राजद चाहता है कन्हैया को साथ लाना ! कहा- राजनीति में बंद नहीं रास्ते

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्कः बिहार की सियासत हर पल बदल रही है. विधानसभा का चुनाव जो इसी साल होना है. सभी अपने पाले को मजबूती देने में जुटे हैं. शर्त चाहे जो भी हो. इसी बीच एक सवाल बड़े ही जोर शोर से उठाया जा रहा है. सवाल है कि क्या नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और कन्हैया कुमार साथ आने वाले हैं. इस सवाल को और भी उलझा दिया है राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने. सवाल वही थी क्या तेजस्वी कन्हैया साथ आएंगे.

लाइव सिटीज के इस सवाल का जवाब मिला कि राजनीति में कुछ भी संभव है. यहां रास्ते हमेशा खुले रहते हैं. कभी बंद नहीं होते. समय का इंतजार करना चाहिए. लेकिन जगदानंद सिंह ने जवाब को थोड़ा घुमाकर कहा. उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि तेजस्वी और कन्हैया साथ लड़ेंगे..मैने कहा कि राजद और सीपीआई साथ आ सकते हैं. अब मतलब तो आप भी समझ रहे होंगे. सीपीआई का मतलब तो कन्हैया कुमार ही होता है आज की डेट में.



दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव 2020 से ठीक पहले राज्य की राजनीति को हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के मुखिया और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने गर्मा दिया है. मंगलवार को बिहार के सीएम नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी की मुलाकात के बाद से राज्य की राजनीति में नई पटकथा लिखने की तैयारी शुरू हो गई है.

इस मुलाकात के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. माना जा रहा है कि मांझी आरजेडी द्वारा उनकी उपेक्षा किए जाने से नाराज हैं और नई राजनीतिक संभावनाओं को तलाश रहे हैं. आरजेडी, मांझी और नीतीश कुमार की इस मुलाकात के बाद तिलमिला गई है. दोनों एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं. लेकिन जीतन राम मांझी आरजेडी पर ज्यादा हमलावर हैं.

मांझी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि आरजेडी ने राज्यसभा चुनाव में गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया. आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव सीपीआई नेता कन्हैया कुमार की लोकप्रियता से घबरा गए हैं. दोनों पिता-पुत्र कन्हैया कुमार की बढ़ती लोकप्रियता से डरते हैं. इसी के बाद बवाल की शुरूआत हुई. अब बयानबाजी चरम पर है.