गिरिराज सिंह पर छींटाकशी करने वाले BJP नेताओं को मिला जवाब – बांझ का जाने प्रसूती के पीड़ा

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : भारतीय जनता पार्टी के नवादा सांसद सह केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का टिकट कटने और उन्हें बेगूसराय भेजे जाने का मामला गरमा गया है. इस मामले में जमकर राजनीति हो रही है. हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि पार्टी के अंदर ही गिरिराज सिंह पर छींटाकशी शुरू हो गई है. उन्हें ‘नाटक बंद करने’ तक की सलाह दी जा रही है. अब गिरिराज सिंह पर छींटाकशी करने वाले लोगों को जवाब दिया है भाजयुमो के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संतोष रंजन राय ने. उन्होंने ट्वीट कर ऐसे लोगों पर तीखा हमला किया है.

संतोष रंजन राय गिरिराज सिंह के बेहद करीबी माने जाते हैं. राय ने अपने ट्वीट में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को टैग करते हुए सिंह पर दिए गए बयानों की स्क्रीनशॉट भी लगाई है. हालांकि राय के ट्वीट से गिरिराज सिंह के टिकट काटे जाने की व्यक्तिगत पीड़ा भी उजागर हो गयी है.

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संतोष रंजन राय ने अपने ट्वीट में कहा है कि ‘बांझ का जाने प्रसूती के पीड़ा’ जो क्षेत्र को अपना मंदिर समझेगा, कार्यकर्ताओं के सुख-दुःख में शरीक होगा, वही तो दर्द को समझेगा. पार्टी ने नवादा भेजा और वहां पर सबसे ज़्यादा काम करने वाले सांसद का रिकार्ड बनाये. पार्टी के लोग उनकी भावना को मर्माहत करने का काम बंद करें.

राय ने अपने ट्वीट में बेगूसराय से विधान पार्षद रजनीश कुमार और पार्टी के वरिष्ठ नेता सीपी ठाकुर के बेटे विवेक ठाकुर के बयानों का स्क्रीनशॉट लगाया है. रजनीश कुमार ने अपने एक ट्वीट में कहा था – गिरिराज सिंह को अब अपना नाटक बंद कर देना चाहिए और बेगूसराय आकर लड़ने की तैयारी करनी चाहिए. वहीं विवेक ठाकुर ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि गिरिराज सिंह की बेगूसराय से लड़ने की इच्छा थी, जिसके लिए वे प्रयासरत हैं. पार्टी ने उनका आदर किया, पिछली बार भी नवादा से टिकट मिलने पर उन्होंने नाटक किया था. उचित होगा इस गंभीर माहौल में नाटकीय माहौल का निर्माण न करते हुए पार्टी हित में बेगूसराय से चुनावी बिगुल आरंभ करें.

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बता दें कि खुद गिरिराज सिंह ने भी आज सोमवार को मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने ठंडे लहजे में कहा – मुझे नहीं पता कि मेरे साथ ये क्यों हुआ? मैंने अंतिम समय तक कहा था कि मैं चुनाव लड़ूंगा, तो नवादा से लडूंगा. मुझे मलाल है कि नवादा में जो ‘रूरल इकॉनमी का मॉडल’ खड़ा किया, उसका फायदा वहां के लोगों को मिलेगा, मगर उन्हें नहीं मिल पाएगा.’

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