पीके गए यूपी, लगा बिहार विकास मिशन पर सवालिया निशान!

लाइवसिटीज डेस्क : नीतीश कुमार के रणनीतिकार प्रशांत किशोर कुछ समय से बिहार से दूर हैं. वजह है उत्तर प्रदेश और पंजाब में आगामी विधानसभा को लेकर उनकी अतिव्यस्तता. यूपी और पंजाब चुनाव को लेकर प्रशांत वहां कांग्रेस के लिए चाणक्य बन उनकी मदद कर रहे हैं. दोनों राज्यों में चुनाव फरवरी तक संपन्न होंगे. इस हिसाब से तो वे करीब 2-3 महीने बिहार नहीं लौट पाएंगे. उनके बिहार से दूर होने का सीधा असर बिहार के विकास मिशन (BVM) पर पड़ा है. प्रशांत किशोर इस कमिटी की अगुवाई कर रहे थे और सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को रिपोर्ट कर रहे थे.



बता दें कि BVM की स्थापना फरवरी माह में सोसाइटी एक्ट1860 के तहत की गई थी.  इस अर्धसरकारी बॉडी का उद्देश्य नीतीश कुमार के ‘सात निश्चय’ कार्यक्रम का सही ढंग से इम्प्लीमेंटेशन कर सफल बनाना है.bihar-vikas-mission123

लेकिन प्रशांत का यूपी चुनाव में व्यस्त होने की वजह से कहा जा रहा है कि बिहार सरकार में कुछ अधिकारी वर्ग जो प्रशांत से दुर्भावना रखते थे इन दिनों ज्यादा खुश हैं क्योकि अब BVM के लिए एक सामानांतर सेक्रेटेरिएट खड़ा करने की योजना अब ठंडे बस्ते में चली गई है.

बता दें कि किशोर ने BVM सेक्रेटेरिएट के लिए 1500 एक्सपर्ट लोगों की टीम बनाने का विचार सुझाया था. जिसकी नियुक्ति प्रशांत किशोर के इशारे पर होनी थी. फरवरी- मार्च के महीने में 100 टीम लीडर्स और उनसके सहायक की नियुक्ति का प्रोसेस स्टार्ट किया गया.

लेकिन मात्र 12 लोग ही टीम लीडर के लिए चुने गए और बाकी में से केवल 20 एसोसिएट पद के लिए चुने गए. लेकिन उसके बाद प्रशांत बिहार से बाहर चले गए. तो इस प्रोजेक्ट पर आगे एक्सपर्ट की नियुक्ति होनी अभी बाकी है.  एक अधिकारिक सूचना के अनुसार इसमें जल्द ही और भी नियुक्ति की जाएगी.

लेकिन किशोर करीब 6 महीने से बिहार सरकार की कोई भी मीटिंग में शामिल नहीं हुए हैं. इससे बिहार में विपक्षी पार्टी की भी भौंहे तन गई हैं. क्योंकि राज्य सरकार में प्रशांत किशोर अधिकारिक तौर पर इस प्रोजेक्ट से जुड़े हुए हैं तो जाहिर से विपक्ष भी इसको लेकर सवाल खड़ा करेगा. इस मामले में भाजपा नेता सुशील मोदी ने भी सवाल खड़ा करते हुए पूछा है कि क्या प्रशांत अनुपस्थिति में भी कार्य करते हैं ?

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