बिहार उपचुनाव के बहाने : तैयार हो रहा है चौरंगीलाल दोमुखिया का डबल स्टेटमेंट

लाइव सिटीज डेस्क (रुद्रप्रताप सिंह) : दो विधानसभा और एक लोकसभा उपचुनाव के नतीजे बुधवार 14 मार्च को आएंगे. प्रचार में दोनों फरीकों ने कड़ी मेहनत की है. इतनी ही मेहनत नतीजे के बाद जारी होनेवाले स्टेटमेंट की तैयारी में की जा रही है. दो तरह के स्टेटमेंट. एक जीत वाला. दूसरा हार में जीत का अहसास वाला. ठीक फिल्म वाले चैरंगीलाल दोमुखिया के डबल स्टेटमेंट की तरह. बाढ़ग्रस्त इलाके में अगर सीएम जहाज से जाएगा तो लिखो- ‘जनता मर रही है और सीएम साहब जहाज की सैर कर रहे हैं.’ अगर सीएम का सफर सड़क मार्ग से होता है तो लिखो- ‘जनता मर रही है और सीएम साहब जहाज के बदले मोटरगाड़ी से जनता का दुख देखने जा रहे हैं.’

बहुकोणीय हो सकते हैं स्टेटमेंट
तीनों सीटों पर महागठबंधन और एनडीए के बीच सीधा मुकाबला हुआ है. पर, स्टेटमेंट बहुकोणीय आएंगे. नतीजे तीन-शून्य या दो-एक की शक्ल में आए तो स्टेटमेंट दिलचस्प होगा. फर्ज कीजिए कि अररिया और जहानाबाद में महागठबंधन जीत जाता है. भाजपा भभुआ की सीट जीत जाती है. उस हालत में एनडीए कहेगा कि कुछ खास बात नहीं है, क्योंकि उपचुनाव दो के पिता और एक के पति के निधन के चलते हो रहा है, इसलिए तीनों सहानुभूति वोट के बल पर जीत गए. यह सबसे सुरक्षित स्टेटमेंट होगा.

महागठबंधन इसे नहीं मानेगा
दो-एक का नतीजा आया तो महागठबंधन और खासकर राजद का तेवर कड़ा रहेगा. वह सहानुभूति के तर्क को खारिज कर कहेगा कि जनता ने एनडीए के साथ नीतीश कुमार के गठबंधन को स्वीकार नहीं किया है. यह नीतीश के साथ मोदी की भी हार है. आज की तारीख में चुनाव हो तो राजद की अगुआई वाले महागठबंधन की सरकार राज्य में बनेगी. लोकसभा की तीन दर्जन सीटों पर महागठबंधन की जीत होगी. महागठबंधन के उत्साही नेता तुरंत विधानसभा भंग कर चुनाव की मांग करने लगेंगे. विधानसभा चुनाव की तैयारी चल ही रही है. यह और तेज हो जाएगी. कहीं तीनों सीटें राजद महागठबंधन के हक में गईं तो सचमुच एनडीए के नेताओं के लिए बेहद मुश्किल दौर शुरू हो जाएगा. त्रिपुरा की जीत और मेघालय-नगालैंड की जुगाड़ वाली सरकार की खुशी काफूर हो जाएगी. महागठबंधन के लोग खड़े-खड़े नरेंद्र मोदी से इस्तीफा मांग लेंगे.

अगर दांव उलट गया तो
राजनीति संभावनाओं का खेल है. फर्ज कीजिए कि तीनों सीटें एनडीए के खाते में चली गईं. स्टेटमेंट की बरसात होने लगेगी. जदयू के प्रवक्ता चीखने लगेंगे- हम तो पहले से कह रहे थे कि विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की शानदार कामयाबी नीतीश कुमार के चेहरे के बल पर मिली थी. नीतीश अलग हुए तो देखिए क्या रिजल्ट आया. कुछ उत्साही प्रवक्ता राजद और कांग्रेस के विधायकों से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग करने लगेंगे. विधायकों को आॅफर देंगे कि विधानसभा से इस्तीफा नहीं दे सकते तो कम पाला बदल कर इधर तो आ ही जाइए. यकीन मानिए, इस आशय का स्टेटमेंट भी बन रहा होगा. उस स्थिति में महागठबंधन के पास सर्वसुलभ स्टेटमेंट रहेगा- इवीएम में धांधली और कुछ नहीं. हम सरकार के साथ-साथ चुनावी धांधली से भी लड़ेंगे.

मांझी-कुशवाहा पर पड़ेगा प्रभाव
दिलचस्प है. हम और रालोसपा- दोनों के उम्मीदवार उपचुनाव में खड़े नहीं हुए. पर, नतीजे शायद इन दोनों दलों के नेताओं- जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को प्रभावित करेंगे. खासकर जहानाबाद के नतीजे का असर पड़ेगा. वहां अगर जदयू की हार होती है तो चुनाव प्रचार के प्रति उपेंद्र कुशवाहा की बेरूखी नोट की जाएगी. जदयू जीतता है तो ठीकरा हम के जीतनराम मांझी के सिर फूटेगा- उनमें अपनी बिरादरी का वोट ट्रांसफर कराने की क्षमता नहीं है. असर मांझी की दूसरी पीढ़ी पर भी पड़ सकता है. उनके पुत्र को राजद के वोट से विधान परिषद में भेजने का भरोसा दिया गया है. हां, मांझी के बचाव में अररिया का चुनाव नतीजा आ सकता है. शर्त यही कि उस सीट पर राजद की जीत हो जाए. अररिया में मांझी बिरादरी के वोटों की निर्णयकारी भूमिका होती है.

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