बरमेश्‍वर मुखिया के हत्‍यारे का सुराग दो, 10 लाख कैश लो

लाइव सिटीज डेस्क : रणवीर सेना के सुप्रीमो बरमेश्‍वर मुखिया के कातिलों को तलाश रही सीबीआई पुख्‍ता तौर पर अब तक खाली हाथ है. शहर आरा में मर्डर हुए चार साल से अधिक हो चुके हैं. हत्‍यारे की ठीक पहचान आज भी अस्‍पष्‍ट है. परिणाम, बीच में जितने भी हत्‍या में शामिल होने के आरोप में पकड़े गये, कोर्ट से जमानत पर आसानी से छूटते गये. ऐसे में, सीबीआई ने हत्‍यारों का सुराग पाने का नया दांव खेला है. 

दस लाख कैश देगी सीबीआई
जांच एजेंसी सीबीआई ने बिहार के अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित कराया है. इसमें सीबीआई ने बरमेश्‍वर मुखिया हत्‍या-कांड में आठ व्‍यक्तियों के विरुद्ध आरोप-पत्र दाखिल होने की सूचना दी है. लेकिन आगे ईनाम की बात है. मतलब साफ है कि अब तक की जांच से सीबीआई स्‍वयं संतुष्‍ट नहीं है.

सीबीआई की जारी अपील में कहा गया है कि यदि किसी व्‍यक्ति को इस हत्‍याकांड से जुड़ी अन्‍य महत्‍वपूर्ण जानकारी हो तो पटना में सीबीआई के विशेष अपराध शाखा को दें. इस कांड के खुलासे के लिए पर्याप्‍त जानकारी देने वाले को सीबीआई द्वारा 10 लाख रुपये का नगद ईनाम दिया जाएगा . सूचना देने वाले का नाम और पता गुप्‍त रखे जाने की गारंटी भी दी जा रही है. जानकारी देने को टेलीफोन/फैक्‍स के नंबरों के अलावा मोबाइल नंबर 9470488533 भी जारी किया गया है.

brahmeshwar-singh-new

जून,2012 में हुई थी हत्‍या
नक्‍सलियों को जवाब देने को बरमेश्‍वर मुखिया ने रणवीर सेना बनाया था. फिर दोनों ओर से खूब खून बहा . बच्‍चे-महिलाएं भी निर्ममता से मौत के घाट उतारे गए. रणवीर सेना और बरमेश्‍वर मुखिया को करीब 30 नरसंहारों का मास्‍टरमाइंड माना जाता था. इनमें कोई 279 लोगों की हत्‍याएं हुईंं. जून,2012 में मारे जाने के वक्‍त बरमेश्‍वर मुखिया की उम्र करीब 66 साल की थी.

हत्‍या के वक्‍त आरा में वे सुबह की सैर को निकले थे.इसके पहले साल 2002 में गिरफ्तारी के बाद बरमेश्‍वर मुखिया जेल से 2011 में निकले थे. तब से वे नये किसान संगठन पर काम कर रहे थे. बरमेश्‍वर मुखिया की हत्‍या के बाद आरा से पटना तक काफी बवाल हुआ था . हजारों लोग बरमेश्‍वर मुखिया के शव को हो-हंगामा करते पटना लेकर आ गये थे.

cbi-barmeshwar

हत्‍या के बाद रणवीर सेना का वजूद खत्‍म हुआ 
रणवीर सेना का प्रभाव खत्‍म होना तो साल 2002 में बरमेश्‍वर मुखिया की गिरफ्तारी से ही प्रारंभ हो गया था. पर 2012 में हत्‍या के बाद यह पूर्ण रुप से समाप्‍त माना जाने लगा है. बरमेश्‍वर मुखिया के नाम बिहार में राजनीति सब दिन चलती रही. हत्‍या के बाद गिरिराज सिंह ने तो बरमेश्‍वर मुखिया को ‘गांधी’ तक कह दिया था. भाजपा नेता सीपी ठाकुर और जहानाबाद के सांसद अरुण कुमार को बिहार में सदैव बरमेश्‍वर मुखिया के करीब माना गया. ये दोनों बरमेश्‍वर मुखिया के संरक्षक माने जाते रहे.
यह भी पढ़ें – स्मार्ट हैं, स्टाइलिश हैं, रियल स्टार हैं ये बेटियां...

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*