तेजाब हत्याकांड : मो. शहाबुद्दीन की अपील पर पटना हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी की

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फाइल फोटो

पटना (एहतेशाम अहमद) : उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर सीवान के बहुचर्चित तेजाब हत्याकांड मामले की सुनवाई पटना उच्च न्यायालय में पूरी हो गयी. अदालत ने इस मामले में सभी पक्षों सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया. न्यायाधीश के. के. मंडल एवं न्यायाधीश संजय कुमार की खण्डपीठ ने सीवान से राजद के पूर्व बाहुबली सांसद मो. शहाबुद्दीन एवं तीन अन्य की ओर से दायर आपराधिक अपील पर कई दिनों तक सुनवाई करने के बाद शुक्रवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया.

गौरतलब है कि दोहरे हत्याकांड में निचली अदालत द्वारा पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन को उम्र कैद की सजा सुनायी गयी थी.  निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए मो. शहाबुद्दीन ने पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी.  जिसपर सुनवाई के बाद पटना उच्च न्यायालय ने गत वर्ष मो. शहाबुद्दीन को जमानत दे दी थी.

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पटना उच्च न्यायालय के उक्त आदेश के विरूद्ध बिहार सरकार एवं मामले के सूचक ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर, दी गयी जमानत को रद्द करने की मांग की थी.  जिसपर सुनवाई के पश्चात उच्चतम न्यायालय ने मो. शहाबुद्दीन की जमानत रद्द करते हुए उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया था. साथ ही साथ उच्चतम न्यायालय ने पटना हाईकोर्ट को यह निर्देश दिया था कि इस मामले में अभियुक्त द्वारा दायर अपील को जल्द से जल्द सुनवाई कर आदेश पारित कर दिया जाए.

उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद उन्हें सीवान कारा से दिल्ली स्थित तिहाड़ केन्द्रीय कारा में स्थानांतरित कर दिया गया है तथा मो. शहाबुद्दीन अभी भी दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं.

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फाइल फोटो

गौरतलब है कि तेजाबकांड की यह घटना वर्ष 2004 की है. सीवान के चंद्रेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के किराना दुकान पर रंगदारी मांगने आये बदमाशों से झड़प के बाद उनके दो बेटों की तेज़ाब से नहला कर हत्या कर दी गयी थी. इसके बाद दोनों के शवों को टुकड़े-टुकड़े कर फेंक दिया गया. दोनों भाइयों की हत्या का एकमात्र गवाह की भी बाद में सीवान में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी.

2004 के इस तेजाब कांड के नाम से मशहूर सनसनीखेज हत्या कांड में शहाबुद्दीन के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया था. लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई. लेकिन जब वर्ष 2005 में बिहार में नीतीश कुमार की सरकार आ गई. और शहाबुद्दीन पर शिकंजा कस गया. उसी साल शहाबुद्दीन को दिल्ली से गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिया गया था. और उसके बाद शहाबुद्दीन को कड़ी निगरानी के बीच जेल में रखा गया. जेल से ही वीडियों कॉफ्रेंसिंग के जरिए शहाबुद्दीन से जुड़े आपराधिक मामले की सुनवाई जेल में बने विशेष अदालत में होती थी.

शहाबुद्दीन को निचली अदालत ने इस बीच कई मामलों में सजा सुनाई. उनके खिलाफ 39 हत्या और अपहरण के मामले थे. 38 में उन्हें जमानत मिल चुकी थी. 39वां केस राजीव का था. जो अपने दो सगे भाईयों की हत्या का चश्मद्दीद गवाह था. मगर 2004 में उसकी हत्या के साथ ही शहाबुद्दीन की जमानत का रास्ता साफ हो गया था.

विशेष अदालत ने 11 दिसंबर 2015 को इस मामले में चार लोगों, पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन, शेख असलम, शेख आरिफ उर्फ सोनू और राजकुमार साह को IPC की धाराओं 302, 364 ए, 201 और 120बी के मामलों में दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनायी थी. जिसके खिलाफ इन अभियुक्तों ने उच्च न्यायालय में आपराधिक अपील दायर की थी. जिसपर सुनवाई ष्षुक्रवार को पूरी हो गयी.

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