चूहों के बाद अब बाइक-कार भी पी रही शराब, परेशान हैं इनके ओनर

प्रतीकात्मक फोटो

पटना : बिहार में बीते कुछ महीनों में चूहों की चर्चा जमकर हुई है. पहले चूहे शराब पीने लगे, फिर बाद में बांध में छेद भी करने लगे. चूहे हरना-क्रोसना टाइप के होते हैं, यह भी याद दिलाया गया. लेकिन इन सबमें सबसे वायरल रहा चूहों द्वारा शराब पीने वाली घटना. देश-दुनिया में इसका खूब मजाक उड़ाया गया. अब शराबबंदी वाले बिहार में ऐसा भी सुनने में आ रहा है कि चूहों के बाद बाइक-कार भी शराब पीने लगे हैं.

बिहार में बाइक और कार के शराब पीने का यह मामला कई जिलों में सामने आया है. चौंकिए मत, यह सुनकर भले ही अटपटा लगे, लेकिन पुलिस व उत्पाद विभाग द्वारा दर्ज FIR में कुछ ऐसा ही सामने आया है. बाइक व कार पर भी उत्पाद अधिनियम के धारा के तहत FIR दर्ज की जाती है. इन मामलों में बाइक मालिक को बाइक की न्यायालय से जमानत लेने के साथ-साथ नीलामी की प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ता है.



एक दैनिक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार उत्पाद विभाग जैसे ही शराब पीने या अन्य आरोप में किसी को पकड़ती है तो FIR के साथ ही अदालत में केस शुरू हो जाता है. हालांकि बिहार पुलिस के मामले में यह नहीं होता है. बिहार पुलिस द्वारा दर्ज कांड का अनुसंधान व पर्यवेक्षण होता है जिसमें किसी भी चूक को सुधारने की भी गुंजाइश रहती है.

क्या है मामला

इस सिलसिले में करीब दो महीने पहले सुपौल के सुबोध कुमार सहरसा आते वक़्त पकड़े गए थे. उन्हें मनहरा पुल के पास उत्पाद विभाग द्वारा वाहनों की जांच के क्रम में पकड़ा गया. उनके साथ ही बाइक को भी उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने जब्त कर लिया. सुबोध के साथ-साथ बाइक पर भी उत्पाद अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई. बाद में सुबोध को तो जमानत मिल गई, लेकिन बाइक फंस गई. अब उत्पाद विभाग ने नीलामी के लिए लेटर भेज दिया है. उधर सुबोध और परिजन बाइक की जमानत के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं.

इसी तरह सुपौल में ही चार युवकों को एक कार से शराब पीकर घूमने के आरोप में पकड़ा गया. चारों युवक के साथ-साथ इनकी कार पर भी उत्पाद अधिनियम की धारा में FIR दर्ज कर दी गई. जबकि कार में न तो शराब बरामद हुई और न ही कोई और आपत्तिजनक सामग्री. इन चारों युवकों को तो न्यायालय से जमानत मिल गयी लेकिन कार थाने में सड़ रही है. उसे छुड़ाने के लिए कार मालिक भी न्यायालय का चक्कर लगा रहे हैं.

क्या कहते हैं अधिकारी

इस बारे में सहरसा के एक अधिकारी कहते हैं कि शराब के नशे में किसी के बाइक या कार पर पकड़े जाने के बाद उस बाइक को लावारिस हालत में नहीं छोड़ा जा सकता है. जिस कारण बाइक नंबर का भी प्राथमिकी में उल्लेख कर दिया जाता है. जबकि प्राथमिकी के बाद सभी प्रकार की कार्रवाई न्यायालय के आदेश से ही होती है. वहीँ कानून के जानकारों का कहना है कि इसमें संशोधन की जरूरत है. जब बाइक या कार पर बैठे लोग शराब पीकर गाड़ी चलाते हैं तो इसमें गाड़ी पर उत्पाद अधिनियम की धारा नहीं लग सकती है.

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