सदी के सबसे बड़े राजनीतिक मौसम वैज्ञानिक की हलचल, भाजपा के लिए अच्छा नहीं है अगला चुनाव

लाइव सिटीज डेस्क (रुद्रप्रताप सिंह) : उपचुनाव के नतीजों से नहीं, राजनीति के मौसम वैज्ञानिक केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ‘डिस्टरवेंस’ से पता चल रहा है कि अगले साल होनेवाले लोकसभा चुनाव में समग्रता में एनडीए और खासकर भाजपा के लिए सूखे के आसार हैं. लिहाजा अपनी फसल बचाने के लिए वे जल के सभी संभावित स्रोतों की पहचान कर रहे हैं. नदी, नहर, तालाब, बोरिंग-सब पर उनकी नजर है. फिर भी वे राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव नतीजों की प्रतीक्षा करेंगे. इस बीच, सभी स्रोतों को अलर्ट मोड पर रखे रहेंगे. उनके लिए अच्छी बात यह है कि जल के किसी आपूर्तिकर्ता को उनसे परहेज नहीं है. बस, अर्जी देने भर की देरी है.

एनडीए में अच्छा नहीं लगा
कहने को तो लोजपा सुप्रीमो केंदीय मंत्री हैं. लेकिन, उन्हें मजा नहीं आ रहा है. वे जिस स्टाइल में काम करने के आदी रहे हैं, उसमें बाधा आ रही है. विभाग मन लायक नहीं है. अब तक झेल रहे थे. उपचुनाव के नतीजों से उन्होंने मान लिया है कि भाजपा के साथ रहकर अगला चुनाव जीतना संभव नहीं है. अंदेशा यह भी है कि भाजपा की अगुआई वाले एनडीए में रहने पर मनमाफिक सीटें नहीं मिल पाएंगी. तिस पर जीत की गारंटी नहीं है. पीएम मोदी उन लोगों को माफ नहीं करते, जिन्होंने गोधरा कांड के बहाने उनकी आलोचना की. पासवान इस श्रेणी के लोगों में अव्वल हैं. गोधरा के नाम पर ही उन्होंने वाजपेयी कैबिनेट से इस्तीफा दिया था.

नीतीश से बढ़ाई दोस्ती
राजद के साथ नीतीश की दोस्ती से आहत पासवान ने एक समय उनकी खूब आलोचना की. सरकार के कामकाज पर सीधा हमला किया. नीतीश के एनडीए में शामिल होते ही सुप्रीमो ने उनके सामने दोस्ती का हाथ बढ़ाया. तीन काम हाथोंहाथ लिये. लगातार चुनाव हार कर घर बैठ गए अनुज पशुपति कुमार पारस को विधान परिषद में भिजवाया. कैबिनेट मंत्री बनवाया.

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बेटे चिराग पासवान की आंख की किरकिरी बने जमुई के डीएम का तबादला करवा दिया. पासवानों को महादलित में इंट्री उन्हीं के प्रयासों से मिली. अब वे नीतीश से मिलकर भाजपा रहित किसी गठबंधन की कल्पना कर रहे हैं, जिसमें जदयू, लोजपा के अलावा रालोसपा और कांग्रेस को भी शामिल करने की योजना है. यह गैर-राजद, गैर-भाजपा गठबंधन की संरचना है. योजना के मुताबिक इसमेें वाम दलों को भी शामिल किया जा सकता है.

तेजस्वी की तारीफ का क्या मतलब है
उपचुनाव के परिणाम के बाद उन्होंने सबसे पहले तेजस्वी-तेजप्रताप की तारीफ की. साथ में अपने पुत्र चिराग पासवान का भी नाम जोड़ा-जमाना इन्हीं लोगों का है. दरअसल, यह उस रणनीति का अंग है, जिसमें हर हाल में सिंचाई की गारंटी का लक्ष्य रखा गया है. खबर यह है कि तेजस्वी और चिराग के बीच सहमति बनी है कि वे एक दूसरे पर हमला नहीं करेंगे. इधर राजद में पासवान को लेकर अधिक उत्सुकता नहीं है. कारण- हाजीपुर के यादव मतदाता अभी तक चाभी कांड को नहीं भूले हैं. 2005 में रामविलास पासवान सत्ता की चाभी लेकर बैठ गए थे. राबड़ी देवी सीएम नहीं बन पाई थीं.

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सर्वे की रिपोर्ट खिलाफ में है
सूत्रों की मानें तो राजद ने एक सर्वे कराया है. सर्वे का विषय यह था कि पासवान को महादलित में शामिल कराने की कैसी प्रतिक्रिया अन्य दलितों में है. यह सर्वे नतीजे के तौर पर बताता है कि सरकार के इस फैसले से कमजोर दलित जातियों में नीतीश कुमार के प्रति नाराजगी है. गैर-पासवान दलितों का झुकाव राजद की ओर बढ़ सकता है. ऐसी हालत में रामविलास पासवान अगर राजद के साथ मोर्चा बनाते हैं तो गैर-पासवान दलित जातियों की नाराजगी का खामियाजा तेजस्वी को भुगतना पड़ सकता है.

चिराग पासवान

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