बिहार संवादी : सीएम नीतीश कुमार बोले- हिंदी के साथ उर्दू का भी विस्तार हो…

लाइव सिटीज डेस्क : देश में तनाव और टकराव के बढ़ रहे माहौल पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि यह समाज के विकास के लिए कहीं से भी ठीक नहीं है. इससे समाज को बचने की भी जरूरत है, साथ ही सामाजिक संगठनों का भी दायित्व है कि ऐसे माहौल से समाज को बाहर निकालने में वे मदद करें. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को पटना के तारामंडल मे आयोजित ‘बिहार संवादी’ कार्यक्रम में लोगों को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि समाज में प्रेम-सद्भाव फैलाने की जरूरत है, तभी समाज का विकास होगा. बता दें कि दैनिक जागरण की ओर से आयोजित दो दिवसीय बिहार संवादी कार्यक्रम का शनिवार को पहला दिन था. कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री ने दीप जलाकर किया. उनके साथ मौके पर यूपी विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित समेत जागरण परिवार के लोग मौजूद थे.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि कुछ लोग जान-बूझकर हमेशा माहौल को बिगाड़ने की कोशिश में लगे रहते हैं. संभव है कि इससे उन्हें क्षणिक फायदा भी मिलता होगा. लेकिन यह समाज के लिए घातक है. उन्होंने कार्यक्रम पर फोकस करते हुए कहा कि बहस और संवाद दो मुद्दे हैं और दोनों ही जरूरी हैं. बहस भी गलत चीज नहीं है. लेकिन दोनों का इस्तेमाल समाज में प्रेम फैलाने के काम में होना चाहिए. समाज में सद्भाव की जरूरत है. प्रेम का माहौल बने, इस पर काम करने की जरूरत है. हमें उम्मीद है कि प्रेम और सद्भाव का माहौल बनाने में यह कार्यक्रम अपना अहम रोल निभाएगा. उन्होंने कहा कि विकास के लिए समाज में सुधार जरूरी है. आपलोग इसके लिए मुहीम चलाएं. विकास भी न्याय के साथ हो. विकास का मतलब ही होता है समाज का उत्थान. हर इलाके का विकास और हर समुदाय की तरक्की.

उन्होंने कार्यक्रम के स्लोेगन ‘हिंदी हैं हम’पर भी बोले. उन्होंने स्पष्ट कहा कि ‘हिंदी हैं हम’ का मतलब केवल हिंदी व संस्कृत का विस्तार नहीं होता है, इसका मतलब उर्दू का भी विस्तार होता है और इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है. वहीं उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि आपलोगों के माध्यम से भी साहित्य की धारा बह रही है. साहित्य में इंटरेस्ट रखना अच्छी बात है. यहां आकर हमें पता चला कि हमारा प्रशासनिक पदाधिकारी को भी साहित्य से गहरा लगाव है. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक पदाधिकारी क्या, बिजनेसमैन, किसान, नौकरीपेशे लोग किसी को साहित्य से लगाव हो सकता है. उन्होंने कहा कि साहित्य उत्सव का मतलब ही होता है खुशी का माहौल. और यह तब होगा जब समाज में प्रेम का माहौल होगा.

नीतीश कुमार ने प्रिंट मीडिया को सलाह भी दी है कि अखबार बयानों पर चलता है. नेताओं के बयान भी जरूरी हैं, लेकिन सामाजिक मुद्दों को भी आगे बढ़ाने की जरूरत है. उनके लिए स्थान भी आपलोगों को सुनिश्चित करनी चाहिए. उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि आज कट एंड पेस्ट का जमाना आ गया है. अखबारों को इससे बचना होगा. इसके पहले यूपी विधानसभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने भी संबोधित किया तथा बिहार के लोगों के प्रति आभार प्रकट किया.

22 अप्रैल के कार्यक्रम
दूसरे दिन की शुरुआत ‘बिहार की कथाभूमि’ विषय पे हृषिकेश सुलभ, रामधारी सिंह दिवाकर से प्रेम भारद्वाज बातचीत करेंगे. ‘मोहब्बत, मोहब्बत, मोहब्बत’ सत्र में गीताश्री, रत्नेश्वर, राकेश रंजन, गिरिन्द्रनाथ झा, भावना शेखर एक साथ होंगे. ‘रचनात्मकता का ‘समकाल’ विषय पे अवधेश प्रीत, संतोष दीक्षित, अनिल विभाकर, अनु सिंह चौधरी आमने-सामने होंगे. बिन बोली भाषा सून? विषय पर ध्रुव नारायण गुप्त (भोजपुरी), अनिरुद्ध सिन्हा (अंगिका), विभूति आनंद (मैथिली), नरेन (मगही) से निराला तिवारी बातचीत करेंगी. सीता के कितने मिथ सत्र में प्रो तरुण कुमार, आशा प्रभात, उषा किरण खान, तारानंद वियोगी सीता को लेकर जारी अलग अलग मिथकों पर ये दिग्गज अपने विचार साझा करेंगे. दूसरे दिन के छठे सत्र में परिधि से केंद्र की दस्तक- (हाशिए का साहित्य) पर प्रेम कुमार मणि, महुआ माझी, निवेदिता शकील, सुजाता चौधरी आमने-सामने होंगे. धर्म और साहित्य सत्र में नरेंद्र कोहली अपनी बात रखेंगे और बिहार संवादी के अंतिम सत्र ‘सिनेमा में बिहारी’ विषय पे संजय मिश्रा, पंकज त्रिपाठी, विनोद अनुपम लोगों से रूबरू होंगे. 

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*