‘उन्‍माद को बढ़ावा देनेवाले अश्विनी चौबे और गिरिराज सिंह से इस्‍तीफा लें नरेंद्र मोदी’

लाइव सिटीज डेस्क : जनतांत्रिक पार्टी की ओर से बिहार में जातीय व धार्मिक उन्‍माद और गिरती विधि व्‍यवस्‍था के खिलाफ राज्य भर में जिला मुख्‍यालयों पर धरना दिया. पटना में धरने का आयोजन गर्दनीबाग स्थित धरना स्‍थल पर किया गया, जहां पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अनिल कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री अविलंब उन्‍माद को बढ़ावा देनेवाले केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे और गिरिराज सिंह से इस्‍तीफा लें. वरना जनतांत्रिक पार्टी और व्‍यापक स्‍तर पर आंदोलन करेगी. जब एक मंत्री प्रशासनिक अधिकारी द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्दी कागज का टुकड़ा बता कर फाड़ दे, तब इससे बड़ा दुर्भाग्‍य देश के लिए क्‍या हो सकता है. उन्‍होंने भागलपुर में दंगा फैलाने के मामले गिरफ्तार अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्‍वत मामले की जांच पर भी सवाल उठाया और कहा कि केंद्र में मंत्री रहते इस मामले में निष्‍पक्ष जांच संभव नहीं है.

उन्होंने कहा कि मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार पर समाज को बांटने का आरोप लगाते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार में दलित को महादलित और पिछड़ों को अतिपिछड़ा बनाया. इससे न महादलित की हालत सुधरी, न ही अतिपिछड़ों की हालत सुधरी. नीतीश कुमार ने अपने स्वार्थ के लिए समाज को बांटने का काम किया, न कि दलितों-पिछड़ों के उत्थान का. वे अगर सच में दलितों और पिछड़ों के हितैषी हैं, तो एससी-एसटी में छेड़खानी कर कमजोर करने की साजिश पर चुप क्‍यों हैं? वे कहते हैं कि उन्होंने दलितों और पिछड़ों को तीन डेसीमिल जमीन दी है. हमने पूरे बिहार में घूम-घूम कर देखा, लेकिन हमें ऐसा कुछ भी नहीं दिखा. यह बिहार की करोड़ों जनता के साथ धोखा है.

उन्‍होंने कहा कि रामनवमी के नाम पर इस बार घृणा का खेल खेला गया. हिंदू समाज में पूजा पाठ घरों में या धार्मिक स्थलों पर होता है, फिर ये सड़क पर बाइक लेकर माहौल खराब करनेवाले कौन थे? कौन से भगवान बाइक पर चलते हैं? ये कौन लोग हैं, जो लगातार बिहार को धार्मिक उन्माद की ओर ले जा रहे है? नीतीश कुमार को सब पता है, फिर भी वे चुप क्यों हैं? आज बिहार में विकास की बात एकदम खत्म हो गयी है. कानून व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है. जातीय उन्माद से लेकर धार्मिक उन्माद की साजिश को हवा दी जा रही है. इसके बाद भी सीएम नीतीश कुमार आत्ममुग्ध होकर राज्य के हित की बात करते हैं. बिहार के निर्माण की बात करते हैं, मगर हकीकत क्या है?

वक्ताओं ने यह भी कहा कि राम मंदिर बनने को लेकर भाजपा की मंशा ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार के चार साल पूरे हो गए, मगर राम मंदिर पर कोई निर्णय नहीं हुआ. जब इन्हें लगता है कि राम मंदिर से देश की समस्याओं का समाधान है और देश मे शांति आएगी, तो इन चार सालों में राम मंदिर क्यों नहीं बना. इन चार सालों में तो भाजपा को राम मंदिर की चिंता नहीं थी, मगर जैसे ही चुनाव आया राम मंदिर पर राजनीति शुरू कर समाज के आपसी सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश होने लगी है. मंदिर तो ये नहीं बनवा पाए, लेकिन हजारों करोड़ लगा कर देश भर में कार्यालय का निर्माण जरूर करवा रहे हैं. इससे इनकी मंशा स्पष्ट होती है. आज धार्मिक उन्माद फैलानेवाले ही डीजीपी से मिलकर कह रहे हैं कि गिरफ्तारी सिर्फ हिंदुओं की हो रही है, जिसकी नीतीश कुमार के लोग निंदा करते हैं. ये सब नौटंकी है.

बिहार जलाने की कोशिश करनेवाले पर मौन क्‍यों हैं नीतीश कुमार : अनिल कुमार

धरना का संचालन पटना जिला अध्‍यक्ष महेश प्रसाद ने किया. प्रदेश अध्‍यक्ष संजय मंडल, रंजीत पटेल, निराला चौधरी, नौशाद हसन उर्फ परवेज इमाम, रंजीत यादव ई. इंद्रजीत यादव, प्रमोद निराली, बिजुली दास, शैलेंद्र यादव, मो. इकरामुल हक, मो. नेयाज, मो सोहेल, कृष्‍णा देवी, बबीता देवी, अमलकांत दास, पुष्‍पा देवी, किशोरी दास, अरविंद राम, आनंद कुमार, कौशल राम, राजा पटेल समेत बड़ी संख्‍या में कार्यकर्ता मौजूद रहे.

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