सिर्फ शराबबंदी ही नहीं, शराब फैक्ट्री भी हो बंद : मेधा पाटकर

लाइवसिटीज डेस्क : सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने पूर्ण शराबबंदी लागू करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पीठ थपथपाई है. उन्होंने इस पूर्ण शराबबंदी का पूरी तरह से समर्थन किया है. लेकिन शराबबंदी को सही ढंग से लागू करने के लिए बने  द्रकोनियन कानून (सख्त कानून) पर पुनर्विचार करने की सलाह दी है. जिसमे किसी घर से शराब पकडे जाने पर परिवार के सभी व्यस्क सदस्य को सजा मिलेगा.



मेधा ने कहा कि बिहार की बहुत सी महिलाएं जो मुंबई में रहती है, सबने शराबबंदी कानून का समर्थन किया है. ये सभी औरतें जब शराबबंदी कानून के लागू होने के बाद बिहार लौटीं  तो वहां उनलोगों ने सकारत्मक बदलाव को महसूस किया.

मेधा पाटकर यहां NAPM के 11वें राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने पहुंची थी. तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मलेन में देश के करीब 200 संस्थाओं के करीब 1000 प्रतिनिधि ने भाग लिया है.

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पाटकर ने आगे कहा कि राज्य में शराब बंदी कानून का सख्ती से पालन होना चाहिए. ज्यादा से ज्यादा नशामुक्ति केंद्र और काउन्सलिंग सेंटर शुरु किया जाना चाहिए. मेधा ने मद्यनिषेध के बाद राज्य में बढ़ी शराब तस्करी को लेकर भी चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा कि राज्य में शराब निर्माण करने वाली कंपनियों का लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करना चाहिए.  नहीं तो शराबबंदी का कोई मतलब राज्य में नहीं रह जाएगा.

 केंद्र सरकार के नोटबंदी जैसे कदम पर भी पाटकर ने निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि विमुद्रीकरण पूरी तरह से देश में विफल हो गई है. मेधा ने व्यंग करते हुए कहा कि “यह नोटबंदी नहीं नोट वापसी है.”

कॉरपोरेट और पैसे वाले लोग कैश में डील नहीं करते हैं वे स्टॉक्स, बांड और प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करते हैं. सरकार विदेश में जमा काला धन लाने में पूरी तरह से विफल रही है.

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