कैश किल्लत के चक्कर में हुई मौत के विरोध में सड़क पर उतरे लोग

लाइव सिटीज डेस्क : नोटबंदी जैसे हालात फिर से होने लगा है. कैश की किल्लत से लोग त्राहिमाम कर रहे हैं. शहरी क्षेत्र में कुछ हद तक स्थिति ठीक है, पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति भयावह होती जा रही है. कैश के लिए परिजन अपने ही पैसों का चक्कर लगाते रहे. पैसा नहीं मिलने से घरवाले वृद्धा का इलाज नहीं करा सका. और, उसकी मौत हो गयी. इसे लेकर घरवालों समेत ग्रामीणों में रोष है. घटना के विरोध में लोगों ने सड़क जाम कर दिया. मामला पूर्णिया के रुपौली क्षेत्र का है. बाद में पुलिस ने मामले को सलटाया. वहीं सेंट्रल बैंक के प्रबंधक ने कहा कि इमरजेंसी मामले की जानकारी उन्हें नहीं थी.

बताया जाता है कि पूर्णिया के रुपौली में महिला बीबी नूरजहां खातून की मौत हो गयी. उसका इलाज पैसे के अभाव में समय पर नहीं हो सका. वे मैनी संथाल गांव की रहने वाली थी. महिला की बहू रसीदा खातून के अनुसार उनकी सास काफी बीमार थीं. इलाज के लिए पैसों की जरूरत थी. लेकिन बैंकवाले पैसा देने में आनाकानी कर रहे थे. गुरुवार को नूरजहां की स्थिति बिगड़ गयी तो वे लोग ऑटो से इलाज के लिए उसे पूर्णिया के लिए निकले. एक बार घरवालों ने बैंक वालों से पैसे के लिए गिड़गिड़ाया.

मृतका के पुत्र लाल मोहम्मद ने रुपौली सेंट्रल बैंक के अपने बचत खाते से 17 हजार रुपये निकालने के लिए फॉर्म भी भरा. उन्होंने 17 हजार का फॉर्म भरकर बैंककर्मी को दिया, लेकिन बैंककर्मी ने पैसे की कमी का बहाना बनाते हुए रुपये देने से इनकार कर दिया. इसी बीच आॅटो पर सवार 65 वर्षीया महिला नूरजहां की मौत हो गयी. उसे आनन-फानन में रुपौली अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इससे नाराज लोगों ने रुपौली कुरसेला स्टेट हाइवे को जाम कर दिया. बाद में मौके पर पुलिस पहुंची और जाम खत्म हुआ.

पड़ताल : कैशलेस हो गया बिहार, पैसे के लिए हाहाकार, ATM-ATM भटक रहे हैं लोग

उधर बैंक के सहायक प्रबंधक सुधांशु शेखर के अनुसार बैंक में पैसे की कमी है, जिस कारण सही से ग्राहकों को भुगतान नहीं हो पा रहा है. हालांकि इस इमरजेंसी केस का उन्हें पता नहीं था. वहीं स्थानीय लोगों को कहना है कि अपने ही पैसे के लिए लोग आज मोहताज हो गये हैं. बैंक में पैसा रहते हुए भी वे इसे नहीं निकाल पा रहे हैं. बता दें कि तीन दिन पहले लाइव सिटीज ने कैश की किल्लत पर बिहार के तमाम जिलों का जायजा लिया था. कहीं मशीन ही खराब है, तो कहीं लिंक फेल है, जहां दोनों ठीक है, वहां पैसे ही नहीं हैं. लोगों की स्थिति खराब है.

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