एनडीए के महाभोज में नेताओं ने खूब लिये ‘सियासी’ चटखारे, टेस्टी व्यंजनों के बीच हुईं मन की बातें

लाइव सिटीज डेस्क (राजेश ठाकुर) : लंबे समय के बाद एनडीए के लिए गुरुवार का दिन कुछ खास ही था. एनडीए के घटक दलों के लिए महाभोज का आयोजन किया गया. नाम दिया गया भाईचारा भोज. इस महाभोज का आयोजन नरेंद्र मोदी सरकार के चार साल पूरा होने की खुशी में किया गया. पटना में आयोजित इस महाभोज में एनडीए के तमाम नेता जुटे थे. नेताओं ने स्वादिष्ट भोजन व पकवानों संग सियासी चटखारे भी खूब लिये. नेताओं ने अपने मन की बात भी कही. भाजपा, लोजपा, जदयू, रालोसपा के बड़े व छोटे नेताओं का मिलन भी देखते ही बन रहा था. हालांकि हर किसी ने इसे सियासी भोज मानने से इनकार किया.

पटना के ज्ञान भवन में महाभोज को लेकर शाम से नेताओं का जमावड़ा लगने लगा. भोज पर सियासी रंग तब चढ़ा, जब दिग्गज नेता पहुंचने लगे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी के पहुंचने पर तो पूरा माहौल ही सियासी हो गया. तमाम नेताओं की नजर इन पर टिकी हुई थी. इनके पहुंचने पर भाजपा नेता काफी गदगद थे. हालांकि वे थोड़ा मायूस थे कि भोज में रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा नहीं पहुंच सके. भोज में उपस्थित मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि फ्लाइट छूट जाने के कारण उपेंद्र कुशवाहा नहीं आ सके.

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय और संगठन महामंत्री नागेंद्र नाथ ने सहयोगी दलों के नेताओं को आमंत्रित किया था. भोज में रविशंकर प्रसाद, नंदकिशोर यादव, शैलेश कुमार, नित्यानंद राय, चिराग पासवान समेत कई नेता उपस्थित थे. नेताओं ने भोज मेंं स्वादिष्ट व्यंजनों का जमकर लुत्फ उठाया. हंसी ठिठोली के माहौल पर बातें भी खूब हुईं. एनडीए के घटक दलों के नेताओं ने एकजुटता को भी दिखाने का प्रयास किया. दही, पापड़, इमरती, आइसक्रीम समेत दर्जन भर व्यंजन परोसे गये थे. हर कोई स्वाद की प्रशंसा कर रहा था. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि यह सियासी भोज नहीं है. नरेंद्र मोदी सरकार की चार साल की उपलब्धि पर इसका आयोजन किया गया था.

बहरहाल भले ही नेताओं का बयान कुछ भी कहे, लेकिन इसे लोग सियासी भोज ही बता रहे हैं. खासकर भोज से अचानक उपेंद्र कुशवाहा के ‘गायब’ होने पर भी लोग तरह तरह के कयास लगा रहे हैं. हालांकि इस पर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है. हां, यह अलग बात है कि गुरुवार मतलब महाभोज के दिन ही रालोसपा ने उपेंद्र कुशवाहा के चेहरे पर चुनाव कराने और जदयू ने 25 सीटों से कम पर समझौता नहीं करने का पैंतरा भी चला है. लेकिन भोज में इस तरह के कोई सवाल नहीं उठा है.

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