बड़ा सवाल – क्या असेंबली में पहले की तरह अगल-बगल में बैठेंगे नीतीश-तेजस्वी

लाइव सिटीज डेस्क (रुद्र प्रताप सिंह) : अब बड़ा सवाल यह पूछा जा रहा है-क्या विधानमंडल के मानसून सत्र में सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पहले की तरह अगल-बगल में बैठेंगे? अगर बैठेंगे तो विपक्ष के सवाल का जवाब कौन देंगे- नीतीश या तेजस्वी? सवाल इसलिए कि सीबीआई के एफआईआर में नाम आने के बाद दोनों नेता खुली जगह पर अगल-बगल बैठने से परहेज कर रहे हैं.

कैबिनेट की बैठक की बात अलग है. यह बंद कमरे में होती है. दोनों के बीच ऐसी ही वन टू वन मुलाकात सचिवालय के बंद कमरे में हुई. श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित सरकारी समारोह में तेजस्वी नहीं गए थे.

साथ बैठे तो विपक्ष करेगा परेशान

तेजस्वी के इस्तीफे के लिए मुख्य विपक्षी दल भाजपा सबसे अधिक बेचैन है. भाजपा ही नहीं, एनडीए के दूसरे घटक दल भी इस प्रकरण पर सीएम के मुंह से कुछ सुनना चाहते हैं. उधर सीएम की चुप्पी टूटने का नाम नहीं ले रही है. विपक्ष ने उन्हें मौनी बाबा कहना शुरू कर दिया है. जाहिर है, इस प्रकरण पर ऐसी ही चुप्पी सत्र के दौरान विधानमंडल में संभव नहीं है. विपक्ष कुछ ऐसा करेगा, जिसकी प्रतिक्रिया में नीतीश-तेजस्वी को बोलना ही पड़ेगा. एक संभावना यह बनती है कि विपक्ष की आवाज को संख्या बल से दबा दिया जाए. फिर भी सदन के बाहर का हंगामा होगा ही. खबर भी बनेगी.

मीडिया को मिलेगा अधिक मौका

इस प्रकरण पर मीडिया के सामने प्रतिक्रिया देने से नीतीश बचते रहे हैं. तेजस्वी भी इसी रास्ते पर हैं. तेजस्वी से बाइट लेने के चक्कर में उनके सुरक्षाकर्मियों के साथ मीडिया की झड़प हो चुकी है. किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए ही नीतीश-तेजस्वी मुलाकात की शाम मीडियाकर्मियों को सचिवालय से बाहर कर दिया गया था. मगर, विधानमंडल परिसर से मीडिया को बाहर करना संभव नहीं है. सो,  दोनों नेताओं को विपक्ष के साथ मीडिया का सामना भी करना होगा. मुख्य भवन में कैमरे के प्रवेश पर पहले से पाबंदी लगी हुई है. मगर, परिसर में मीडियाकर्मियों की चहलकदमी पर कोई पाबंदी नहीं है. बिहार विधानसभा का मानसून सत्र 28 जुलाई से शुरू हो रहा है.

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कायम है इस्तीफे का सवाल

नीतीश-तेजस्वी से मुलाकात के बाद भी डिप्टी सीएम के इस्तीफे का मुद्दा अपनी जगह पर कायम है. कहते हैं कि नीतीश ने तेजस्वी को बताया कि उन्होंने कभी इस्तीफे की मांग नहीं की. यह सच भी है. मगर, जदयू के सभी प्रवक्ता बारी-बारी से यह मांग कर रहे हैं. इस भ्रम में कोई नहीं है कि पार्टी के प्रवक्ता अपनी मर्जी से तेजस्वी को दागी बताकर उनके इस्तीफे की अपेक्षा कर रहे हैं. वे जो कुछ बोल रहे हैं, वह सब सीएम की सहमति से ही बोल रहे हैं.

एक रास्ता बचा है

बिना किसी विवाद के मामला सलट जाए, इसके लिए एक ही रास्ता बचा है. वह है कि तेजस्वी को अदालत से राहत मिल जाए. खबर है कि वे सीबीआई के एफआईआर को रद कराने के लिए अदालत जा रहे हैं. वहां से राहत मिली तो इस्तीफे का मुद्दा टल जाएगा. अगर ऐसा नहीं हुआ तो विधानमंडल का सत्र इस अकेले मुद्दे की भेंट चढ़ सकता है.

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