लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : पॉलिटिक्स के पीके यानी प्रशांत किशोर जदयू में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर जबर्दस्त ट्रेंड कर रहे हैं. हर कोई अब उनके बारे में और अधिक जानना चाह रहे हैं. उनका पिछला रिकॉर्ड से लेकर उनकी पॉलिटिकल स्ट्रेटजी तक को लोग जानकारी लेने में लगे हैं. लेकिन बिहार के राजीतिक गलियारे में कई तरह की चर्चाएं एक साथ तैरने लगी हैं.

कहा जा रहा है कि रविवार की सुबह जैसे ही खबर आई कि प्रशांत किशोर जदयू में शामिल हो रहे हैं और सीधे पॉलिटिक्स करेंगे, तो लोगों ने सबसे पहले बक्सर के सांसद और केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे की नींद हराम कर दी. लोग अभी से कहने लगे हैं कि प्रशांत किशोर बक्सर के ही रहनेवाले हैं. सो, वहां से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे. वैसे यह भी क्लियर हो गया है कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे. लेकिन, भाजपा के वरीय नेता अश्विनी चौबे को कौन समझाए. लेकिन हकीकत भी यही है कि जब तक सीट शेयरिंग पर बात क्लियर नहीं हो जाए, बक्सर सांसद की नींद उड़ी ही रहेगी.

दरअसल प्रशांत किशोर मूल रूप से रोहतास जिले के रहने वाले हैं, लेकिन उनके माता-पिता सहित परिवार के लोग बक्सर में ही रहते हैं. उनका बक्सर में मकान भी है. ब्राह्मण जाति से आने वाले प्रशांत किशोर के बक्सर से लड़ने की इसलिए भी चर्चा है कि कुछ दिन पहले पॉलिटिकल कॉरिडोर में यह भी बात आई थी कि चौबे बक्सर को छोड़ सकते हैं. हालांकि इस मामले में अब तक अश्विनी चौबे की ओर से कोई अधिकृत बयान नहीं आया है.

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इतना ही नहीं, प्रशांत किशोर के आने का तुरंत-तुरंत वाला असर यह दिखा कि जदयू और नीतीश कुमार को लेकर बीजेपी कंफ्यूज्ड हो गई है. मंत्रणा दिल्ली तक शुरू हो गई. दरअसल, प्रशांत किशोर ऐसे शख्स हैं, जो अमित शाह की स्ट्रेटजी व जोड़-तोड़ को भली-भांति समझते हैं और उनके हर दांव को जानते हैं. फिर जदयू ने भी दो टूक कह दिया है कि जदयू की पोल स्ट्रेटजी अपनी होगी. मतलब, 2019 के लोक सभा चुनाव के लिए जदयू बीजेपी की पोल स्ट्रेटजी से डिक्टेट नहीं होगी. इससे बीजेपी की मन:स्थिति को महसूस किया जा सकता है.