सुपुर्द-ए-खाक : तस्लीमुद्दीन का जनाजा निकला तो पूरा सिसौना रो पड़ा, बेटों ने दिया कंधा

लाइव सिटीज डेस्क/अररिया (विकास प्रकाश) : सीमांचल के गांधी और सरपंच कहे जानेवाले राजद सांसद व पूर्व मंत्री मो. तस्लीमुद्दीन का जनाजा निकला तो पूरा सिसौना रो पड़ा. पूरा अररिया उनके पैतृक गांव में उमड़ पड़ा था. हर आंख में आंसू आ गये थे. कोई खुल कर रो रहा था, कोई हिचकियां ले रहा था. मंगलवार को गमगीन माहौल में पूर्व सांसद तस्लीमुद्दीन सुपुर्द-ए-खाक हुए.

मो. तस्लीमुद्दीन के जनाजे में बिहार के दर्जनों सांसद व विधायक शामिल हुए. गम में अररिया बाजार बंद था. चारों ओर वीरानगी छायी हुई थी. अररिया के जोकीहाट के सिसौना में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी. लोगों की मानें तो सिसौना में शामिल होने के लिए एक लाख से अधिक लोग शामिल हुए थे. उनके जनाजे में शामिल होनेवाले प्रमुख नेताओं में भाजपा प्रवक्ता सैयद शाहनवाज़ हुसैन, लेसी सिंह समेत तमाम क्षेत्रीय विधायक पहुंचे हुए थे. बता दें कल राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद, मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव समेत अनेक नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी.

दिवंगत सांसद तस्लीमुद्दीन के जनाजे को उनके पुत्र जोकीहाट विधायक सरफराज आलम अपने भाइयों के साथ कंधे देकर कब्रगाह की ओर बढ़े. वहीं सुबह से ही भारी संख्या में लोग सांसद के गांव की ओर बढ़ रहे थे. कब्रगाह पर तो इतने अधिक लोग शामिल हुए थे कि वहां पर पैर रखने की जगह तक नहीं मिल रही थी. गांव में भी दिग्गज नेताओं से लेकर आम आदमी तक एक कतार में खड़े होकर अपने दिवंगत सांसद के अंतिम दर्शन कर रहे थे.

उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है. कब्रगाह जाने के रास्ते में जगह-जगह लोग नमाज पढ़ रहे थे. सिसौना के हर घर में अपने दिवंगत सांसद की चर्चा हो रही थी. बता दें कि सांसद तस्लीमुद्दीन सिसौना में लोगों के बीच सरपंच के रूप में लोकप्रिय थे. किसी को भी जरूरत पड़ने पर वे आसानी से उपलब्ध हो जाते थे.

गौरतलब है कि राजद सांसद तस्लीमुद्दीन का निधन रविवार को चेन्नई के आपोलो हॉस्पिटल में हो गया था. वे एक सरकारी कार्यक्रम में भाग लेने के चेन्नई गये हुए थे, वहीं बीमार पड़ गये. तब सांसद को अपोलो हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया. काफी इलाज के बाद भी उनकी तबीयत नहीं सुधरी और वे चल बसे.
वहीं सोमवार को मो. तस्लीमुद्दीन का पार्थिव शरीर विमान से बिहार के किशनगंज लाया गया. वहां से शव वाहन से पार्थिव शरीर को गुलाबबाग होते हुए सिसौना लाया गया. रास्ते भर उनके अंतिम दर्शन को लोग उमड़ते रहे. किशनगंज में सांसद आवास पर भी उनके पार्थिव शरीर को दर्शनार्थ रखा गया था. उनके काफिले में लगभग 150 गाड़ियां थीं.

सबसे दुखद तो यह रहा था कि सांसद तस्लीमुद्दीन के निधन के महज घंटे के बाद ही उनके भांजे के बेटे इनायत की मौत हो गयी. दरअसल दादा तस्लीमुद्दीन के निधन की खबर सुन उनका पोता इनायत सिसौना आ रहा था. रास्ते में ही उनका एक्सीडेंट हो गया.

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