भ्रष्ट अफसरों को हाईकोर्ट का झटका, केस हुआ तो पड़ जाएंगे लेने के देने

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पटना हाईकोर्ट

लाइव सिटीज पटना (विधि संवाददाता) : बिहार में अफसर संभल जाएं. यदि पकड़े गये और मुकदमा चला तो फिर लेने के देने पड़ जाएंगे. यदि वे भ्रष्टाचार में दोषी पाए गये तो कड़ी कार्रवाई होगी ही, मुकदमा चलने तक उनके पेंशन से लेकर ग्रेजुएटी तक पर आफत आएगी. छुट्टियां भी रुक जाएंगी. दरअसल पटना हाईकोर्ट ने बुधवार भ्रष्टाचार के मामले में सुनवाई की और उसने बिहार सरकार के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी.

पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि भ्रष्टाचार व अन्य आपराधिक मुकदमों में लिप्त सरकारीकर्मियों के उपार्जित अवकाश (लीव इनकैशमेंट) पर राज्य सरकार तब तक 100 परसेंट रोक लगा सकती है, जब तक उनके ऊपर चल रहे  मुकदमे या विभागीय जांच का निष्पादन नहीं हो जाए. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन, न्यायमूर्ति डॉ रवि रंजन एवं न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की पूर्णपीठ ने यह फैसला सुनाया.

अरविंद कुमार सिंह ने इस संबंध में रिट याचिका दायर की थी. सुनवाई के लिए इस याचिका को पूर्ण पीठ के पास रेफर की गई थी. आज पटना हाईकोर्ट की पूर्णपीठ ने मामले को निष्पादित करते हुए उपरोक्त फैसला सुनाया. फैसले में यह भी कहा गया है कि विभागीय जांच या आपराधिक मुकदमों में लिप्त सरकारी कर्मियों की पेंशन व ग्रेच्युटी की 10 परसेंट राशि पर भी सरकार की रोक का फैसला सही है.

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रिटायर शिक्षकों को पेंशन भुगतान नहीं करने पर हाईकोर्ट नाराज : राज्य के विश्वविद्यालयों के सेवानिवृत शिक्षकों के पेंशन व अन्य बकाये नहीं देने पर पटना हाईकोर्ट ने नाराजगी जतायी है. राज्य सरकार व विश्वविद्यालय को अगली सुनवाई में कोर्ट ने भुगतान के बारे में जानकारी देने को कहा है. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कृष्णकांत सिंह की ओर से दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया. याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सूबे के विभिन्न विश्वविद्यालयों के सेवानिवृत शिक्षकों को सेवानिवृति के बाद पेंशन व उनके बकाये के भुगतान के लिए कार्यालय का चक्कर लगाकर थक गये हैं, परंतु उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है. मामले पर 17 मई को अगली सुनवाई होगी.

अवमानना मामले में नोटिस का मामला : अवमानना मामले में आरोपी अधिकारी को हाईकोर्ट द्वारा निर्गत नोटिस को लेने से इनकार करने पर अदालत नाराज. ऐसे गैर कानूनी हरकत का दुस्साहस दिखाने वाले कटिहार के तत्कालीन अनुमंडलाधिकारी सह कटिहार प्रमंडल के सेंट्रल बैंक कर्मचारी क्रेडिट कॉपरेटिव सोसाइटी के प्रशासक शशिभूषण प्रसाद को दो हफ्ते में जमानतीय वारंट निर्गत कर हाईकोर्ट में पेश करने का आदेश दिया. न्यायमूर्ति हेमंत कुमार श्रीवास्तव की एकलपीठ ने कृष्ण कुमार लाल की अवमानना याचिका को सुनते हुए उक्त आदेश दिया. मामले की अगली सुनवाई 16 मई को होगी.

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