सुमो ने उठाया सवाल, कार्यक्रम कार्यान्वयन समितियों के पुनर्गठन का औचित्य नहीं

पटना : भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि राज्य से लेकर जिला और प्रखंड स्तर तक की कार्यक्रम कार्यान्वयन समितियां सफ़ेद हाथी बन चुकी हैं, इसलिए इनके पुनर्गठन का कोई औचित्य नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि इनके पुनर्गठन से राजद, जदयू व कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा सरकारी अधिकारियों पर धौंस जमाने और भयादोहन करने का जरिया भी बनेगी.



मोदी ने सवाल उठाया कि केन्द्र प्रायोजित योजनाओं की समीक्षा के लिए जिला स्तर पर सांसद की अध्यक्षता में, वहीँ राज्य सरकार की योजनाओं व कार्यक्रमों की मॉनिटरिंग के लिए प्रभारी मंत्री, प्रभारी सचिव, जिला परिषद और पंचायत समिति जैसी निर्वाचित समितियां हैं ही तो फिर एक ही योजना की कितनी बार और कितने स्तर पर समीक्षाएं होंगी ?

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उन्होंने कहा कि महागठबंधन के घटक दलों की आपसी खींचतान और उठापटक में पिछले सात महीने से राज्य के तमाम बोर्ड और आयोगों के पद खाली है. पहले इन तमाम पदों पर जदयू का कब्जा था, जिनमें हिस्सेदारी को लेकर महागठबंधन के तीनों दलों के बीच जारी खींचतान के कारण आज तक बोर्ड और आयोग के पदों पर मनोनयन नहीं हो सका है. अनुसूचित जाति व जनजाति, महिला व अल्पसंख्यक आयोग आदि में मनोनयन नहीं होने से हजारों ज्ञापन और आवेदन लंबित हैं तथा आम लोगों की समस्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा है.

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