लोकसभा चुनाव 2019: इस बार ये महारथी नहीं लड़ेंगे चुनाव, जानिए

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : लोकसभा चुनाव की तारीखों की एलान के बाद सभी पार्टियां चुनावी मैदान में उतर गयी है. सभी राजनीतिक पार्टीयां धीरे-धीरे अपनी उम्मीदवारों की घोषणा कर रहे हैं. कुछ पार्टियां अपनी कुछ उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. इसी बीच एक बड़ी खबर निकल के आ रही है कि राजनीतिक गलियारों से कुछ चर्चित चेहरा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया है.

इस बार लोकसभा चुनाव में भारतीय राजनीति के कुछ बड़े चेहरे नजर नहीं आएंगे. राकांपा प्रमुख शरद पवार के चुनाव लड़ने की अटकलें थीं, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया। वहीं, लोजपा प्रमुख व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, भाजपा नेता व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और केंद्रीय मंत्री उमा भारती जैसे नेता भी चुनाव नहीं लड़ेंगे. जयललिता और करुणानिधि के निधन के बाद तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक और द्रमुक के लिए यह पहला चुनाव होगा. भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस है.

14 लोकसभा चुनाव लड़ चुके शरद पवार बोले – अब नहीं

राकांपा प्रमुख शरद पवार ने पहली बार 1967 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की. वे तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने. उन्होंने केन्द्र सरकार में रक्षा और कृषि विभाग जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली. शरद पवार 14 बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना की. 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी सीट बेटी सुप्रिया सुले के लिए छोड़ी. पवार अभी राज्यसभा सदस्य हैं. इस बार उनके माढा से चुनाव लड़ने की अटकलें थीं.

पवार ने कहा कि परिवार के दो सदस्य यानी सुप्रिया सुले और अजीत पवार के बेटे पार्थ इस बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. यही कारण है कि वे इस बार चुनाव मैदान में नहीं होंगे. उन्होंने कहा था कि परिवार और पार्टी के सदस्य चाहते हैं कि पार्थ (पोता) चुनाव लड़े. मैं भी चाहता हूं कि नई पीढ़ी को राजनीति में आना चाहिए.

स्वास्थ्य कारणों के चलते सुषमा ने बनाई चुनाव से दूरी

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज 1977 में पहली बार हरियाणा विधानसभा के लिए चुनीं गईं. वे तीन बार विधायक रहीं. चार बार लोकसभा सदस्य बनीं. तीन बार राज्यसभा सदस्य रहीं. इस दौरान वे राज्य और केन्द्र सरकार में मंत्री भी रहीं. दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री भी बनीं. सुषमा हरियाणा सरकार में 25 साल की उम्र में मंत्री बनीं. किसी भी राज्य में सबसे युवा मंत्री बनने का रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है. सुषमा 6 राज्यों हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड और मध्यप्रदेश की चुनावी राजनीति में सक्रिय रही हैं. सुषमा ने कहा था कि डॉक्टरों ने उन्हें इन्फेक्शन के चलते धूल से दूर रहने की हिदायत दी है. इसलिए वे लोकसभा चुनाव नहीं लड़ सकतीं, लेकिन वे राजनीति में बनी रहेंगी.

50 साल में पहली बार चुनाव नहीं लड़ेंगे रामविलास पासवान

लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान पहली बार 1969 में विधायक बने. इसके बाद 1977 में वे पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. आठ बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा सांसद चुने गए. इन दौरान वे कभी यूपीए तो कभी एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे. लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक हैं. पिछले 50 सालों से केंद्र की राजनीति में सक्रिय हैं. वे गुजराल, देवेगौड़ा, वाजपेयी, मनमोहन और मोदी सरकार में केन्द्रीय मंत्री बने. पासवान ने इस साल जनवरी में ऐलान किया था कि वे लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. हालांकि उन्होंने इसके पीछे का कारण स्पष्ट नहीं किया था.

‘राम’ और ‘गंगा’ के लिए उमा भारती ने छोड़ा चुनावी मैदान

भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री उमा भारती 1989 में पहली बार खजुराहो सीट से लोकसभा सदस्य चुनी गईं. वे अटल और मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहीं. मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री भी रहीं. 2014 में झांसी से लोकसभा सदस्य बनीं. उमा भारती राम जन्मभूमि आंदोलन की प्रमुख नेता रहीं. बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान भी वे अयोध्या में मौजूद थीं. मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री रहने के दौरान एक मामले में गिरफ्तारी वॉरंट निकलने पर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था. बाद में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से विवाद के बाद उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया. जून 2011 में उनकी पार्टी में वापसी हुई. वे केंद्रीय मंत्री हैं. उमा भारती ने कहा था कि वे अब सिर्फ भगवान राम और गंगा के लिए काम करेंगी और पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करती रहेंगी.

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल भी नहीं लड़ेंगे चुनाव

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल 1996 में केरल की अलप्पुजा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए. वे ओमान चांडी सरकार में मंत्री और यूपीए-2 में राज्य मंत्री रह चुके हैं. सिविल एविएशन में राज्य मंत्री रहने के दौरान 2013 में वेणुगोपाल ने एयर इंडिया में टिकट स्कैम का पता लगाया था. उन्होंने फ्लाइट में अपनी यात्रा के दौरान इस स्कैम को पकड़ा था. उनके पास अभी कांग्रेस में संगठन महासचिव का महत्वपूर्ण पद है. वेणुगोपाल का कहना है कि उन पर पार्टी संगठन की जिम्मेदारी है. वे कर्नाटक के प्रभारी भी हैं. इसी के चलते वे चुनाव न लड़ते हुए पार्टी के लिए काम करेंगे.

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चुनाव प्रचार में नजर नहीं आएंगे लालू

राजद सुप्रिमो लालू प्रसाद यादव 1977 में छपरा से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. वे 1990 से 1997 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे. यूपीए सरकार (2004-09) में रेल मंत्री रहे. लालू प्रसाद अपने मजाकिया भाषणों के लिए जाने जाते हैं. इमरजेंसी के दौर के बाद बिहार में हुए हर चुनाव में वे सक्रिय रहे हैं. लालू चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता कैदी हैं. इसके चलते वे चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. फिलहाल रांची रिम्स में उनका इलाज चल रहा है.

दशकों के बाद दक्षिण भारत के दो दिग्गजों के बिना होंगे चुनाव

तमिलनाडु की राजनीति में यह पहला मौका होगा जब दो बड़े चेहरे अन्नाद्रमुक की जयललिता और द्रमुक के करुणानिधि नहीं होंगे. जयललिता का 2016 और करुणानिधि का 2018 में निधन हो गया था. ‘द्रविड़ योद्धा’ के रूप में पहचाने जाने वाले करुणानिधि ने पहला विधानसभा चुनाव 1957 में लड़ा. वे 13 बार विधायक बने. 61 साल के अपने राजनीतिक करियर में वे कभी चुनाव नहीं हारे. 1969 में वे पहली बार राज्य के सीएम बने. इसके बाद पांच बार सीएम रहे. वे पहले ऐसे नेता थे, जिन्होंने तमिलनाडु में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई थी.

तमिलनाडु में ‘अम्मा’ के रूप में लोकप्रिय जयललिता ने एमजी रामचंद्रन के नेतृत्व में पहली बार 1982 में राजनीति में कदम रखा. 1991 में पहली बार वे मुख्यमंत्री बनीं. 6 बार राज्य की सीएम रहीं. पिछले लोकसभा चुनाव में जयललिता के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक ने राज्य की 39 में से 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी. दोनों दिग्गजों की अनुपस्थिति में अन्नाद्रमुक ने जहां भाजपा और दो अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ चुनाव लड़ने का फैसला लिया है, वहीं द्रमुक ने कांग्रेस से गठबंधन किया है.

लालकृष्ण आडवाणी के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेता हैं. वे सातवें उपप्रधानमंत्री रहे हैं. वे मोरारजी देसाई की सरकार में सूचना मंत्री और अटल सरकार में गृह मंत्री रहे. वे भाजपा की स्थापना से पहले जनसंघ और जनता पार्टी का हिस्सा रहे. आडवाणी राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेता रहे हैं. उन्होंने सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा निकाली थी. 1984 में दो सांसदों वाली भाजपा को मुख्य विपक्षी दल बनाने और फिर अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में दो बार सरकार बनवाने में आडवाणी की अहम भूमिका रही है. वे 2009 के चुनाव में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार रहे. आडवाणी के इस बार चुनाव लड़ने पर सस्पेंस बना हुआ है. इसका बड़ा कारण उनकी उम्र (91) बताई जा रही है. वे पांच बार से गुजरात की गांधीनगर सीट से सांसद हैं.

मुरली मनोहर जोशी भी लड़ेंगे या नहीं, संशय बरकरार

भाजपा के दूसरे वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी जनसंघ के समय के नेता हैं. वे पहली बार 1977 में लोकसभा के लिए चुने गए. वे भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं. अटल सरकार में वे कई अहम विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे हैं. जोशी भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं. राम मंदिर आंदोलन में भी वे एक चेहरा रहे. 2014 में उन्होंने नरेंद्र मोदी के लिए वाराणसी सीट छोड़ी और कानपुर से सांसद बने. मुरली मनोहर जोशी की उम्र 85 वर्ष है. इसके चलते उनके चुनाव लड़ने पर सस्पेंस बना हुआ है. हालांकि, अब भाजपा में 75+ नेताओं को भी टिकट देने की बात कही जा रही है. ऐसे में वे कानपुर सीट से चुनाव लड़ सकते हैं.

प्रियंका चुनाव लड़ेंगी या नहीं, स्थिति साफ नहीं

कांग्रेस के नयी महासचिव प्रियंका गांधी अपनी मां सोनिया और भाई राहुल के लिए पिछले काफी समय से रायबरेली और अमेठी लोकसभा सीट पर चुनाव प्रचार करती रही हैं. लेकिन उनकी राजनीति में आधिकारिक एंट्री इसी साल हुई, जब उन्हें कांग्रेस महासचिव बनाकर पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई. 6 फरवरी 2019 को उन्होंने कांग्रेस महासचिव का पद संभाला. प्रियंका ने अब तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है. लेकिन राहुल गांधी द्वारा उन्हें महासचिव बनाए जाने के बाद से ही ये कयास लगाए जा रहे हैं कि वे आम चुनाव में उत्तर प्रदेश की किसी सीट से उम्मीदवार हो सकती हैं.

चव्हाण भी चुनाव नहीं लड़ेंगे

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का आम चुनाव न लड़ना लगभग तय माना जा रहा है. उनकी जगह उनकी पत्नी अमिता इस बार लोकसभा उम्मीदवार हो सकती हैं. केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी इस बार अपनी परंपरागत सीट पीलीभीत छोड़ सकती हैं. पीलीभीत से उनके बेटे वरुण गांधी चुनाव लड़ सकते हैं जो पिछली बार सुल्तानपुर से जीते थे. मेनका हरियाणा की करनाल सीट से लड़ सकती हैं.

वसुंधरा भी लड़ सकती हैं चुनाव

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी लोकसभा चुनाव में उतर सकती हैं. सूत्रों के मुताबिक वसुंधरा राजस्थान के झालवाड़ सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगी. अभी हाल ही में राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार मिली थी. उसके बाद से ही कयास लगाये जा रहे थे कि वसुंधरा लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं. पार्टी उसे झालवाड़ से उतारना चाहती है.

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