लाइव सिटीज, सेंट्रल जेस्क :  बुधवार को सीतामढ़ी में बच्चों के अधिकारों और खुशहाली के लिए सर्वधर्म संगोष्ठी का आयोजन बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन के द्वारा यूनिसेफ और विकासार्थ ट्रस्ट के सहयोग से किया गया. इसमें बच्चों के अधिकारों और उनकी बेहतरी पर चर्चा हुई. कार्यक्रम में पुनौरा धाम के आचार्य कौशल किशोर दास, सीतामढ़ी के जमाते इस्लामी हिन्द के आमिर इकबाल, गायत्री परिवार के रौशन कुमार, ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से अंशु कुमारी, जेम्स चर्च के पास्टर, जोसफ नारायण, जैन समाज के सुशील कुमार जैन, मदरसा इस्लामिया के खुर्शीद आलम के साथ ही विभिन्न धार्मिक और अध्यात्मिक गुरुओं ने हिस्सा लिया.

यूनिसेफ बिहार की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने कहा कि धर्मगुरुओं और आध्यात्मिक गुरुओं की सलाह को लोग बहुत ही आदर के साथ मानते हैं. टीकाकरण और पोलियो अभियान में भी धर्मगुरुओं की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण रही है. इन्हीं को ध्यान में रख कर यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन का गठन 2018 में किया गया था. यह बिहार के बच्चों की खुशहाली और अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए सभी धर्म और अध्यात्मिक गुरुओं का एक स्वैक्षिक मंच हैं.

इस मंच की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए निपुण गुप्ता ने कहा कि विभिन्न धार्मिक आयोजनों और प्रवचनों में कैसे बच्चों के हितों की बात जोड़ सकते हैं. इसके द्वारा मदरसा के द्वारा स्कूल सुरक्षा पर यात्राएं निकाली गई, शिवरात्रि के अवसर पर बाल विवाह नहीं करने के लिए जागरूकता अभियान चले, नवरात्रा के दौरान कन्याओं की सुरक्षा के लिए अभियान चले. इस मंच के माध्यम से हम जो कार्य करते हैं वो चैरेटी आधारित न होकर बच्चों के अधिकारों पर केन्द्रित होते हैं. हमारी प्राथमिकता में वंचित और पिछड़े समुदाय के बच्चों शामिल होते हैं क्योकिं उन्हें देखभाल की ज्यादा जरुरत है.

निपुण गुप्ता ने कहा कि आज यहांं हम सब मिलकर सीतामढ़ी का ऐसा फोरम बनाना चाहते हैं. जिसके माध्यम से हम सीतामढ़ी के बच्चों के लिए मिलकर अपने स्तर से जो बेहतर हो वो कर सकें. बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, से संबंधित विभिन्न संकेतकों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि हर 8 मिनट में 1 नवजात बच्चे की मृत्यु हो जाती है और इसका कारण उनका बेहतर पोषण और अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता है. बिहार में हर दूसरा बच्चा कुपोषित है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2016 के आंकड़ों के अनुसार सीतामढ़ी में 57.2 % बच्चे नाटापन के शिकार हैं जो राज्य औसत से ज्यादा है. इसी तरह से राज्य की तुलना में सीतामढ़ी में संस्थागत प्रसव लगभग आधा केवल 37.2 % ही है.

पुनौरा धाम के मठाधीश महंत कौशल किशोर दास ने कहा कि सीता मैया की इस धरती पर बच्चों के विकास के लिए इस तरह का पहल स्वागत योग्य है. बच्चों के विकास के लिए सबसे पहले अभिभावकों को स्वयं में सुधर लाना होगा. आजकल मोबाइल का बच्चों के ऊपर काफी नकारात्मक पड़ रहा है. सीतामढ़ी के जमाते इस्लामी हिन्द के आमिर इकबाल ने कहा कि इस मंच के माध्यम से बच्चों में जो आपराधिक गतिविधियीं की ओर झुकाव बढ़ रहा है साथ ही ड्रग्स और अन्य नशों की ओर बढ़ रहे है उसके लिए भी इस मंच के माध्यम से जागरूकता फैलाई जा सकती है.

ब्रह्माकुमारी अंशु कुमारी ने कहा कि हम सब के पास सब नॉलेज है पर बच्चों की शिक्षा केवल पढाई से नहीं आती है उसके लिए संस्कार भी बहुत महत्वपूर्ण है. हम जब बच्चों को लेकर हम नेगेटिव सोचते हैं तो इसका प्रभाव बच्चों पर भी पड़ता है. सकारात्मक सोच से एक सकारात्मक शक्ति मिलती है जो हमें जिन्दगी में दिशा में देता हैं. आचार्य सुदर्शन के आत्म कल्याण केंद्र, सीतामढ़ी के रूद्र कुमार सिंह ने कहा कि बच्चे किसी धर्म और जाति के नहीं होते हैं. बच्चों को किस दिशा में जे जाए कैसे उनकी पढ़ाई और देखभाल हो इसके ऊपर लोगो को जागरूक करने की जरुरत है.

कार्यक्रम के उपस्थित सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने सीतामढ़ी में भी बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन के गठन करने और उसमे अपने स्तर से सहयोग करने के लिए अपनी सहमती दी. इस दौरान उपद्थित धर्गुरुओं ने बच्चों के लिए इस मंच को बनाने के लिए हस्ताक्षर करके अपनी सहमती दी और विश्वास दिलाया की उनका पूरा सहयोग इस पहल को रहेगा.