जयंती विशेष: ऐसे बना सुभाष चंद्र बोस का ‘आजाद हिंद फौज’, सीएम नीतीश ने किया माल्यार्पण

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लाइव सिटीज डेस्क: ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा’, याद है आप सबको ये डायलाग. जी हां… ऐसा किसी और ने नहीं बल्कि सुभाष चन्द्र बोस ने कहा था. आज हम उनकी बातों की चर्चा इसीलिए कर रहें हैं क्यूंकि आज उनका जन्मदिन है. उनका जन्म आज ही के दिन यानी 23 जनवरी 1897 को हुआ था. आपको बता दें कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस जयंती समारोह में राज्यपाल सतपाल मलिक और सीएम नीतीश पहुंचे गांधी मैदान. नेताजी के प्रतिमा पर किया माल्यार्पण. राजकीय समारोह के रूप में मनाया गया जंयती समारोह.

सुभाष चंद्र बोस उस वक्त ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में थे. उस वक्त तक उनकी पहचान कांग्रेस के योद्धा के तौर पर होने लगी थी. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान जेल में बंद सुभाष चंद्र बोस की तबीयत फरवरी, 1932 में ख़राब होने लगी थी. इसके बाद ब्रिटिश सरकार उनको इलाज के लिए यूरोप भेजने पर मान गई थी, हालांकि इलाज का खर्च उनके परिवार को ही उठाना था.

विएना में इलाज कराने के साथ ही उन्होंने तय किया कि वे यूरोप रह रहे भारतीय छात्रों को आज़ादी की लड़ाई के लिए एकजुट करेंगे. इसी दौरान उन्हें एक यूरोपीय प्रकाशक ने ‘द इंडियन स्ट्रगल’ किताब लिखने का काम सौंपा, जिसके बाद उन्हें एक सहयोगी की ज़रूरत महसूस हुई, जिसे अंग्रेजी के साथ साथ टाइपिंग भी आती हो.

 

बोस के दोस्त डॉ. माथुर ने उन्हें दो लोगों का रिफ़रेंस दिया. बोस ने दोनों के बारे में मिली जानकारी के आधार पर बेहतर उम्मीदवार को बुलाया, लेकिन इंटरव्यू के दौरान वे उससे संतुष्ट नहीं हुए. तब दूसरे उम्मीदवार को बुलाया गया.

ये दूसरी उम्मीदवार थीं, 23 साल की एमिली शेंकल. बोस ने इस ख़ूबसूरत ऑस्ट्रियाई युवती को जॉब दे दी. एमिली ने जून, 1934 से सुभाष चंद्र बोस के साथ काम करना शुरू कर दिया. 1934 में सुभाष चंद्र बोस 37 साल के थे और इस मुलाकात से पहले उनका सारा ध्यान अपने देश को अंग्रेजों से आज़ाद करने पर था. लेकिन सुभाष चंद्र बोस को अंदाजा भी नहीं था कि एमिली उनके जीवन में नया तूफ़ान लेकर आ चुकी हैं.

सुभाष के जीवन में प्यार का तूफ़ान

सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई शरत चंद्र बोस के पोते सुगत बोस ने सुभाष चंद्र बोस के जीवन पर ‘हिज़ मैजेस्टी अपोनेंट- सुभाष चंद्र बोस एंड इंडियाज स्ट्रगल अगेंस्ट एंपायर’ किताब लिखी है. इसमें उन्होंने लिखा है कि एमिली से मुलाकात के बाद सुभाष के जीवन में नाटकीय परिवर्तन आया.

सुगत बोस के मुताबिक इससे पहले सुभाष चंद्र बोस को प्रेम और शादी के कई ऑफ़र मिले थे, लेकिन उन्होंने किसी में दिलचस्पी नहीं ली थी. लेकिन एमिली की ख़ूबसूरती ने सुभाष पर मानो जादू सा कर दिया.

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