बिहार ने सबसे पहले अपनाई थी हिंदी को, बनाई थी राज्य की अधिकारिक भाषा

लाइव सिटीज डेस्क: देश में 77% लोग हिंदी लिखते, पढ़ते और बोलते समझते हैं. देश-दुनिया में फैले हिंदी भाषी लोगों के लिए 14 सितंबर को दिन बेहद खास होता है. दरअसल 14 सितंबर हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसी दिन हिंदी को देश की राजभाषा होने का गौरव प्राप्त हुआ था. हिंदी को सबसे पहले 14 सितंबर, 1949 के दिन राजभाषा का दर्जा दिया गया था.

भारत जब अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराया गया तो इसके बाद भाषा को लेकर देश के सामने बड़ा सवाल खड़ा था. क्योंकि यहां बहुत सी भाषाएं बोली जाती हैं. इसके बाद संविधान निर्माण के समय संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया. लेकिन, हिंदी को समूचे राष्ट्र की भाषा बनाए जाने को लेकर कुछ लोग विरोध में भी थे. इसलिए, हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी को भी भारत की राजभाषा का दर्जा दे दिया गया.

पीएम नेहरू ने लिया था फैसला

वहीं भारत के पहले प्रधानमंत्री पंड़ित जवाहर लाल नेहरू ने इस दिन का महत्व देखते हुए कहा कि 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाया जाए. इसके बाद पहली बार 1953 को हिंदी दिवस मनाया गया. आजादी के 15 साल बाद जब लाल बहादुर शास्त्री सरकार ने देश की राजभाषा के तौर पर अंग्रेजी को हटाने का निश्चय किया तब गैर-हिंदी भाषी राज्यों में इसे लेकर तीव्र विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया. इसके बाद सरकार ने घुटने टेकते हुए अंग्रेजी को राजभाषा की कैटेगरी से हटाने का निर्णय स्थगित कर दिया.

बिहार ने सबसे पहले हिंदी को बनाया आधिकारिक भाषा

बिहार देश का पहला ऐसा राज्य है, जिसने सबसे पहले हिंदी को अपनी अधिकारिक भाषा माना है. इससे पहले 1881 तक बिहार कि आधिकारिक भाषा उर्दू थी. उर्दू के स्थान पर बिहार ने हिंदी को अपनाया. पहली बार 14 सितंबर 1953 को हिंदी दिवस मनाया गया. तभी से देश भर में हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है.

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