दिल्‍ली की पारुल पांडेय को सांसद पप्‍पू यादव से हो गया है प्‍यार, जानिए क्‍यों

PAPPU-JAP
सांसद पप्पू यादव

-पारुल पांडेय-

लाइव सिटीज, पटना : मैं पारुल पांडेय हूं. मूल रुप से जबलपुर (मध्‍य प्रदेश) की रहने वाली हूं. लेकिन अभी दिल्‍ली में हूं. एमिटी यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट की स्‍टडी कर रही हूं. सोशल और पोलिटिकल रिसर्च मेरी हॉबी है. बिहार कभी नहीं गई हूं. हां, किस्‍से बहुत सुने हैं. पर, इनदिनों मेरी दोस्‍त निहारिका सिंह पिछले कई महीनों से बिहार में घूम रही है. वह बिहार के रणवीर सेना बरमेश्‍वर मुखिया पर शोध में लगी है.



बरमेश्‍वर मुखिया पर शोध के क्रम में निहारिका ने बिहार को बहुत पढ़ लिया है. वह खूब लिख भी रही है. मैंने निहारिका से ही पप्‍पू यादव के बारे में सुना. वे मधेपुरा के सांसद हैं. शरद यादव को हराया था. निहारिका ने पप्‍पू को फोकस करती एक आर्टिकल में लिखा था – यह सांसद ‘पागल’ है क्‍या. इसके बाद मैं और निहारिका लगातार कई दिनों तक रात को फोन पर पप्‍पू यादव के बारे में बातें करती रही. निहारिका ने कहा – मैं तो बरमेश्‍वर मुखिया को पढ़ने में बिजी हूं, तुम्‍हारे लिए पप्‍पू यादव की केस स्‍टडी अच्‍छी है. सभी तरह के रंग मिलेंगे लिखने को. तब से मैंने पप्‍पू यादव को सर्च करना शुरु किया है.

अभी मिली नहीं हूं पप्‍पू यादव से. हां, दिल्‍ली में उनके बंगले 11ए, बलवंत राय मेहता लेन पर पीछे में गई थी. जब से लौटी हूं, मेरे दिमाग में दही जम गया है. समझ नहीं पा रही कि यह कैसा नेता-एमपी है. आगे मिलना है, इसलिए फेसबुक, ट्विटर, गूगल, इंस्‍टाग्राम सबों पर पप्‍पू यादव को समझ रही हूं-पढ़ रही हूं. इस दरम्‍यान ही मुझे लगने लगा है कि मैं तो पप्‍पू यादव को ‘लव’ करने लगी हूं. जनता का प्‍यार उन्‍हें कब-कहां-कितना मिलता है, यह तो बिहार जाकर देखूंगीं.

पर, 110 किलो से अधिक वजन के पप्‍पू यादव को मैंने मन-मस्तिष्‍क से प्‍यार करना शुरु कर दिया है, तो खास वजह है. आज ठोस दस बातों की चर्चा कर रही हूं. आप सबों की मीठी -खट्टी टिप्‍पणियों से मेरी जिज्ञासा और बढ़ेगी, क्‍योंकि आगे बिहार जाकर पप्‍पू यादव पर केंद्रित उन सवालों का जवाब मुझे मिलना है.

1 . पप्‍पू यादव दिल्‍ली के जिस बंगले में रहते हैं, वहां कोई चार सौ मरीजों को रहते मैं देख चुकी हूं. मेरी आंखें फटी की फटी रह गई. सभी गरीब और परेशान लोग. कोई कैंसर का रोगी है तो किसी की किडनी फेल है. इन सबों का इलाज पप्‍पू यादव कराते हैं. खाना-रहना फ्री. अपने बंगले का नाम पप्‍पू ने ‘सेवाश्रम’ दे रखा है. कोई दूसरा सांसद ऐसा दिखे, जिसे मैं साथ-साथ लव कर सकूं, तो जरुर बताइएगा.

2 . पप्‍पू यादव ने अभी पचासवां जन्‍मोत्‍सव मनाया है. पांचवें दफे सांसद हैं. इस हैसियत और उम्र में लोग फैमिली-फ्रेंड्स के संग फाइव स्‍टार होटल में बर्थडे सेलीब्रेट करते हैं. महंगे गिफ्ट बटोरते हैं. लेकिन पप्‍पू ने मधेपुरा में 25000 लोगों के साथ बर्थडे मनाया. गरीबों में कपड़े बांटे. 15 रुपये में सबों के लिए जन आहार केन्‍द्र खोला. कोई दूसरा सांसद बर्थडे के दिन इस तरीके से गिफ्ट लेने के बदले देने वाला आपको दिखता है क्‍या.

3 . बर्थडे के अगले दिन पप्‍पू यादव बिहार के औरंगाबाद में नक्‍सलियों से सताए लोगों के बीच पहुंच जाते हैं. 37 लोगों को 25-25 हजार रुपये की मदद करते हैं. और किसी को भी पैसे देते हैं. मतलब दस लाख रुपये दो घंटे में बांट दिया. पप्‍पू कोई बिहार सरकार नहीं हैं. औरंगाबाद उनके लिए चुनाव जीतने वाला क्षेत्र भी नहीं है. यह सवाल जरुर उठ सकता है कि पप्‍पू इतना पैसा लाते कहां से हैं. लेकिन कोई दूसरा सांसद अपना पैसा बिना चुनाव के खर्च करते आपने देखा है क्‍या.

4 . पप्‍पू यादव की एक्टिविटी को देख समझ सकती हूं कि वे सोते बहुत कम हैं. जानकारी कहती है कि दो घंटे से अधिक नहीं. रात को 3 बजे तक अपने लोगों से घिरे रहते हैं. दरवाजा सदैव खुला रहता है. सुबह पांच बजे फिर से जगकर छह बजे लोगों के बीच हाजिर हो जाते हैं. काम के इतने घंटे कैसे, जवाब तलाशने को पप्‍पू यादव के साथ दिन गुजारने होंगे.

5 . यह जानकर मुझे हैरत हुई कि एम्‍स, नई दिल्‍ली में बिहार के लोगों का इलाज कराने के लिए पप्‍पू यादव का स्‍पेशल मेडिकल सेल काम करता है.संबंधित लोगों के नंबर फेसबुक पर जारी किए हुए मिलते हैं. एम्‍स में पप्‍पू के मेडिकल सेल का प्रधान कोई विजय है. भीड़-भाड़ में विजय की पहचान ऐसे होती है कि जहां झोला-झोली परेशान बिहार के लोगों का मेला दिखे, वहां इलाज कराने को पप्‍पू का विजय मिल जाएगा.

6 . रोज रुपये बांटते दिख जाने वाले पप्‍पू यादव के बारे में यह जानकर मुझे हैरानी हो रही है कि नई दिल्‍ली में उनके नाम का कोई मालिकाना घर नहीं है. याद रखिए, पांचवें दफे सांसद हैं. पटना में भी अपनी ब्‍याही बहन के हिस्‍से के दो कमरे के फ्लैट में रहते हैं. यह फ्लैट कोई मंदिरी मोहल्‍ले में है. पटना से मेरी दोस्‍त निहारिका ने बताया है कि बड़ा गंदा मोहल्‍ला है. दूसरे बड़े लोग इधर रहना पसंद नहीं करते हैं.

7 . पप्‍पू यादव बिहार में करप्‍ट हेल्‍थ सिस्‍टम के खिलाफ लड़ रहे हैं. अस्‍पताल में रेड मारकर पैसों के लिए बंधक बनाई गई लाश को छुड़ाते हैं. गलत तरीके से अधिक वसूली करने वाले अस्‍पतालों के दुश्‍मन बने हुए हैं. इस लड़ाई में केस-मुकदमे हो जाते हैं, जेल जाने का डर बना रहता है, पर पप्‍पू धमकते दिख जाते हैं. सचमुच, मुझे यह लड़ाई पसंद आ रही है.

8 . 110 किलो से अधिक वजन वाले पप्‍पू यादव को सर्च करते मैंने उन्‍हें तस्‍वीरों में बिहार में लंबी-लंबी पदयात्राएं करती देखी है. मगध में सौ किलोमीटर से भी अधिक की पदयात्रा. मैं समझ नहीं पाती हूं कि इतना भारी-भरकम आदमी 100 किलोमीटर पैदल चल कैसे लेता है.

9 . हिस्‍ट्री में पप्‍पू यादव का निगेटिव पक्ष भी मिलता है. पर, अब वे भगत सिंह-सुभाष चंद्र बोस की बातें करते हैं. बेलौस कहूं कि मुझे यह बात अच्‍छी लग गई, जब वीडियो में यह कहते सुना कि कोई मेरी आखों के सामने बहन को रेप करे, तो पुलिस के आने का इंतजार करने के बजाय सीधे ठोक दूंगा.

10 . और अंत में, यह कि पप्‍पू यादव के राजनीतिक भविष्‍य को मैं नहीं जानती. मैंने तो अभी वर्चुअल प्‍लेटफार्म पर ही सर्च किया है. पप्‍पू के रेगुलर स्‍ट्रगल को देख अपनी फ्रेंड निहारिका की तरह पप्‍पू को ‘पागल’ तो नहीं कहती हूं,पर यह जरुर कहती हूं कि मन-मस्तिष्‍क से प्‍यार करने लगी हूं. जल्‍द मुलाकात भी करुंगीं.

ई पप्‍पू यादव बिहार में पगला गये हैं क्‍या, जो मर्जी,जब मर्जी – करते रहता है

(डिसक्‍लेमर – लाइव सिटीज ने पारुल पांडेय के आलेख को हू-ब-हू प्रकाशित किया है. सिर्फ हेडिंग का निर्धारण लाइव सिटीज मीडिया की संपादकीय टीम की ओर से किया गया है.)