बिहार जलाने की कोशिश करनेवाले पर मौन क्‍यों हैं नीतीश कुमार : अनिल कुमार

प्रेस कॉन्फ्रेंस करते जनतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल कुमार

पटना : जनतांत्रिक पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अनिल कुमार ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे पर लोकतंत्र से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया और उनसे मंत्री पद से इस्‍तीफा देने की मांग की. कुमार ने मंगलवार को पटना में आयोजित संवाददाता सम्‍मेलन में कहा कि जब एक मंत्री प्रशासनिक अधिकारी द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्दी कागज का टुकड़ा बता कर फाड़ दे, तब इससे बड़ा दुर्भाग्‍य देश के लिए क्‍यों हो सकता है. उन्‍होंने भागलपुर में दंगा फैलाने के मामले गिरफ्तार अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्‍वत मामले की जांच पर भी सवाल उठाया और कहा कि केंद्र में मंत्री रहते इस मामले में निष्‍पक्ष जांच संभव नहीं है.

उन्‍होंने कहा कि जब भागलपुर में जिस रास्‍ते से जुलूस निकालने का परमीशन ही नहीं था, उस रास्‍ते से जाने का क्‍या मतलब था? यह आरएसएस और बजरंग दल की सोची समझी साजिश थी, जिस पर लॉ एंड ऑर्डर पर कोताही बर्दाश्‍त नहीं करने की बात करनेवाले हमारे मुख्‍यमंत्री आज तक मौन हैं. वहीं नीतीश कुमार के सिपाही कहते हैं कि उनकी औकात बता दी जायेगी. इससे काम नहीं चलने वाला है. उन्होंने कहा कि हम पूछना चाहते हैं कि केंद्र सरकार से कि संविधान को धत्ता बतानेवाले मंत्री पर उनका क्‍या स्‍टेंड हैं? हम नीतीश जी से पूछना चाहते हैं कि बिहार को सांप्रदायिकता की आग में लगातार जलाने की कोशिश करने वाले अश्विनी चौबे और गिरिराज सिंह जैसे लोगों पर उनका क्‍या स्‍टेंड है?



वहीं, कुमार ने बिहार की गिरती कानून व्‍यवस्‍था पर आगामी 9 अप्रैल को जनतांत्रिक पार्टी द्वारा राज्‍य के सभी जिला मुख्‍यालयों पर धरना देने की घोषणा की. उन्होंने नीतीश कुमार से पूछा कि उन्‍होंने अपनी छवि सेक्‍यूलर बना कर रखी है, फिर सांप्रदायिक हिंसा फैलानेवालों पर कार्रवाई में देरी क्‍यों होती है? कहते हैं कानून का राज है, तो फिर एक मंत्री एफआईआर की कॉपी को रद्दी कागज का टुकड़ा बता कर फाड़ देता है और आप मौन रहते हैं? कानून के राज में दंगा भड़काने के आरोपी हिरासत से कैसे भाग जाते हैं? सांप्रदायिकता की आग भड़काने वालों पर आप क्‍यों मौन हैं? राज्‍य में बाहर से तलवारें मंगवाई गईं, ऐसे में आपकी पुलिस क्‍या कर रही थी? नीतीश कुमार जी, आप से इन सवालों के जवाब राज्‍य की जनता जानना चाहती है.

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उन्होंने एससी-एसटी एक्ट में किये जा रहे बदलाव पर कहा कि अगर देश के दलितों, आदिवासियों, अल्‍पसंख्‍यकों और कमजोरों पर हमला होगा, तो अंजाम बुरा होगा. आखिर क्‍या वजह है कि केंद्र में भाजपा की सरकार आते ही देशभर में दलितों और अल्‍पसंख्‍यकों पर हम हमले तेज हो गए? भाजपा सरकार की नीतियों से साफ जाहिर है कि वे बाबा साहब के संविधान कमजोर करना चाहते हैं, ताकि दबे-कुचले और वंचित तबकों को उनके हक और अधिकार से वंचित किया जाय. उन्‍होंने कहा कि हम बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार से पूछना चाहता हैं कि दलितों और पिछड़ों के नाम पर आये दिन अपनी पीठ थपथपाते हैं, मगर इस मामले में आज तक उन्‍होंने क्‍यों कुछ नहीं कहा? आपने दलित को महादलित में शामिल कर खूब वाह-वाही लूटी, लेकिन जब आज उन्हीं महादलितों को संवैधानिक रूप से कमजोर करने की कोशिश हो रही है, तब आप खामोश हैं. जनता जानना चाहती है कि इस मामले में आपका क्या स्टैंड है. आप दलितों के मसीहा बनते हैं, तो मौन क्‍यों हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आज आरएसएस और भाजपा की गोद में सो रहे हैं, जो आपकी अतर्रात्मा को जगने ही नहीं देती.