बढ़ा है मौसम विज्ञानी रामविलास पासवान की झोपड़ी का तापमान, कीमत भी वसूल रहे हैं नीतीश कुमार से

लाइव सिटीज (रुद्रप्रताप सिंह) : राजनीति के जाने-माने मौसम विज्ञानी रामविलास पासवान इन दिनों अपने घर के तापमान को लेकर परेशान हैं. थाह नहीं मिल रहा है कि कब आंधी आएगी और गरज के साथ छींटे नहीं, बल्कि मूसलधार वर्षा शुरू हो जाएगी. लिहाजा आफत आसमानी से बचाव के लिए वह कभी नीतीश कुमार की शरण में जा रहे हैं तो कभी सेक्युलरिज्म के नाम पर भाजपा को हल्की झिड़की दे दे रहे हैं. कोई ठोस कदम इसलिए नहीं उठा पा रहे हैं, क्योंकि उन्हें लोजपा के भीतर के मौसम का थाह नहीं मिल रहा है. अंदरूनी सूत्र बता रहे हैं कि पार्टी का तापमान इन दिनों अधिकतम स्तर को छू रहा है.

तनाव ने दिया मौका
रामनवमी के मौके पर कई जिलों में पसरे तनाव के मौसम ने लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान का पूरा साथ दिया. इसी बहाने सीएम नीतीश कुमार से उनकी नजदीकी बढ़ी. पुराना अरमान भी सधने जा रहा है. जूनियर सुप्रीमो चिराग पासवान का यही अरमान था कि जमुई के डीएम हटा दिए जाएं. यह होने जा रहा है. भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों के अगले फेरबदल में जमुई के डीएम बदले जा सकते हैं. उन्हें शंट नहीं किया जाएगा. कोई जिला मिलेगा. लेकिन, इतने से ही चिराग रोशन हो जाएगा. चिराग की शिकायत थी कि डीएम उन्हें एमपी के हिसाब से भाव नहीं देते हैं.

दलित-महादलित
पासवान ने नीतीश से अब तक की मुलाकातों में दो मुख्य मांग परिवार के लिए और एक मांग समाज के लिए लिए रखी. समाज की मांग का कोई खास मकसद नहीं है. अब पासवान भी महादलित हो जाएंगे. ऐसा होता है तो राज्य की कोई भी अनुसूचित जाति दलित सूची में रहेगी ही नहीं. अभी पासवान को छोड़कर सभी अनुसूचित जातियां महादलितों की सूची में हैं. परिवार के लिए दो में से एक मांग पहले ही पूरी हो चुकी है. छोटे भाई पशुपति कुमार पारस को कैबिनेट मंत्री और विधान परिषद की सदस्यता देने की मांग पहली थी. दूसरी मांग डीएम के तबादले की थी.

गरमाहट की वजह
राजनीतिक सौदे के वक्त नीतीश कुमार के साथ परिवार के सदस्य ही बैठे थे. लेकिन, कहीं से यह हवा उड़ी कि भाई को मंत्री बनाने के एवज में पासवान ने मुंगेर लोकसभा सीट का सौदा कर लिया है. यह सीट जदयू के हिस्से में चली जाएगी. नीतीश कुमार के सबसे विश्वसनीय कैबिनेट मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह वहां से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे. अभी लोजपा की वीणा देवी वहां की सांसद हैं. वह सूरजभान सिंह की धर्मपत्नी हैं. जाहिर है, इस मुलाकात ने सूरजभान को असुरक्षित कर दिया है. मुंगेर के बदले उनकी धर्मपत्नी को नवादा या बेगूसराय से उम्मीवार बनाने की चर्चा है. ये दोनों सीटें भाजपा की जीती हुई है.

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आशंकित हैं रामा-चौधरी भी
सूरजभान की पत्नी वीणा देवी की तरह खगड़िया के लोजपा सांसद चौधरी महबूब अली कैसर और वैशाली के रामा सिंह भी अपनी सीटों को लेकर असुरक्षा भाव में है. वजह ये आशंका है कि इस बार एनडीए में लोजपा को पहले की तरह सात सीटें नहीं मिलेंगी. जीती हुई छह सीटों में से भी कटौती होगी. छह में से तीन सांसद परिवार के ही हैं-पासवान पिता-पुत्र और अनुज रामचंद्र पासवान. यह तो कोई गैर-जानकार भी बता सकता है कि सीटों की कटौती का असर परिवार पर नहीं पड़ेगा. इसके दायरे में परिवार के बाहर के सांसद ही आएंगे. कौन आएंगे? पता नहीं. डर तीनों रहे हैं.

पार्टी में फूट की आशंका
ताजा हाल यह बताया जा रहा है कि परिवार के बाहर के तीन में से दो सांसदों पर राजद डोरे डाल रहा है. इनमें से एक को कहा जा रहा है कि मौजूदा सीट के बदले वे शिवहर में भ्रमण कार्यक्रम तेज कर दें. दूसरे को पहले वाली सीट से ही चुनाव लड़ने का आॅफर दिया जा रहा है. किस्सा का सार यह कि ‘झोपड़ी’ में गजब की उथल-पुथल मची हुई है.

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