंशदान कट जायेगा जिसके उपरांत टीईटी शिक्षको के वेतन मे मामूली बढ़त होगी. चायनीज शिक्षक सेवा शर्त में जीपीएफ, एनपीएस का कोई ज़िक्र नहीं है जो सत्ताधारी पार्टी के सुशासन सरकार के शिक्षकों के प्रति वैमनस्य को परिलक्षित करती है.

भारत के अन्य राज्य में टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक जो आरटीई एवं एनसीटीई के सभी मानकों को पूराकर शिक्षक नियुक्त होते हैं उनको नियमित की भांति सहायक शिक्षक के साथ राज्यकर्मी का दर्जा सहित सारी सुविधाएं प्राप्त होती हैं. बिहार के तानाशाही निरंकुश सुशासन सरकार ने टीईटी शिक्षकों के सभी मानक पूरा करने के बावजूद इन्हें संवैधानिक अधिकारों के वंचित कर दिया है. जिससे कि बिहार के ढाई लाख टीईटी पात्रताधारी शिक्षकों में सुशासन सरकार के खिलाफ रोष व्याप्त हो गया है. इसका प्रतिकार टीईटी शिक्षकों के द्वारा बिहार के तमाम जिला एवं प्रखण्ड में चायनीज सेवा शर्त की प्रति जलाकर विरोध प्रदर्शन कर दर्ज किया जायेगा. साथ ही सेवा शर्त के कुछ आपत्तिजनक बिंदुओं पर कानून विशेषज्ञ से परामर्श किया जा रहा है. जल्द ही चायनीज शिक्षक सेवा शर्त के खिलाफ टीईटी शिक्षक संघ द्वारा न्यायालय मे वाद दाखिल किया जायेगा.

प्रदेश सचिव सुबोध यादव, चंदन कुमार शाह आदि कहा कि निवर्तमान सुशासन की सरकारी पन्द्रह वर्षो के अपने शासनकाल में बिहार में शिक्षा एवं शिक्षकों को गर्त में धकेलकर अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा को नया आयाम देने मे जुटी है. ऐसे में स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिए परिवर्तन अति आवश्यक हो गया है. आगामी विधानसभा चुनाव मे टीईटी शिक्षक एवं परिवार के सभी सदस्य द्वारा वोट के चोट से सरकार को उखाड़कर फेंकने का संकल्प लेकर चुके हैं.